5 Dariya News

पेक ने जैव-निर्माण मैटेरियल्स में इनोवेशन पर वर्कशॉप-कम-रोडशो का किया आयोजन

डीएसटी–पर्स समर्थित जैव-निर्माण वर्कशॉप का मर्क के सहयोग से पेक में हुई आयोजित

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चंडीगढ़ 15-Dec-2025

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ ने “जैव-निर्माण मैटेरियल्स में इनोवेशन: पॉलिमर, वून्ड केयर और सेल कल्चर टेक्नोलॉजीस” विषय पर एक वर्कशॉप-कम-रोडशो का आयोजन मर्क लाइफ साइंस प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से किय। यह कार्यक्रम डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी)–पर्स, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया।

इस वर्कशॉप में डॉ. प्रगति गहलोत (मर्क) एवं श्री प्रणव पांडे (मर्क) की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ प्रो. वसुंधरा सिंह (प्रोफ़ेसर इंचार्ज, डीएसटी–पर्स), प्रो. संदीप कुमार (को-प्रोफ़ेसर इंचार्ज, डीएसटी–पर्स) तथा प्रो. आर. एस. वालिया (को-प्रोफ़ेसर इंचार्ज, डीएसटी–पर्स) भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कोर्डिनेशन डॉ. पूनम सैनी एवं डॉ. शिल्पी चौधरी द्वारा किया गया।

वर्कशॉप की शुरुआत प्रो. वसुंधरा सिंह द्वारा वर्कशॉप के ओवरव्यू से हुई, जिसमें उन्होंने डीएसटी–पर्स समर्थित पहल के उद्देश्यों और इसके माध्यम से पेक में अंतःविषय अनुसंधान को सशक्त बनाने की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में एक्सपर्ट लेक्चर, लाइव डेमोंस्ट्रेशन तथा इंटरैक्टिव सेशन शामिल रहे, जिनमें एडवांस्ड पॉलिमर, वून्ड केयर सोलूशन्स और सेल कल्चर टेक्नोलॉजीस पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। 

ये सत्र शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों के लिए प्रयोगशाला अनुसंधान और वास्तविक जैव-चिकित्सकीय अनुप्रयोगों के बीच की दूरी को भी कम करने में सहायक रहे। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज को हाल ही में ₹7.5 करोड़ की प्रतिष्ठित डीएसटी–पर्से अनुदान राशि से सम्मानित किया गया है, जिसने संस्थान के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है। 

इस अनुदान ने फैकल्टी मेंबर्स और विद्यार्थियों को उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान कार्यों में संलग्न होने और वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बनाया है। मुख्य कीनोट स्पीकर डॉ. प्रगति गहलोत (मर्क) द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने मर्क को एक अनुसंधान-प्रधान जैव-औषधि कंपनी के रूप में प्रस्तुत किया, जो मानव और पशु स्वास्थ्य में रोगों की रोकथाम और उपचार के लिए नवोन्मेषी समाधान प्रदान करती है। 

उन्होंने जैव-चिकित्सकीय सामग्रियों, 3डी बायो-प्रिंटिंग, कोशिका संवर्धन प्रौद्योगिकियों और उन्नत रसायन समाधान जैसे उभरते रुझानों पर विस्तार से चर्चा की। 3डी बायो-प्रिंटिंग की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से कार्यात्मक ऊतकों और संपूर्ण अंगों का निर्माण भविष्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

वर्कशॉप का समापन उत्साहपूर्ण सहभागिता और सार्थक चर्चाओं के साथ हुआ, जिससे उद्योग-अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करने और अगली पीढ़ी की जैव-चिकित्सकीय प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान को बढ़ावा देने के प्रति पेक की प्रतिबद्धता पुनः पुष्ट हुई।