'भगवान विश्वकर्मा निर्माण एवं शिल्प के देवता तथा मेहनतकश समाज के प्रतीक'
श्रमिक वर्ग है समाज की असली रीढ़ : कृष्ण कुमार बेदी
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नरवाना 17-Sep-2025
हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा न केवल निर्माण एवं शिल्प के देवता हैं, बल्कि वे मेहनतकश समाज के प्रतीक हैं, जिन्होंने अपने जीवन में यह संदेश दिया कि ईमानदारी, लगन और कर्मशीलता से हर व्यक्ति आगे बढ़ सकता है। भगवान विश्वकर्मा मेहनतकशों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों के संरक्षक थे। उनकी शिक्षाओं में पाया जाता है कि समाज के सबसे जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोग ही देश और प्रदेश की असली ताकत हैं।
कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी बुधवार को नरवाना में विश्वकर्मा धर्मशाला में विश्वकर्मा राजमिस्त्री संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह भव्य आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस और विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में भारी संख्या में कारीगर, राजमिस्त्री, समाजसेवी, युवा, महिलाएं और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
कैबिनेट मंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आज देश में सेवा, समर्पण और जनकल्याण के पर्याय बन चुके हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं और उन्होंने सबसे ज्यादा ध्यान महिलाओं, युवाओं, गरीब तबके और श्रमिकों के सशक्तिकरण पर दिया है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार पारंपरिक कारीगरों और शिल्पियों को तकनीकी प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और विपणन सुविधा प्रदान कर रही है। यह योजना भगवान विश्वकर्मा के अनुयायियों को सम्मान और स्वावलंबन का मार्ग प्रदान करेगी।कैबिनेट मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाने के लिए संकल्पबद्ध है।
श्रमिकों, राजमिस्त्रियों, और कारीगरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं जिनका लाभ लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग को पंचायती राज संस्थाओं में 8 प्रतिशत आरक्षण देकर नया क्रांतिकारी कदम उठाया है। इससे पिछड़ा वर्ग के लोगों को सुरक्षित राजनीतिक अधिकार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना भी श्रमिक वर्ग को सम्मान देना है।