5 Dariya News

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में पारिस्थितिक फसल अवशेष प्रबंधन पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

5 Dariya News

बठिंडा 15-May-2026

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में, इंस्टीट्यूट फॉर इन्क्लूसिव पॉलिसी एंड गवर्नेंस तथा रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में “पारिस्थितिक फसल अवशेष प्रबंधन: प्रभाव, चुनौतियाँ एवं लचीलापन की दिशा में मार्ग” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, कृषि विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों तथा किसान नेताओं ने भाग लेकर फसल अवशेष प्रबंधन और धान की खेती के विकल्पों पर सार्थक चर्चा की। 

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने से उत्पन्न पर्यावरणीय एवं सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के समाधान तलाशना तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था। सम्मेलन में पूर्व सांसद एवं आरएमपी के उपाध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) आदर्श पाल विग, पद्मश्री सम्मानित प्रगतिशील किसान श्री कंवल सिंह चौहान, महाराष्ट्र सरकार के राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष श्री पाशा पटेल, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद श्री भूपिंदर सिंह मान, महाराजा भूपिंदर सिंह पंजाब स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. पुष्पिंदर सिंह गिल, केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब के कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा सहित डॉ. मनीष, प्रो. राजन भंडारी और डॉ. भारती उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने पारिस्थितिक कृषि के लिए नीति-आधारित एवं सामुदायिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि टिकाऊ फसल अवशेष प्रबंधन को ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा किसान कल्याण से जोड़ना आवश्यक है। 

श्री पाशा पटेल ने फसल विविधीकरण और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों के महत्व को रेखांकित किया, जबकि प्रो. (डॉ.) आदर्श पाल विग ने उत्तर भारत में पराली जलाने के पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। पद्मश्री श्री कंवल सिंह चौहान ने इन-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए किसान-आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

सम्मेलन के अंतर्गत तीन विषयगत सत्र आयोजित किए गए, जिनमें पराली जलाने की प्रवृत्तियों एवं पारिस्थितिक प्रभावों, नीतिगत एवं जमीनी चुनौतियों, फसल अवशेष प्रबंधन के नवाचारों तथा टिकाऊ कृषि नीतियों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर खेती विरासत मिशन, पंजाब द्वारा धान की खेती के विकल्पों एवं फसल अवशेषों के नवाचारी उपयोगों को प्रदर्शित करती प्रदर्शनी भी लगाई गई। 

ग्रामीण समुदायों में टिकाऊ कृषि विकल्पों और प्रभावी फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु विश्वविद्यालय परिसर से एक जागरूकता रैली को विश्वविद्यालय के शिक्षकों, आईआईपीजी टीम तथा खेती विरासत मिशन पंजाब के प्रतिनिधियों द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम के दौरान कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा ने सभी विशिष्ट अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। 

सम्मेलन के समापन पर आयोजन सचिव प्रो. राजन भंडारी ने विद्यार्थियों एवं बठिंडा जिले के नागरिकों सहित सभी प्रतिभागियों का उत्साहपूर्ण सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। सम्मेलन का समापन किसानों की समस्याओं एवं नीतिगत सुझावों पर चर्चा के साथ हुआ, जिसमें किसान-केंद्रित, सहयोगात्मक एवं टिकाऊ कृषि दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया गया। सम्मेलन में पंजाब एवं पड़ोसी राज्यों से 316 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।