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Mothers Day : ऑटो रिक्शा वाले और पापड़ वाले की कहानी

पति के गुजरने के बाद आनंद कुमार और आरके श्रीवास्तव की मां ने कैसे संघर्ष कर अपने बेटों को बनाया देश के लोकप्रिय शिक्षक, आइए जानते है इन दो मां के संघर्ष की कहानी...

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बिहार 10-May-2026

मदर्स डे के अवसर पर देश के दो प्रसिद्ध शिक्षक जिनके शैक्षणिक कार्यशैली को देश की राष्ट्रपति ने भी सराहा है। बिहार के ये दोनों शिक्षक राष्ट्रपति भवन तक का सफर तय कर चुके है। आनंद कुमार (सुपर 30 के संस्थापक) और आरके श्रीवास्तव (1 रुपया गुरु दक्षिणा वाले मैथमेटिक्स गुरु) की कहानियाँ अक्सर प्रेरणा का स्रोत बनती हैं। दोनों ही शिक्षकों ने अपने जीवन और सफलता का श्रेय अपनी माताओं के संघर्ष और आशीर्वाद को दिया है।

*पापड़ वाले आनंद कुमार:  सुपर 30 का संकल्प एवं जयंती देवी का योगदान: आनंद कुमार के अनुसार, उनकी माँ जयंती देवी 'सुपर 30' की नींव हैं।जब उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने का निर्णय लिया, तो उनकी माँ ने खुद रसोई संभाली और बच्चों के लिए खाना बनाया ताकि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।

*ऑटो रिक्शा वाले आरके श्रीवास्तव: 'मैथमेटिक्स गुरु' का माँ के प्रति सम्मान सफलता का आधार: 

कभी घर का खर्च ऑटो रिक्शा से चलता था, अब बन चुके है देश के प्रसिद्ध शिक्षक, जब आरके श्रीवास्तव 5 वर्ष के थे तो उनके पिता इन दुनिया को छोड़ चले गए, मां आरती देवी के त्याग और संघर्ष ने आरके श्रीवास्तव को बनाया देश का लोकप्रिय शिक्षक।

आरके श्रीवास्तव, जिन्हें 1 रुपये में शिक्षा देने के लिए जाना जाता है, अपनी माँ को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानते हैं. वे सोशल मीडिया और इंटरव्यू के माध्यम से अक्सर संदेश देते हैं कि "माँ-बाप से बढ़कर जग में कोई दूजा नहीं खजाना".

बचपन की यादें: आरके श्रीवास्तव बताते हैं कि कैसे उनकी माँ ने विपरीत परिस्थितियों में उन्हें और उनके परिवार को संभाला। मदर्स डे पर वे अक्सर अपनी माँ के संघर्षों को याद करते हुए युवाओं को माता-पिता का सम्मान करने के लिए प्रेरित करते हैं।

आरके श्रीवास्तव (Mathematics Guru):

 बिहार के एक प्रसिद्ध शिक्षक हैं जो '1 रुपया गुरु दक्षिणा' प्रोग्राम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पढ़ाते हैं। उन्होंने अब तक 950 से अधिक छात्रों को IIT और NIT में सफलता दिलाई है।

आरके श्रीवास्तव (1 रुपया गुरु दक्षिणा) की मुख्य उद्देश्य: 

आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को IIT/JEE के लिए तैयार करना।

परिणाम: 950 से अधिक छात्रों को इंजीनियर बना चुके हैं, जिनमें से कई IIT, NIT और अन्य प्रतिष्ठित कॉलेजों में पढ़ रहे हैं या विदेश में कार्यरत हैं।

पहचान: उन्हें 'मैथमेटिक्स गुरु' के नाम से जाना जाता है और वे पटना में पढ़ाते हैं।

सफलता: उनकी क्लास से पढ़कर सैकड़ों छात्र IIT में अपनी जगह बना चुके हैं।

इन दोनों गुरुओं का मानना है कि एक माँ न केवल जन्म देती है, बल्कि वह पहली शिक्षक भी होती है जो बच्चों को कठिन परिस्थितियों से लड़ना सिखाती है।

कीचड़ में जन्म लेने वाला कमल भी कभी देवाशीष पायेगा, ऐसा नहीं सोचा था। आज बात कर रहे उन  भारतीय प्रतिभा की जिन्होने यह साबित कर दिखाया की जीतने वाले छोङते नहीं, छोड़ने वाले जीतते नहीं। अपने कड़ी मेहनत, उच्ची सोच, पक्का इरादा के बल पर बन चुके है लाखों युवाओं के रॉल मॉडल है ये ।