धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में अखिल भारतीय देवस्थानम सम्मेलन आयोजित
उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की शिरकत
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कुरुक्षेत्र 30-Nov-2025
10वें अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान रविवार को कुरुक्षेत्र में 2 दिवसीय अखिल भारतीय देवस्थानम सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें उप-राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर उप-राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन का पहली बार पधारने पर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि जो समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखता है, वही अपने युवाओं को सुदृढ़ नैतिक मूल्य प्रदान करता है। इसी भावना से राज्य सरकार वेदों, पुराणों और गीता की जन्मस्थली हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उप-राष्ट्रपति संवैधानिक परंपराओं के संरक्षक हैं, उसी प्रकार संत-महात्मा हमारी सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक संस्कृति के संवाहक हैं। कुरुक्षेत्र की पावन भूमि आज अध्यात्म, ज्ञान और संस्कृति की ऊर्जाओं से परिपूर्ण है। इन दिनों संपूर्ण हरियाणा गीतामय वातावरण से आलोकित है और देशभर के तीर्थस्थलों की शक्ति यहां एकत्रित हुई है।
उन्होंने कहा कि यह देवस्थानम सम्मेलन इसलिए भी विशेष है क्योंकि पवित्र कुरुक्षेत्र में धर्म एवं अध्यात्म पर संवाद भारत की आध्यात्मिक धारा को नई दिशा प्रदान करता है। जब यह सम्मेलन गीता महोत्सव के साथ संयुक्त रूप से आयोजित हो रहा है, तो इसकी ऊर्जा और प्रभाव अनेक गुना बढ़ गया है।मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र की महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यही वह पावन स्थल है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से समस्त मानवजाति को गीता का दिव्य संदेश दिया था—जो आज भी दुनिया को जीवन का शाश्वत मार्ग दिखा रहा है।
इसलिए यहां अखिल भारतीय देवस्थानम सम्मेलन का आयोजन अपने आप में गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के पवित्र तीर्थों एवं देवस्थानों के प्रतिनिधियों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुगम बनाना व प्रबंधन से जुड़ी विशेषज्ञता को साझा करना है। इस सम्मेलन में सभी संतजनों ने अपने-अपने अनुभव और सुझाव साझा किए हैं और यह सुनिश्चित किया है कि भारत की धार्मिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और मजबूत रूप में पहुंच सके।
भारत की संस्कृति समय के साथ बदलती है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि वह समय के साथ बदलती है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है। इस संस्कृति को सदियों से तीर्थों से ऊर्जा मिलती रही है। हमारे तीर्थस्थल भाव, भक्ति, ज्ञान और जीवन के मूल्यों के केंद्र हैं। यहां से लोगों को जीवन जीने की सही राह मिलती है। लाखों लोग धर्मस्थलों पर इसलिए जाते हैं कि उन्हें अपने भीतर की शक्ति से जुड़ने का अवसर मिलता है। इसी सांस्कृतिक यात्रा को आगे बढ़ाने में यह सम्मेलन एक सार्थक पहल है।
संत-महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना से युवाओं तक पहुंच रहा है आध्यात्मिक संदेश
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि धर्मस्थलों का हमसे गहरा संबंध रहा है। जहां धर्मस्थल होते हैं वहां संत भी होते हैं। यही नहीं, जहां संत होते हैं, वहां धर्मस्थल भी बन जाते हैं। आप भारतीय परम्परा में सदैव पूजनीय रहे हैं। संतों ने ही यहां संस्कृति के बीज बोये। संतों ने ही सांस्कृतिक मूल्यों और सिद्धांतों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढाया। इस प्रकार, आपने भारत नाम के विशाल सांस्कृतिक राष्ट्र का निर्माण किया।
आपने ही 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की धारणा वाली संस्कृति को मानवमात्र के कल्याण के लिए विश्वभर में फैलाया। इसी का परिणाम है कि भारत आध्यात्मिकता के क्षेत्र में 'विश्व गुरु' कहलाया। आज भी पूरा विश्व मानसिक शांति और सामाजिक मूल्यों को स्थापित करने के लिए भारत की ओर मार्गदर्शन के लिए निहारता है। इसलिए राज्य सरकार हरियाणा में 'संत-महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना' के तहत संतों व महापुरुषों के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रही है। हमारा उद्देश्य यह है कि नई पीढी उनके जीवन व कार्यों से प्रेरणा व मार्गदर्शन प्राप्त करे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 2016 से वैश्विक मंच पर मनाया जा रहा है गीता जयंती समारोह
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गीता जयंती समारोह को हमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाने के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रेरणा से हम इसे वर्ष 2016 से कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाते हैं। इसमें कई देशों के प्रतिभागी और लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। विगत 9 वर्षों से महोत्सव को अपार सफलता और लोकप्रियता मिली है।
पहली बार वर्ष 2019 में यह महोत्सव देश से बाहर मॉरीशस तथा लंदन में भी मनाया गया। इसके बाद यह युनाइटेड किंगडम, कनाडा, आस्ट्रेलिया, श्रीलंका, इंडोनेशिया, जापान में आयोजित किया जा चुका है।इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज, संत-महात्मागण, आयोजन समिति के सदस्य और देश-विदेश से पधारे श्रद्धालुगण मौजूद रहे।