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सावनी फसल धान की रोपाई के लिए 86 प्रतिशत नहरी पानी से सिंचाई कर मान सरकार रचेगी इतिहास : कुलदीप सिंह धालीवाल

धालीवाल ने 85 लाख रुपये की लागत से 24 किलोमीटर सड़कों के निर्माण के लिए रखे शिलान्यास

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अमृतसर/अजनाला 23-Apr-2026

आम आदमी पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता, विधायक और पूर्व मंत्री पंजाब कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि मंडियों में पहुंच रही रबी की मुख्य फसल गेहूं के एक-एक दाने की लगातार सरकारी खरीद की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी है। इसके साथ ही अब अन्न उत्पादकों/किसानों की अगली चिंता सावनी की मुख्य फसल धान/परमल/बासमती की सिंचाई और रासायनिक खादों की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने पुख्ता प्रबंध कर लिए हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 से मान सरकार ने चार वर्षों में 6700 करोड़ रुपये की लागत से नहरों, खालों और राजबहाओं का नवीनीकरण कर भूमिगत जल की बचत के लिए पंजाब के इतिहास में एक नया क्रांतिकारी मील का पत्थर स्थापित किया है। मान सरकार के कार्यभार संभालने से पहले लगभग 76 लाख एकड़ क्षेत्र में से केवल 21 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई नहरी पानी से होती थी, जबकि इस बार सावनी फसल में 86 प्रतिशत क्षेत्र को नहरी पानी से सिंचित करने का लक्ष्य हासिल किया जा रहा है। पिछली सावनी फसल में मान सरकार ने 76 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई का लक्ष्य प्राप्त कर रिकॉर्ड बनाया था।

श्री धालीवाल ने आज ये विचार लगभग 85 लाख रुपये की लागत से हलके के गांव हाशमपुरा से बरलास तक 6 किलोमीटर लंबी तथा रामदास से गालब तक 18 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण कार्यों के शिलान्यास अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए और मौके पर मौजूद किसानों की समस्याएं सुनते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नहरी पानी से सिंचाई बढ़ने के कारण भूमिगत जल स्तर में सुधार हुआ है, जिसकी प्रशंसा लोकसभा सत्र में केंद्रीय जल मंत्री द्वारा भी की गई और अन्य राज्यों को पंजाब की इस नीति से प्रेरणा लेने की सलाह दी गई। लेकिन अन्य मुद्दों की तरह पानी के मामले में भी केंद्र सरकार का पंजाब के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया जारी है।

उन्होंने कहा कि 1920 के दशक में बीकानेर रियासत, संयुक्त पंजाब और उस समय की ब्रिटिश सरकार के बीच हुए समझौते के तहत 1960 तक फिरोजपुर नहरी फीडर से जाने वाले पानी के बदले राजस्थान सरकार पंजाब को प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देती रही। लेकिन 1960 से मार्च 2022 तक पंजाब में रही पिछली सरकारों की कथित लापरवाही के कारण यह मुआवजा बंद हो गया।

अब राजस्थान द्वारा 1960 के बाद उपयोग किए गए पानी के बदले लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये के मुआवजे को प्राप्त करने के लिए मान सरकार ने कार्रवाई शुरू की है, लेकिन केंद्र सरकार से इसमें कोई सहयोग नहीं मिल रहा। हरियाणा के लिए एसवाईएल नहर की खुदाई रोकने और बीबीएमबी में पंजाब के पानी के अधिकारों को लेकर भी केंद्र से न्याय नहीं मिला।

उन्होंने ऐलान किया कि कृषि प्रधान राज्य पंजाब के पास अन्य राज्यों को देने के लिए पानी की एक बूंद भी अतिरिक्त नहीं है और मान सरकार पानी की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार है। पानी की सुरक्षा के लिए मान सरकार ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से विधायी, न्यायिक और सड़क स्तर पर संघर्ष छेड़ा हुआ है।