दोहा कतर में फंसे तरनतारन के युवक की मदद के लिए आगे आए डॉ.एस.पी.सिंह ओबराय
गुरदेव सिंह की पीड़ित पत्नी को दी 2 लाख रुपये की सहायता राशि
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अमृतसर 18-May-2026
अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर देश-विदेश में जरूरतमंदों के लिए मसीहा बनकर प्रतिदिन मानव सेवा की नई मिसालें कायम कर रहे दुबई के प्रसिद्ध उद्योगपति एवं सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट के संरक्षक डॉ.एस.पी.सिंह ओबराय द्वारा अब दोहा, कतर में फंसे तरनतारन जिले के एक युवक को बचाने के लिए 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए डॉ. एस.पी. सिंह ओबराय ने बताया कि कुछ समय पहले ट्रस्ट की तरनतारन टीम के माध्यम से गांव जवंदा कलां की निर्मल कौर ने उन्हें बताया था कि उनका पति गुरदेव सिंह पुत्र जसवंत सिंह मजदूरी के लिए दोहा, कतर गया हुआ था।
उन्होंने बताया कि जिस निर्माणाधीन बिल्डिंग में गुरदेव सिंह काम करता था, वह पिछले वर्ष फरवरी महीने में किसी कारणवश गिर गई थी और मलबे के नीचे आने से उनके साथ काम कर रहे एक पाकिस्तानी युवक की मौत हो गई थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान उक्त घटना के लिए उस बिल्डिंग में काम करने वाले बाकी तीन व्यक्तियों, जिनमें गुरदेव सिंह, मोहम्मद खलील और सिकंदर आजम शामिल थे, को अदालत द्वारा दोषी ठहराते हुए भारतीय मुद्रा के अनुसार लगभग 50 लाख रुपये बतौर ब्लड मनी जुर्माना लगाया गया था।
इसके तहत गुरदेव सिंह के हिस्से में लगभग 17 लाख रुपये आए थे। उन्होंने बताया कि हालांकि कुछ समय जेल में रखने के बाद अदालत द्वारा गुरदेव सिंह को रिहा कर दिया गया था, लेकिन उसके भारत लौटने और काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
उन्होंने बताया कि गुरदेव सिंह पर लगे जुर्माने की बड़ी राशि गांववासियों द्वारा आपसी सहयोग से एकत्र कर ली गई है, जबकि कुछ राशि दोहा कतर में रह रहे उसके साथियों द्वारा दी जानी है। शेष आवश्यक 2 लाख रुपये आज ट्रस्ट के पंजाब प्रधान सुखजिंदर सिंह हेर, मनप्रीत सिंह संधू, नवजीत सिंह घई, तरनतारन प्रधान दिलबाग सिंह जोधा, कुलविंदर सिंह पिंका तथा मुखराम सिंह की मौजूदगी में गुरदेव सिंह की पीड़ित पत्नी निर्मल कौर को सौंप दिए गए, ताकि गुरदेव सिंह जल्द अपने परिवार के पास लौट सके।
इस दौरान गुरदेव सिंह की पत्नी निर्मल कौर ने भावुक होते हुए इस बड़े प्रयास के लिए डॉ. एस.पी. सिंह ओबराय का दिल से धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी इस मदद से उनका परिवार और उनकी दो छोटी बेटियां जल्द अपने पिता से मिल सकेंगी।