कांवांवाली बांध को सुरक्षित रखने हेतु सभी से सहयोग की अपील – अमरप्रीत कौर संधू
बांध के पास भीड़ एकत्र करने से बचें – एसएसपी
5 Dariya News
फाजिल्का 02-Sep-2025
फाजिल्का की डिप्टी कमिश्नर अमरप्रीत कौर संधू ने कांवांवाली बांध को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी से जिला प्रशासन को सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि इस बांध में कोई दरार आती है, तो दर्जनों अन्य गाँवों और यहाँ तक कि फाजिल्का शहर तक बाढ़ का ख़तरा हो सकता है। इसलिए इसे सुरक्षित रखना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि सतलुज क्रीक में भारी मात्रा में पानी आने के कारण क्रीक पार के सीमा गाँव पहले ही बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। एनडीआरएफ, आर्मी और ड्रेनेज विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सतलुज क्रीक के प्रोटेक्शन बांध पर अत्यधिक दबाव है और इसके साथ लगभग 90,000 क्यूसेक पानी बह रहा है।
बांध को मज़बूत बनाए रखने के लिए लगातार नई मिट्टी पहुँचाई जा रही है। कुछ स्थानों पर सीपेज भी हो रहा है, जिसे निरंतर दुरुस्त किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई लोग बिना किसी कार्य के सतलुज क्रीक के कांवांवाली और अन्य बांधों पर पहुँच रहे हैं।
ऐसे लोगों की भीड़ और उनके वाहनों के सड़क पर खड़े होने से मिट्टी और भारी मशीनरी बांध तक पहुँचाने में दिक़्क़त आ रही है। डिप्टी कमिश्नर अमरप्रीत कौर संधू और एसएसपी श्री गुरमीत सिंह ने आगे कहा कि कांवांवाली पत्तन तक जाने के लिए केवल एक ही सड़क है और यदि उस पर अतिरिक्त ट्रैफ़िक हो जाता है, तो जेसीबी और मिट्टी जैसी आवश्यक सामग्री बांध तक पहुँचाना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब की परंपरा रही है कि मुश्किल समय में लोग एक-दूसरे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। हम लंगर लगाने वाली संस्थाओं की भावना का सम्मान करते हैं, लेकिन यदि कांवांवाली सड़क पर अत्यधिक भीड़ एकत्र हो गई, तो मिट्टी पहुँचाने में बाधा आएगी और इससे हज़ारों लोग बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं तथा हज़ारों एकड़ और खेती तबाह हो सकती है।
इसीलिए प्रशासन ने लंगर लगाने वाली संस्थाओं से अपील की है कि वे बांध से पहले वाले स्थानों पर ही लंगर लगाएँ, ताकि भारी मशीनरी और मिट्टी की आपूर्ति प्रभावित न हो। प्रशासन का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि बाढ़ को नए क्षेत्रों में फैलने से रोकना है और इस नेक कार्य में सभी का सहयोग आवश्यक है।
इसी तरह, राहत कार्यों में लगी नावों को भी धीमी गति से चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उनकी लहरों से बांध को कोई नुकसान न पहुँचे।