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डॉ. बलबीर सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर एचआईवी/एड्स जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया

अभियान 12 अगस्त से 12 अक्टूबर, 2025 तक पूरे पंजाब में दो महीने तक चलाया जाएगा

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खरड़ (साहिबज़ादा अजीत सिंह नगर) 12-Aug-2025

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, घड़ुआ में एचआईवी/एड्स जागरूकता पर "तीव्र सूचना एवं संचार अभियान" का शुभारंभ किया। यह अभियान 12 अगस्त से 12 अक्टूबर, 2025 तक पूरे पंजाब में दो महीने तक चलाया जाएगा।

इस अभियान का शुभारंभ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री ने विश्वविद्यालय के छात्रों की एक जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर किया। पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि दो महीने तक चलने वाले सघन अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें गाँवों, शहरों, स्कूलों और कॉलेजों में पहुँचकर लोगों को एचआईवी के बारे में सही और सटीक जानकारी देंगी। 

इस अभियान के तहत 6567 स्कूलों और 725 कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे और युवाओं को एचआईवी के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार ने एचआईवी/एड्स अधिनियम-2017 को सख्ती से लागू किया है। इस अधिनियम के तहत एचआईवी प्रभावित लोगों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव कानूनी अपराध है।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में "युद्ध नशियां विरुद्ध" मुहिम प्रभावी ढंग से चलाई जा रही है। इस अभियान के तहत जहाँ एक ओर नशा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नशे के दलदल में फंसे युवाओं को बाहर निकालने के लिए पुनर्वास केंद्रों की सेवाएं मुफ्त प्रदान की जा रही हैं। 

उन्होंने बताया कि पंजाब में 43 ओएसटी (ओरल सब्सटीट्यूशन थेरेपी) केंद्र चलाए जा रहे हैं, जहाँ नशे के आदी लोगों का इंजेक्शन के माध्यम से मुफ़्त दवाइयों से इलाज किया जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे नशा छोड़ देते हैं और एचआईवी, हेपेटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियों से भी बच सकते हैं। डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि राज्य में 36 नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं, जिनमें इनडोर उपचार की सुविधा के साथ-साथ परामर्श, पोषण, दवाइयाँ और अन्य स्वास्थ्य सेवाएँ मुफ़्त दी जाती हैं। 

यहाँ इलाज करा रहे युवाओं के लिए 15 पुनर्वास केंद्र चलाए जा रहे हैं, जिनमें पुनर्वास और कौशल विकास के ज़रिए उन्हें नए सिरे से ज़िंदगी शुरू करने के लिए आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जाती है। इसके अलावा, 548 ओएटी क्लीनिक खुले हैं। ये क्लीनिक नशा छोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाते हैं और लोग अपने रोज़मर्रा के काम और ज़िम्मेदारियों को निभाते हुए अपना इलाज जारी रख सकते हैं।

डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि राज्य में मुफ़्त एचआईवी जाँच के लिए 115 एकीकृत परामर्श एवं जाँच केंद्र चलाए जा रहे हैं और एचआईवी संक्रमित लोगों को एआरवी दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए 24 एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) केंद्र चलाए जा रहे हैं। इसी प्रकार, पंजाब में 31 यौन संचारित संक्रमण निवारण क्लिनिक चलाए जा रहे हैं और गुप्त रोगों का इलाज किया जा रहा है। 

उन्होंने बताया कि राज्य के 78 लक्षित हस्तक्षेप (टीआई) कार्यक्रम उच्च जोखिम वाले समूहों - जैसे महिला यौनकर्मी, पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुष और नशा करने वालों - को विशेष स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एचआईवी और शराब का आपस में बहुत गहरा संबंध है। 

नशीली दवाओं के सेवन के दौरान, खासकर इंजेक्शन लगाने वाले लोगों द्वारा, नशीली दवाओं का सेवन करने वाले लोग सुई और सीरिंज साझा करते हैं, जिसे एचआईवी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता को कम कर देती है। 

यही कारण है कि नशे की लत के खिलाफ लड़ाई सीधे एचआईवी को रोकने की लड़ाई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि जब हम नशे की लत को खत्म करते हैं, तो हम एचआईवी के प्रसार को भी रोकते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार का उद्देश्य केवल एचआईवी के खिलाफ लड़ाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, जागरूक और नशा मुक्त समाज का निर्माण करना भी है।

इस अवसर पर विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं परियोजना निदेशक पंजाब राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी श्री घनश्याम थोरी, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति के सलाहकार डॉ. आर.एस. बावा, सोसायटी के अतिरिक्त परियोजना निदेशक डॉ. विशाल गर्ग, संयुक्त निदेशक श्रीमती पवन रेखा बेरी और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।