पीएम विकास के तहत विकसित भारत-2047 के लिए कौशल पर उद्योग सम्मेलन आयोजित किया गया
जॉर्ज कुरियन ने जोर दिया कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु उद्योग सहयोग आधारशिला है
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नई दिल्ली 29-Sep-2025
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने नई दिल्ली में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (डीएसजीएमसी) और स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम), त्रिपुरा के सहयोग से, पीएम विकास के तहत कौशल के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लिए अभिसरण पर एक उद्योग सम्मेलन आयोजित किया।
यह आयोजन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। श्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि उद्योग सहयोग ही वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और कुशल कार्यबल तैयार करने की आधारशिला है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार किया जा सकेगा।
उन्होंने ऑटोमेशन, नई तकनीकों और आधुनिक रोजगार भूमिकाओं की अहमियत पर बल दिया। सम्मेलन में स्वास्थ्य सेवा, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन और आतिथ्य सहित 11 क्षेत्रों से उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर दो समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए एक अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, डीएसजीएमसी और वधवानी फाउंडेशन के बीच, और दूसरा डीएसजीएमसी और एसआईएचएम त्रिपुरा के बीच।
ये समझौता ज्ञापन उद्योग-प्रशिक्षण भागीदारी को मजबूत करने और पीएम विकास के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। सम्मेलन में "उद्योग के लिए तैयार और विश्व स्तर पर गतिशील कार्यबल का निर्माण: समावेशी विकास और विकसित भारत 2047 के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना" विषय पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई।
इस सत्र में श्री सी.पी.एस. बख्शी, संयुक्त सचिव (कौशल); श्री राम सिंह, संयुक्त सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय; कर्नल महेंद्र सिंह पायल (सेवानिवृत्त), कार्यकारी उपाध्यक्ष, एनएसडीसी; कर्नल संतोष कुमार (सेवानिवृत्त), उपाध्यक्ष एसडीएन, वाधवानी फाउंडेशन; श्री सतविंदर सिंह, प्रबंध निदेशक, निटकॉन लिमिटेड; श्री संजीव कुमार, सीएमडी, टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड; श्री अभिषेक आनंद, निदेशक (मानव संसाधन), हयात रीजेंसी, दिल्ली; और सुश्री वीनू जयचंद, प्रिंसिपल पार्टनर, ईवाई इंडिया, जिन्होंने चर्चा का संचालन किया, शामिल थे।
इस सत्र में विशेषज्ञों ने कौशल पहलों को बाजार की वास्तविकताओं के साथ संरेखित करने, शिक्षुता (अप्रेंटिसशिप) के अवसरों का विस्तार करने और भारतीय युवाओं की वैश्विक रोजगार क्षमता के लिए मार्ग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि कौशल कार्यक्रमों की सफलता के लिए उद्योग सहयोग महत्वपूर्ण है।
नियोक्ताओं से सक्रिय रूप से पाठ्यक्रम डिजाइन में शामिल होने, शिक्षुता और नियोजन के अवसर प्रदान करने और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सहायता करने का आह्वान किया गया। इस बात पर जोर दिया गया कि कौशल की सफलता को केवल संख्याओं में नहीं, बल्कि वास्तविक आजीविका, सम्मानजनक नौकरियों और सशक्त सपनों में मापा जाता है।
उद्योग से आग्रह किया गया कि वे इस सम्मेलन को एक दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत के रूप में देखें, जो भारत के विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ने के साथ-साथ अल्पसंख्यक युवाओं को घरेलू और वैश्विक दोनों अवसरों के लिए तैयार करेगी।
प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना मंत्रालय की प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र की पहल है, जिसे आधुनिक उद्योग की जरूरतों को भारत की पारंपरिक शक्तियों के साथ जोड़ते हुए समग्र कौशल अवसर प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह योजना पारदर्शिता, दक्षता और उद्योग प्रासंगिकता को बढ़ावा देती है। अब तक, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करते हुए 41 परियोजनाएँ आवंटित की गई हैं, जिनसे 1.34 लाख से अधिक युवाओं और कारीगरों को लाभ हुआ है।