चंडीगढ़ में अग्नि सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करने हेतु हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 का चंडीगढ़ में विस्तार
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चंडीगढ़ 07-May-2026
चंडीगढ़ जैसे विकसित शहरी क्षेत्र में अग्नि सुरक्षा तंत्र को अधिक आधुनिक, प्रभावी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 के प्रावधानों को उपयुक्त संशोधनों सहित संघराज्य क्षेत्र चंडीगढ़ तक विस्तारित किया है। यह विस्तार Punjab Reorganisation Act, 1966 की धारा 87 के अंतर्गत अधिसूचना जारी कर किया गया है। यह चंडीगढ़, जो कि अपना विधायिका रहित संघराज्य क्षेत्र है, में उपयुक्त राज्य विधियों के विस्तार की स्थापित व्यवस्था के अनुरूप है।
वर्तमान में चंडीगढ़ में अग्नि सुरक्षा का विनियमन Delhi Fire Prevention and Fire Safety Act, 1986 (चंडीगढ़ तक विस्तारित) के अंतर्गत किया जा रहा है। तथापि, बदलती शहरी आवश्यकताओं, बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों तथा आधुनिक अग्नि सुरक्षा मानकों की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए एक अद्यतन एवं समग्र विधिक ढांचा अपनाना आवश्यक समझा गया।
चंडीगढ़ में विस्तारित हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 Model Fire Service Bill, 2019 तथा केंद्र सरकार की ‘Ease of Living’ एवं ‘Ease of Doing Business’ को बढ़ावा देने हेतु लागू किए जा रहे विनियमन-सरलीकरण (Deregulation) प्रयासों के अनुरूप है।
अब तक 12 राज्यों द्वारा इस मॉडल कानून को अपनाते हुए नए अधिनियम बनाए गए हैं अथवा अपने मौजूदा अग्निशमन कानूनों में संशोधन किया गया है, जबकि 16 राज्य/संघराज्य क्षेत्रों में इस दिशा में सुधार की प्रक्रिया प्रगति पर है। संघराज्य क्षेत्रों में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप तथा दादरा एवं नगर हवेली एवं दमन एवं दीव में ये सुधार लागू किए जा चुके हैं, जबकि जम्मू एवं कश्मीर तथा पुडुचेरी में इनके क्रियान्वयन के उन्नत चरण में कार्य चल रहा है।
इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान एवं उनसे नागरिकों तथा व्यवसायों को होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं—
· आधुनिक एवं समग्र विधिक ढांचा: यह अधिनियम वर्तमान पुराने प्रावधानों के स्थान पर अग्नि सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं के लिए एक अद्यतन एवं समग्र व्यवस्था स्थापित करता है, जो चंडीगढ़ जैसे नियोजित शहरी क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप है।
· अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र की वैधता में वृद्धि: अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र की वैधता 5 वर्ष किए जाने से बार-बार नवीनीकरण की आवश्यकता कम होगी तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, संस्थानों एवं आवासीय परिसरों के लिए अनुपालन बोझ में कमी आएगी।
· जोखिम-आधारित अग्नि सुरक्षा दृष्टिकोण: अग्नि सुरक्षा आवश्यकताओं का निर्धारण भवन के प्रकार, उपयोग, अधिभोग क्षमता, निकासी व्यवस्था एवं उपलब्ध सुरक्षा उपायों के आधार पर किया जाएगा, न कि केवल भवन की ऊँचाई जैसे कठोर मानकों पर। इससे विभिन्न प्रकार की इमारतों के लिए अधिक उपयुक्त एवं प्रभावी सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित होंगे।
· पेशेवर एवं विनियमित अनुपालन तंत्र: लाइसेंस प्राप्त एजेंसियों के प्रावधान से अग्नि सुरक्षा उपायों के आकलन एवं प्रमाणन के लिए एक पेशेवर एवं विनियमित व्यवस्था विकसित होगी, जिससे अनुपालन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
· सरल एवं पारदर्शी अनुमोदन एवं प्रवर्तन प्रणाली: Chief Fire Officer एवं अन्य प्राधिकरणों की स्पष्ट भूमिकाओं के माध्यम से अनुमोदन एवं प्रवर्तन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं प्रभावी बनेगी।
· दंडात्मक प्रावधानों का युक्तिकरण: कठोर आपराधिक प्रावधानों के स्थान पर प्रशासनिक दंड का प्रावधान किया गया है, जिससे त्वरित प्रवर्तन एवं बेहतर अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
· निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था: आवधिक प्रमाणन एवं निरीक्षण के प्रावधान से अग्नि सुरक्षा मानकों का सतत अनुपालन सुनिश्चित होगा तथा जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा सुदृढ़ होगी।
· जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण: भवन स्वामियों/अधिभोगियों, लाइसेंस प्राप्त एजेंसियों एवं अग्निशमन प्राधिकरणों की भूमिकाओं का स्पष्ट निर्धारण होने से जवाबदेही सुनिश्चित होगी और अस्पष्टता में कमी आएगी।
इस प्रकार, इस अधिनियम का विस्तार चंडीगढ़ में जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ नागरिकों, व्यवसायों एवं संस्थानों के लिए एक पारदर्शी एवं सुगम नियामकीय वातावरण उपलब्ध कराने में सहायक होगा।