केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश, पंजाब और तेलंगाना में पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अंतर्गत ₹1,133 करोड़ से अधिक की अनुदान राशि की जारी
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चंडीगढ़ 06-Feb-2026
2026 वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जारी यह राशि पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) / ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को मजबूत करने हेतु प्रदान की गई है। मध्य प्रदेश को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में ₹65,255 लाख (₹652.55 करोड़) जारी किए गए हैं।
इस अनुदान से राज्य की 52 पात्र जिला पंचायतों, 312 पात्र ब्लॉक पंचायतों तथा 23,001 पात्र ग्राम पंचायतों को लाभ प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त में रोकी गई ₹77 लाख की राशि भी 3 अतिरिक्त पात्र ब्लॉक पंचायतों और 6 ग्राम पंचायतों को जारी की गई है।
पंजाब राज्य को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त के रूप में ₹22,200 लाख (₹222 करोड़) जारी किए गए हैं। इससे राज्य की 13,262 पात्र ग्राम पंचायतों, 150 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 22 पात्र जिला पंचायतों को सहायता प्राप्त होगी।
वहीं, तेलंगाना राज्य को वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त के रूप में ₹25,602.95 लाख (₹256.0295 करोड़) जारी किए गए हैं, जिससे 12,702 पात्र ग्राम पंचायतों को लाभ हुआ है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2023-24 के अप्रतिबंधित अनुदान की दूसरी किस्त के अंतर्गत रोकी गई ₹233.18 लाख की राशि भी 11 अतिरिक्त पात्र ग्राम पंचायतों और 40 ब्लॉक पंचायतों को जारी की गई है।
भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय तथा जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान जारी करने की अनुशंसा करती है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा अंतिम रूप से जारी किया जाता है। ये अनुदान प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किए जाते हैं।
अप्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में उल्लिखित 29 विषयों के अंतर्गत, वेतन एवं अन्य स्थापना व्ययों को छोड़कर, स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु किया जा सकता है। प्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग (क) स्वच्छता तथा खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति को बनाए रखने, जिसमें घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन एवं उपचार—विशेष रूप से मानव मल एवं मल कीचड़ प्रबंधन—शामिल है, तथा (ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन एवं जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है।