5 Dariya News

अटल डुल्लू ने जम्मू-कश्मीर में खाद्य सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए अंतर-विभागीय कार्य योजना की समीक्षा की

फलाईंग स्कार्ड उच्च जोखिम वाले उत्पादों की औचक जाँच करेंगे

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श्रीनगर 19-Sep-2025

सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने और सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने केंद्र शासित प्रदेश में खाद्य सुरक्षा पर व्यापक कार्ययोजना की समीक्षा हेतु एक विभागीय समन्वय बैठक की अध्यक्षता की।

यह समीक्षा हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में घटिया मांस और दुग्ध उत्पादों की जब्ती की घटनाओं की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसने खाद्य मिलावट और जन सुरक्षा पर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। बैठक में आयुक्त सचिव एफसीएस एंड सीए, आयुक्त सचिव एच एंड यूडीडी, सचिव एच एंड एमई, संभागीय आयुक्त जम्मू/कश्मीर, विधि सचिव, आयुक्त एफएसडी, निदेशक एफसीएस एंड सीए जम्मू/कश्मीर, डीजी बजट, निदेशक स्वास्थ्य जम्मू/कश्मीर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

विचार-विमर्श के दौरान मुख्य सचिव ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को बिना लेबल वाले और गैर-मानक पैक्ड खाद्य पदार्थों, विशेषकर उन आयातित उत्पादों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए, जिनमें उत्पादों का विवरण नहीं दिया गया है। 

उन्होंने इस तरह की प्रथाओं को कानूनी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया। मुख्य सचिव ने खाद्य सुरक्षा विंग द्वारा आवास एवं शहरी विकास, कृषि, पशुपालन और जिला प्रशासन जैसे प्रमुख विभागों के सहयोग से तैयार की गई कार्ययोजना का विस्तृत जायज़ा लिया। 

इस योजना में घटिया खाद्य पदार्थों की राज्य में एंट्री को रोकने और खाद्य सुरक्षा मानकों के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों उपायों का खाका तैयार किया गया है। कार्ययोजना की प्रमुख विशेषताएँ, संयुक्त निरीक्षण दलों और फ्लाइंग स्क्वॉड का गठन किया जाएगा, जो मांस, दूध और बेकरी उत्पादों जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर केंद्रित होकर आकस्मिक निरीक्षण करेंगे। 

प्राथमिक उत्पादकों, प्रोसेसर्स और विक्रेताओं सहित खाद्य व्यवसायों का जिला-वार मानचित्रण किया जाएगा, ताकि लक्षित निरीक्षण संभव हो सके। ढाँचागत और निगरानी तंत्र को मजबूत करना, जिसके तहत टोल प्लाज़ा, एंट्री पॉइंट्स और प्रमुख परिवहन मार्गों पर उच्च जोखिम वाले खाद्य खेपों की जाँच हेतु चेक प्वाइंट और कोल्ड-चेन सुविधाएँ स्थापित की जाएंगी। 

बाहरी राज्यों से आने वाले माल की सख्त निगरानी ताकि घटिया उत्पादों का आयात रोका जा सके। लगभग 257.5 लाख किलोग्राम मांस की कमी को नियंत्रित और सुरक्षित आपूर्ति प्रणालियों से दूर करने और आधुनिक स्लॉटर हाउसों के निर्माण का प्रावधान, जिसमें वैज्ञानिक मांस प्रसंस्करण और वितरण हेतु फ्रोज़न स्टोरेज सुविधा शामिल होगी। 

इनमें मीट शॉप्स और अन्य खाद्य केंद्रों पर स्वच्छता और सैनिटरी मानकों का अनिवार्य पालन सुनिश्चित करना तथा नियमित निरीक्षण के लिए योग्य पशु चिकित्सक अधिकारियों की तैनाती, एनजीओ, स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों के सहयोग से जन जागरूकता अभियान चलाना, जनता को खाद्य मिलावट और संबंधित कुप्रथाओं की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करना षामिल है ताकि नागरिकों को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के बारे में जागरूक किया जा सके।

जिला स्तरीय परामर्श समितियों की मासिक बैठकें, जिनमें कई विभागों के अधिकारी शामिल होंगे, प्रगति की समीक्षा और चुनौतियों के समाधान के लिए आयोजित की जाएंगी। खाद्य सुरक्षा विंग लाइसेंसिंग, निरीक्षण और ट्रैसेबिलिटी का नेतृत्व करेगा, जबकि कृषि और पशुपालन विभाग अच्छे कृषि और पशु चिकित्सा अभ्यासों को बढ़ावा देंगे। 

जिला प्रशासन उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को तेज़ करेगा। मुख्य सचिव डुल्लू ने जोर देकर कहा कि प्रभावी विभागीय समन्वय इस पहल का आधार होगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को मिल-जुलकर काम करने के निर्देश दिए ताकि बाजारों में केवल सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य ही पहुँचे।

यह व्यापक रणनीति केवल नियमन तक सीमित नहीं है बल्कि जागरूकता, जवाबदेही और विश्वास निर्माण की दिशा में एक ठोस पहल है। यह कार्ययोजना जन स्वास्थ्य की रक्षा करने और सभी को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उपलब्ध कराने का एक समग्र प्रयास है। प्रशासन ने सभी नागरिकों और खाद्य व्यवसाय संचालकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है, ताकि केंद्र शासित प्रदेश की सामूहिक भलाई सुनिश्चित हो सके।