5 Dariya News

भारत 2047 तक बनेगा सुपर पावर

एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. टी. जी. सिथाराम “एआई एंड द फ्यूचर ऑफ मैन-मशीन कोलैबोरेशन” विषय पर आर्यन्स ग्रुप ऑफ कॉलेजेज़, चंडीगढ़ में संगोष्ठी का आयोजन

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चंडीगढ़ 15-Oct-2025

भारत नवाचार, कौशल विकास और आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग के बल पर वर्ष 2047 तक एक वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। यह बात अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के चेयरमैन प्रो. टी. जी. सिथाराम ने कही। वे आर्यन्स ग्रुप ऑफ कॉलेजेज़, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित “एआई एंड द फ्यूचर ऑफ मैन-मशीन कोलैबोरेशन” विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अंशु कटरिया, चेयरमैन, आर्यन्स ग्रुप ऑफ कॉलेजेज़ ने की।

प्रो. सिथाराम ने कहा कि “एआई फॉर ऑल — एम्पावरिंग माइंड्स, ट्रांसफॉर्मिंग लाइव्स” भविष्य की दिशा तय करने वाला मंत्र होना चाहिए। उन्होंने कहा, “बुद्धिमत्ता की शक्ति केवल मशीनों या कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाना होगा ताकि एक अधिक बुद्धिमान, न्यायपूर्ण और समावेशी विश्व का निर्माण किया जा सके। जो राष्ट्र अपने नागरिकों को स्वतंत्र सोचने, निरंतर सीखने और नैतिक आचरण के लिए प्रेरित करेंगे, वही भविष्य में नेतृत्व करेंगे।”

उन्होंने एआईसीटीई की विभिन्न पहलों — एआई फॉर ऑल, फैकल्टी डेवलपमेंट इन एआई एंड डेटा साइंसेज़ तथा स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन — का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों ने यह सिद्ध कर दिया है कि बड़े पैमाने पर कौशल निर्माण गति और समावेश दोनों के साथ संभव है।

प्रो. सिथाराम ने बताया कि वर्ष 2030 तक एआई के माध्यम से लगभग 3.8 करोड़ नौकरियों का स्वरूप बदल सकता है, जिससे स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता और अवसरों में भारी वृद्धि होगी। कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. अंशु  कटारिया , चेयरमैन, आर्यन्स ग्रुप ऑफ कॉलेजेज़ ने कहा, “हमें गर्व है कि आर्यन्स में प्रो. सिथाराम जैसे दूरदर्शी शिक्षाविद का स्वागत करने का अवसर मिला। 

उनका एआई संचालित भारत का दृष्टिकोण हमारे उस मिशन से मेल खाता है, जिसके तहत हम विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी और नवाचार की दुनिया के लिए तैयार कर रहे हैं। आर्यन्स का मानना है कि शिक्षा को समय के साथ विकसित होना चाहिए — जिसमें एआई, नैतिकता और रचनात्मकता का संतुलित समावेश हो, ताकि जिम्मेदार वैश्विक नागरिक तैयार किए जा सकें।”

प्रो. सिथाराम ने यह भी जानकारी दी कि भारत वर्ष 2026 में “एआई इम्पैक्ट समिट 2026” की मेजबानी करेगा, जो 19–20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। यह वैश्विक दक्षिण (Global South) में आयोजित होने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय एआई सम्मेलन होगा।

संगोष्ठी में शिक्षकों, विद्यार्थियों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा इस बात पर चर्चा की कि भारत किस प्रकार एआई का उपयोग मानव क्षमता को बढ़ाने, नैतिक ढाँचे विकसित करने और समान विकास सुनिश्चित करने के लिए कर सकता है।

अपने संबोधन के अंत में प्रो. सिथाराम ने सभी शैक्षणिक संस्थानों से आह्वान किया कि वे शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर एआई साक्षरता (AI Literacy) को शामिल करें, ताकि नई पीढ़ी जिम्मेदारीपूर्वक नवाचार करे और भारत के 2047 तक प्रौद्योगिकीय रूप से सशक्त महाशक्ति बनने के लक्ष्य में सार्थक योगदान दे सके।

• एआईसीटीई झलक (2022–23):

कुल एआईसीटीई स्वीकृत संस्थान: 14,000 (स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा)

देशभर में नामांकित विद्यार्थी: लगभग 14.9 लाख (1.49 मिलियन)

• विशिष्ट अतिथि विशेषज्ञ:

अमित शर्मा, चेयरमैन, अमृतसर ग्रुप ऑफ कॉलेजेज़

अथीर अल-सरायफी, नीदरलैंड्स — इनर इंजीनियरिंग इशांगा, ईशा फाउंडेशन

संयम दीक्षित, निदेशक, ड्युकैट स्कूल ऑफ एआई

प्रीतिक गुप्ता, वरिष्ठ डेटा वैज्ञानिक, ड्युकैट स्कूल ऑफ एआई