कुलदीप सिंह धालीवाल द्वारा शायर एस. प्रशोतम की रचित बैसाखी को समर्पित ऑडियो नज़्म और पोस्टर जारी
मान सरकार वैश्वीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए पंजाबी भाषा और सांस्कृतिक नीति को दृढ़ता से लागू कर रही है: धालीवाल
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अमृतसर/अजनाला 12-Apr-2026
आज माजा विरासत ट्रस्ट रजि. द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शायर एवं ट्रस्ट के प्रधान *एस. प्रशोतम* की बैसाखी को समर्पित ऑडियो संगीतमय नज़्म *‘कदों परतणगे दिन?’* तथा उसके पोस्टर के विमोचन और सम्मान समारोह में आम आदमी पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता, विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री Kuldeep Singh Dhaliwal, जो हाशम शाह यादगारी ट्रस्ट के वर्तमान चेयरमैन भी हैं, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
‘कदों परतणगे दिन?’ ऑडियो संगीतमय नज़्म और पोस्टर के विमोचन अवसर पर श्री धालीवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व वाली सरकार वैश्वीकरण और सोशल मीडिया की नकारात्मक नई चुनौतियों से निपटने के लिए अपनाई गई सांस्कृतिक नीति को दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा के प्रचार और विकास के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं तथा साहित्य, कला और संस्कृति को अन्य राज्यों में प्रस्तुत करने के लिए पंजाबी साहित्यकारों, कलाकारों और गायकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके लिए विभिन्न नकद पुरस्कारों के साथ-साथ पंजाब सरकार की संस्कृति, कला, साहित्य, भाषा और संगीत संस्थाओं में सम्मानित पदों से भी नवाज़ा गया है। इसके साथ ही नई पीढ़ी को अपनी विरासत और ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने के लिए विरासती एवं ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण और रख-रखाव किया जा रहा है।
श्री धालीवाल ने माजा विरासत ट्रस्ट के प्रधान और शायर *एस. प्रशोतम* द्वारा रचित और जारी की गई नज़्म *‘कदों परतणगे दिन?’* तथा रंगीन पोस्टर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस नज़्म में प्रदूषित वैश्वीकरण के कारण मरती और सूखती झीलों, तालाबों, नदियों और नालों की पुनर्स्थापना के बजाय उनके अस्तित्व को समाप्त करने के लिए सूखी झीलों और नदी क्षेत्रों में बनाए जा रहे रंगीन मिज़ाज होटलों और रेस्टोरेंटों, राजनीतिक लालच के कारण भारतीय संस्कृति में उभर रही सांप्रदायिकता तथा बैसाखी के अवसर पर लगने वाले राजनीतिक मंचों से दशमेश पिता Guru Gobind Singh द्वारा सामाजिक विभाजन के अंत और भाईचारे की पुनर्स्थापना के लिए उठाई गई आवाज़ को बुलंद करने के बजाय राजनीतिक दलों द्वारा एक-दूसरे पर राजनीतिक प्रहार करने जैसी प्रवृत्तियों को अत्यंत काव्यात्मक और शायराना स्पर्श दिया गया है।
उन्होंने इस रचना की भरपूर प्रशंसा करते हुए इसे समय की मांग के अनुरूप बताया। ट्रस्ट की ओर से श्री धालीवाल को पंजाबी भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के विकास के लिए निभाई गई उनकी यादगार सेवाओं के सम्मान स्वरूप *‘रंगला पंजाब अवॉर्ड’* तथा पंजाबी अक्षरों से अंकित एक दुशाला भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर शायर एवं प्रधान *एस. प्रशोतम, शहरी प्रधान **अमित औल, देश भगत बापू उजागर सिंह खतराए कलां सांस्कृतिक मूवमेंट के प्रमुख **दिलबाग सिंह खतराए कलां, **हरजीत सिंह सरकारिया, **पंकज सिंह अजनाला, नज़्म के संगीत प्रस्तोता एवं गायक **सुरिंदर अजनालवी, गायक **दर्पिंदरा, **डॉ. इंदरजीत सिंह महलांवाला, **काबिल सिंह छीना* सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।