विकास विवेकपूर्ण होना चाहिए, हर पेड़ उखाड़ने पर सौ पेड़ लगाने होंगे : उमर अब्दुल्ला
आइए पेड़ लगाकर आनंद लें और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर पर्यावरण दें
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जम्मू 28-Jul-2025
जलवायु परिवर्तन एक वास्तविक समस्या है और इसके संकेत हमारे चारों ओर दिखाई दे रहे हैं। पृथ्वी और हमारा पर्यावरण एक विरासत है जिसे हमें अगली पीढ़ियों को सौंपना चाहिए अगर सुधार नहीं भी कर सकते, तो कम से कम अपने जीवनकाल में संरक्षित तो करना ही चाहिए।
“मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अभिनव थिएटर में जम्मू और कश्मीर वन विभाग द्वारा आयोजित वन महोत्सव 2025 समारोह का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने लोगों से इस उत्सव को एक जीवंत जन आंदोलन में बदलने का आह्वान करते हुए कहा कि आइए पेड़ लगाकर और पौधे उपहार में देकर आनंद लें।
उनके साथ जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण और जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा, मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग की आयुक्त एवं सचिव शीतल नंदा, जनजातीय मामलों के सचिव प्रसन्ना रामास्वामी जी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, डीडीसी सदस्य (डंसाल) शमीमा बेगम, और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में केंद्र शासित प्रदेश के जनजातीय सदस्यों, छात्रों और नागरिकों सहित व्यापक सामुदायिक भागीदारी रही। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ज़ोर देकर कहा कि आज हमारे कार्यों के परिणाम लंबे समय तक रहेंगे। लालच पर लगाम लगनी चाहिए, केवल हमारी ज़रूरतें पूरी होनी चाहिए।
अनियंत्रित वनों की कटाई रुकनी चाहिए। सार्थक परिणाम प्राप्त करने के लिए केवल आँकड़े ही नहीं, बल्कि वास्तविक वनरोपण प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि विकास एक ज़रूरत है, लेकिन यह विवेकपूर्ण होना चाहिए। एक संतुलन होना चाहिए, पर्यावरण के प्रति सच्ची चिंता के साथ विकास किया जाना चाहिए।
हर पेड़ उखाड़ने पर सौ पेड़ लगाने होंगे। सरकार के संकल्प की पुष्टि करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि वन अधिकार अधिनियम और लघु वनोपज का लाभ प्रत्येक इच्छित लाभार्थी तक पहुँचे। युवाओं और आदिवासी समुदायों को संबोधित करते हुए, उन्होंने पेड़ों के स्थायी मूल्य और सामूहिक प्रबंधन के महत्व पर ज़ोर दिया।
जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण, तथा जनजातीय मामलों के मंत्री, जावेद अहमद राणा ने वनों की रक्षा में जनजातीय आबादी की अनूठी ज़िम्मेदारी को स्वीकार किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जनजातीय मामलों के विभाग को वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी बनना चाहिए।
मंत्री ने जनजातीय कल्याण के लिए सरकारी पहलों का विस्तृत विवरण दिया, जिसमें चेकडैम, वर्षा जल संचयन और रिसाव गड्ढों के माध्यम से कंडी क्षेत्रों में जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने वन धन योजना के तहत युवा-केंद्रित रोज़गार के अवसरों पर भी प्रकाश डाला और वर्तमान में विकसित की जा रही आगामी स्थायी पर्यटन योजनाओं, जैसे इको-ट्रैक गतिविधियों, का भी उल्लेख किया।
समग्र सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए, उन्होंने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का ज़िक्र किया, जिसके तहत आदिवासी समुदायों के लिए समावेशन, बुनियादी ढाँचे और सरकारी गारंटी की पूर्ति हेतु कई परियोजनाएँ प्रस्तावित की गई हैं।
मुख्यमंत्री के सलाहकार, नासिर असलम वानी ने कहा कि जंगल सिर्फ़ संसाधन नहीं हैं, वे जीवित संरक्षक हैं जो हमें अपने घरों को गर्म करने के लिए जलाऊ लकड़ी, हमारे मवेशियों को खिलाने के लिए चारा, हमारे आश्रयों के निर्माण के लिए लकड़ी और जीवित रहने के लिए साँस लेने वाली हवा देते हैं।
उन्होंने लोगों से वृक्षारोपण की सदियों पुरानी परंपराओं से फिर से जुड़ने का आग्रह किया, जो कभी अनुष्ठानों का एक अभिन्न अंग हुआ करती थीं। उन्होंने कहा कि ये केवल रीति-रिवाज़ नहीं हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और ज़िम्मेदारी के गहरे निहित कार्य हैं।
उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इन परंपराओं को पुनर्जीवित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी कि वनवासियों के अधिकारों के साथ-साथ स्वयं वनों का भी संरक्षण हो। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विकास मायने रखता है, लेकिन प्रकृति की कीमत पर कभी नहीं।
समारोह में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वन विभाग में नव चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे तथा पर्यावरण के क्षेत्र में योगदान के लिए व्यक्तियों और संगठनों को सम्मानित किया।