5 Dariya News

मृत्यु के 2 महीने बाद भारत पहुंचा बटाला के गुरप्रीत सिंह का पार्थिव शव

सरबत का भला ट्रस्ट की मुफ्त एंबुलेंस सेवा द्वारा हवाई अड्डे से घर भेजा गया पार्थिव शव

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अमृतसर 29-Apr-2025

जरूरतमंदों के मसीहा के तौर पर जाने जाते दुबई के प्रसिद्ध कारोबारी और सरबत का चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख डॉ.  एस.पी सिंह ओबेरॉय के प्रयासों से आज गुरदासपुर जिले के गांव अम्मोनंगल के साथ संबंधित 49 वर्षीय गुरप्रीत सिंह पुत्र बसंत सिंह का पार्थिव शव दुबई से श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अमृतसर में पहुंचा।

इस संबंध में जानकारी देते डॉ. एस.पी सिंह ओबेरॉय ने बताया कि गुरप्रीत सिंह भी अन्य युवाओं की तरह अपने परिवार के अच्छे भविष्य के लिए पिछले कुछ वर्षों से दुबई आया था।  उन्होंने बताया कि परिवारिक सदस्यों के अनुसार 1 मार्च को गुरप्रीत के साथ उनका संपर्क टूट गया था और उन्होंने दुबई में रहते अपने रिश्तेदारों के अलावा उसके दोस्तों के माध्यम से उसको ढूंढने की बहुत कोशिश की। 

मगर बदकिस्मती के साथ गत 23 अप्रैल को उनको पता लगा कि गुरप्रीत सिंह ने गुम होने से अगले दिन ही भाव 2 मार्च को आत्महत्या कर ली थी। डॉ. ओबरॉय ने बताया कि परिवार ने उनके साथ संपर्क करने पर उन्होंने अपने निजी सचिव बलदीप सिंह चाहल के माध्यम से जहां जरूरी कागज़ी कार्रवाई पूरी करवाने में परिवार की मदद की, वहां गत रात अमृतसर हवाई अड्डे से उसका पार्थिव शव ट्रस्ट की मुफ्त एंबुलेंस सेवा के माध्यम से उसके घर भेजा गया। 

उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे पर पीड़ित परिवार के साथ संवेदना व्यक्त करने के लिए पहुंचे ट्रस्ट के पंजाब अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह हेर, जिला महासचिव मनप्रीत संधू चमियारी और कोषाध्यक्ष नवजीत घई की तरफ से पीड़ित परिवार की बताई गई आर्थिक हालात अनुसार उनके द्वारा गुरप्रीत सिंह की पत्नी और बुजुर्ग विधवा माता को घर के गुजारे के लिए कर्मवर 2500-2500 रु मासिक पेंशन दी जाएगी। उन्होंने विशेष तौर पर जिक्र करते हुए बताया कि गुरप्रीत सिंह का पार्थिव शव भारत भेजने के लिए आया खर्च उसकी कंपनी द्वारा किया गया है।

गौरतलब है कि ट्रस्ट की तरफ से डॉ. ओबरॉय की अगुवाई में अब तक 410 के करीब बदनसीब युवाओं के पार्थिव शव उनके परिजनों तक पहुंचाए जा चुके हैं। इस दौरान हवाई अड्डे पर गुरप्रीत सिंह के पार्थिव शव के साथ दुबई से पहुंचे उसके जीजा नरेंद्र सिंह के अलावा उसके भाई शुभप्रीत सिंह, राणा प्रताप सिंह, तेजिंदर सिंह अमरदीप सिंह और जोरावर सिंह ने डॉ. एस.पी सिंह ओबरॉय का इस बड़े प्रयास के लिए दिल से आभार व्यक्त करते कहा कि उनके द्वारा परिवार की इस कठिन घड़ी में की गई बड़ी मदद को वह हमेशा याद रखेंगे।