जीएमएसएच-16 में पुनः प्रारम्भ हुए नशा मुक्ति एवं उपचार केंद्र का स्वास्थ्य मंदीप सिंह बराड़ निरीक्षण
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चंडीगढ़ 13-Feb-2026
सेक्टर-16 स्थित Government Multi-Specialty Hospital, चंडीगढ़ में 27 जनवरी 2026 को पुनः प्रारम्भ किए गए ड्रग डी-एडिक्शन एवं ट्रीटमेंट सेंटर (DDTC) का आज स्वास्थ्य सचिव, यूटी चंडीगढ़, श्री मंदीप सिंह बराड़ द्वारा निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने नशा मुक्ति उपचार हेतु उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं सेवाओं की समीक्षा की।
यह केंद्र 10 बिस्तरों की क्षमता के साथ संचालित है तथा महिलाओं एवं विशेष श्रेणी के मरीजों के लिए 2 अतिरिक्त बिस्तर आरक्षित हैं। केंद्र अब नशे की लत एवं पदार्थ निर्भरता से उबरने के इच्छुक व्यक्तियों को पुनः भर्ती करने के लिए पूर्णतः तैयार है। निरीक्षण के दौरान निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, डॉ. सुमन सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
केंद्र में भर्ती की प्रक्रिया सरल एवं सहयोगात्मक है। मरीजों की पहले ओपीडी में मनोचिकित्सकों द्वारा जांच की जाती है, ताकि उपचार के प्रति उनकी तत्परता और प्रेरणा का आकलन किया जा सके। भर्ती स्वैच्छिक आधार पर की जाती है तथा मरीज एवं उसके परिजन से लिखित सहमति ली जाती है।
उपचार अवधि के दौरान एक पारिवारिक सदस्य का मरीज के साथ रहना अनिवार्य है, जिससे उसे निरंतर भावनात्मक सहयोग और प्रोत्साहन मिल सके। वार्ड का वातावरण स्वच्छ, व्यवस्थित और आत्मीय है। स्वच्छता के उच्च मानकों का पालन किया जाता है, जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों को सुरक्षित और सकारात्मक माहौल मिल सके।
प्रतिदिन की एक निर्धारित दिनचर्या, जिसमें रात्रि 10:00 बजे लाइट बंद करने का नियम शामिल है, मरीजों में अनुशासन और स्वस्थ आदतों के विकास में सहायक है। समूह चिकित्सा (ग्रुप थेरेपी), परामर्श सत्र तथा अन्य चिकित्सीय गतिविधियां पुनर्वास कार्यक्रम का अभिन्न हिस्सा हैं।
इसके अतिरिक्त समाचारपत्र, पुस्तकें, टेलीविजन तथा इनडोर खेल सामग्री जैसी मनोरंजक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि मरीज सकारात्मक रूप से व्यस्त रह सकें। वार्ड परिसर में नशीले पदार्थों, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स एवं बाहरी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध है।
अनुशासन एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच की जाती है। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने सुझाव दिया कि मरीजों को प्रवास अवधि में प्रेरणादायक एवं शैक्षणिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे सहायक साधन शीघ्र उपलब्ध कराए जाएं।
डीडीटीसी का पुनः संचालन नशा मुक्ति के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें संवेदनशील देखभाल, संरचित पुनर्वास एवं पारिवारिक सहभागिता पर विशेष बल दिया गया है। समुचित चिकित्सा, भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक वातावरण के माध्यम से यह केंद्र मरीजों को स्वस्थ जीवन की नई शुरुआत का अवसर प्रदान करेगा।