5 Dariya News

यूटी चंडीगढ़ ने IICDEM–2026 में भाग लिया

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर थीमैटिक सत्र का नेतृत्व किया

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चंडीगढ़ / नई दिल्ली 22-Jan-2026

भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (IICDEM)–2026 के तीन दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन, आज 22 जनवरी 2026 को यूटी चंडीगढ़ ने सम्मेलन में सक्रिय सहभागिता करते हुए “इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM)” विषय पर आयोजित थीमैटिक सत्र का नेतृत्व किया। यह सत्र भारत की सुदृढ़, विश्वसनीय एवं पारदर्शी निर्वाचन प्रणाली के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में ईवीएम की भूमिका पर केंद्रित रहा।

इस थीमैटिक अध्ययन के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग द्वारा यूटी चंडीगढ़ को एंटीगुआ एवं बारबुडा के साथ साझेदार बनाया गया, जिससे विभिन्न लोकतांत्रिक देशों में अपनाई जा रही निर्वाचन प्रौद्योगिकियों, प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों तथा मतदाता विश्वास तंत्रों पर अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान–प्रदान को बढ़ावा मिला। इस थीमैटिक सत्र का संचालन श्री स्वप्निल एम. नाइक, आईएएस, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, यूटी चंडीगढ़ द्वारा किया गया। 

सत्र के वक्ताओं में श्री आर्थर जी.बी. थॉमस, चेयरमैन, एंटीगुआ एवं बारबुडा निर्वाचन आयोग; श्री मनीष गर्ग, वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग; डॉ. संजय बटिश, उप नोडल अधिकारी (ईवीएम) एवं विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस विभाग, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC); तथा श्री वी. श्रीनिवास राव, एनएलएमटी एवं आईएलएमटी (ईवीएम), उप प्रबंधक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) शामिल रहे।

सत्र की भूमिका रखते हुए श्री स्वप्निल एम. नाइक, आईएएस ने भारत में बैलेट पेपर से अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली तक की यात्रा को रेखांकित किया तथा बताया कि किस प्रकार विधिक एवं प्रक्रियात्मक विकास ने दशकों के दौरान निर्वाचन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को सुदृढ़ किया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे विशाल, विविधता-सम्पन्न एवं उच्च मतदान प्रतिशत वाले लोकतंत्र में ईवीएम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ भौगोलिक विस्तार, बड़े पैमाने पर मतदान तथा मैनुअल गिनती की सीमाओं के कारण प्रौद्योगिकी आधारित समाधान आवश्यक हो जाते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ईवीएम सटीकता, दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाती हैं, अमान्य मतों को कम करती हैं, मानवीय हस्तक्षेप को सीमित करती हैं तथा यह सुनिश्चित करती हैं कि प्रत्येक मत उसी रूप में दर्ज हो और गिना जाए जैसा मतदाता ने अभिप्रेत किया है, जिससे जनविश्वास और अधिक मजबूत होता है। एंटीगुआ एवं बारबुडा निर्वाचन आयोग के चेयरमैन ने अपने देश में प्रचलित मतदान प्रक्रियाओं का अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार भारत का ईवीएम मॉडल क्षमता निर्माण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से अन्य देशों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है। 

उन्होंने इसे विश्वसनीय एवं विस्तार योग्य निर्वाचन समाधान के रूप में सराहा। डॉ. संजय बटिश ने ईवीएम के कार्यात्मक एवं परिचालन पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें प्रथम स्तरीय जांच (FLC), मॉक पोल, सुरक्षित भंडारण व्यवस्था, परिवहन सुरक्षा उपाय तथा मतदाता सत्यापन योग्य कागजी पर्ची (VVPAT) की भूमिका शामिल रही। 

उन्होंने ईवीएम से संबंधित सामान्य शंकाओं एवं भ्रामक सूचनाओं पर भी प्रकाश डालते हुए बताया कि पारदर्शिता तंत्र एवं संस्थागत सुरक्षा उपाय फेक न्यूज़ और भ्रांतियों को प्रभावी रूप से दूर करते हैं। श्री वी. श्रीनिवास राव ने ईवीएम के प्रमुख घटकों — कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट एवं वीवीपैट — की भूमिका को विस्तार से समझाया। 

उन्होंने ईवीएम की सुरक्षित डिजाइन संरचना, स्वदेशी निर्माण प्रक्रिया तथा उत्पादन के दौरान अपनाए जाने वाले कठोर गुणवत्ता नियंत्रण मानकों पर भी प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने मतदाता गोपनीयता, समावेशी विशेषताओं, बहुभाषी इंटरफेस एवं दिव्यांग मतदाताओं हेतु सहायक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक को नागरिक-केंद्रित बनाए रखना इसकी मूल भावना है।

श्री मनीष गर्ग, वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग ने ईवीएम से जुड़े तकनीकी, विधिक, परिचालन एवं क्षमता निर्माण के विभिन्न आयामों पर व्यापक जानकारी साझा की। उन्होंने ईवीएम की सुरक्षित डिजाइन एवं निर्माण प्रक्रिया, घटक संरचना, सुदृढ़ मतदाता विश्वास तंत्र तथा भारत की ईवीएम प्रणाली की वैश्विक अनुकूलता को रेखांकित किया।

सत्र के दौरान प्रशासनिक तैयारियों, मानकीकृत संचालन प्रक्रियाओं, उपकरणों की तत्परता तथा सीलिंग प्रक्रिया, मॉक पोल और स्वतंत्र ऑडिट जैसे दृश्य सुरक्षा उपायों के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया, जो मतदाता विश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही को सुदृढ़ करते हैं। इसके पश्चात आयोजित इंटरएक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने ईवीएम की तकनीकी सुरक्षा, विधिक ढांचे एवं परिचालन प्रक्रियाओं से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका पैनल सदस्यों द्वारा विस्तृत एवं संतोषजनक उत्तर दिया गया। इससे सार्थक एवं रचनात्मक विमर्श संभव हो सका।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर आयोजित यह थीमैटिक सत्र अत्यंत सकारात्मक एवं उपयोगी निष्कर्षों के साथ संपन्न हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने भारत की ईवीएम प्रणाली को एक वैश्विक स्तर पर अपनाए योग्य, पारदर्शी एवं विश्वसनीय निर्वाचन मॉडल के रूप में सराहा। इसी दौरान अन्य समानांतर थीमैटिक सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिनमें विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा निर्वाचन प्रबंधन के विविध पहलुओं पर चर्चा कराई गई।

इस अवसर पर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ECINET — निर्वाचन संबंधी समस्त जानकारियों एवं सेवाओं हेतु एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म — का भी शुभारंभ किया गया। ECINET विश्व का सबसे बड़ा निर्वाचन सेवा मंच है, जो भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की 40 से अधिक एप्लिकेशन एवं पोर्टलों को एक ही सहज डिजिटल इंटरफेस पर एकीकृत करता है। 

यह प्लेटफॉर्म सभी हितधारकों के लिए सेवाओं की सुलभता, दक्षता एवं सरलता को और अधिक सुदृढ़ करेगा। इस अवसर पर श्री इयान ह्यूजेस, इलेक्शंस सुपरवाइज़र, एंटीगुआ एवं बारबुडा; श्री अमनदीप सिंह भट्टी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी–सह–अतिरिक्त उपायुक्त; श्री राजीव तिवारी, एईआरओ–सह–इलेक्शन मीडिया नोडल अधिकारी; श्री पवितर सिंह, निदेशक (हॉस्पिटैलिटी); डॉ. सूरज थापा, नेशनल लेवल मास्टर ट्रेनर, सहित चंडीगढ़ प्रशासन के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।