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कार्तिकेय शर्मा ने राज्यसभा में MSME को होने वाले विलंबित भुगतान का मुद्दा उठाया, सरकार ने रखा विस्तृत और डेटा-आधारित उत्तर

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नई दिल्ली 09-Feb-2026

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की आर्थिक स्थिरता और रोजगार सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, राज्यसभा सांसद श्री कार्तिकेय शर्मा ने संसद में MSME को बड़े कॉरपोरेट्स, CPSEs और सरकारी विभागों द्वारा किए जा रहे विलंबित भुगतान का अहम मुद्दा उठाया। स्टार्ड प्रश्न के माध्यम से श्री शर्मा ने सरकार से यह जानना चाहा कि MSME को बकाया भुगतान की वास्तविक स्थिति क्या है, समाधान पोर्टल पर लंबित मामलों का विवरण क्या है, लगातार भुगतान में देरी करने वालों पर क्या सख्त कार्रवाई की जा रही है, और MSME को कार्यशील पूंजी संकट से उबारने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

राज्यसभा में सरकार ने विस्तृत, तथ्यात्मक और डेटा-आधारित उत्तर प्रस्तुत करते हुए बताया कि MSME भुगतान में देरी से निपटने के लिए कानूनी, वित्तीय और तकनीक आधारित कई मजबूत व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, CPSEs द्वारा MSME को देय कुल ₹17,400.13 करोड़ में से ₹14,744.54 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। 

4 फरवरी 2026 तक शेष बकाया राशि ₹2,655.60 करोड़ है। साथ ही MSME समाधान पोर्टल पर पिछले तीन वर्षों में लंबित मामलों और संबंधित राशियों का वर्ष-वार विवरण भी सदन के पटल पर रखा गया। सरकार ने बताया कि समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रावधान लागू हैं। 

45 दिनों से अधिक देरी पर MSME को किया जाने वाला भुगतान आयकर में तभी मान्य होगा जब वास्तविक भुगतान किया जाए। इसके अतिरिक्त, कंपनियों को MSME के लंबित भुगतान का अर्धवार्षिक खुलासा करना अनिवार्य किया गया है। 

MSMED अधिनियम के तहत देरी पर RBI बैंक दर से तीन गुना ब्याज, वह भी मासिक चक्रवृद्धि आधार पर, देना अनिवार्य है। विवादों के शीघ्र समाधान के लिए एक डिजिटल ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली भी लागू की गई है, जिसके तहत अब सभी नए विलंबित भुगतान मामले ऑनलाइन दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि प्रक्रिया तेज़, पारदर्शी और कम लागत वाली हो।

कार्यशील पूंजी की समस्या को कम करने के लिए सरकार ने ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम के माध्यम से इनवॉयस फाइनेंसिंग में उल्लेखनीय विस्तार की जानकारी दी। पिछले तीन वर्षों में TReDS के माध्यम से MSME को मिलने वाली फंडिंग में तेज़ वृद्धि हुई है। 

बजट घोषणाओं के तहत CPSEs के लिए TReDS का उपयोग अनिवार्य किया गया है, इनवॉयस डिस्काउंटिंग पर क्रेडिट गारंटी का प्रावधान किया गया है और सरकारी खरीद डेटा को वित्तीय संस्थानों से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सरकार ने MSME के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी, इक्विटी फंडिंग, बढ़ी हुई क्रेडिट गारंटी सीमा, निर्यातक MSME के लिए उच्च ऋण सीमा और उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म उद्यमों के लिए कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड जैसी पहलों को भी रेखांकित किया।

सरकार के उत्तर का स्वागत करते हुए श्री कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि MSME की असफलता का कारण क्षमता की कमी नहीं, बल्कि नकदी प्रवाह में रुकावट होती है। उन्होंने कहा, “समय पर भुगतान MSME के लिए जीवनरेखा है। सख्त प्रवर्तन, पारदर्शी सिस्टम और आसान वित्तीय पहुंच से ही रोजगार बचेगा और सप्लाई चेन मज़बूत होगी।”

श्री शर्मा ने दोहराया कि संसद के माध्यम से निरंतर निगरानी और डेटा-आधारित नीति निर्माण MSME को सशक्त बनाने और उन्हें भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।