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राजौरी दिवस: मनोज सिन्हा ने 1948 की आजादी के वीरों को किया सम्मानित

राजौरी दिवस भारतीय सेना की अजेय शक्ति का प्रतीक है और यह हमें याद दिलाता है कि हम अपनी एकता और सांस्कृतिक प्रवाह को कभी खंडित नहीं होने देंगे : मनोज सिन्हा

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राजौरी 13-Apr-2025

“राजौरी दिवस“ के अवसर पर, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भारतीय सेना और नागरिक वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1948 में इस दिन राजौरी की मुक्ति के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। राजौरी में एक स्मरणोत्सव कार्यक्रम में भाग लेते हुए, उपराज्यपाल ने लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचिंद्र कुमार, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ उत्तरी कमान, लेफ्टिनेंट जनरल पीके मिश्रा जीओसी व्हाइट नाइट कोर, सेना के दिग्गजों, जनप्रतिनिधियों और सुरक्षा बलों, जम्मू-कश्मीर पुलिस और नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सभी बहादुर सैनिकों और नागरिकों के बलिदान का सम्मान किया।

 उपराज्यपाल ने कहा, “हमारे सैनिकों के अदम्य साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम के लिए उनके सर्वोच्च साहस और वीरता को हमेशा याद किया जाएगा। सैनिकों की कर्तव्य के प्रति अनुकरणीय निष्ठा और आत्म-बलिदान ने अतीत में हमेशा हमारी रक्षा की है और राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भविष्य में भी ऐसा करती रहेगी। राष्ट्र उनके अमूल्य बलिदानों के लिए वास्तविक नायकों का कृतज्ञ है।“ 

उपराज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और उन सभी बहादुर नागरिकों और सैनिकों की साहस की विरासत, जो राजौरी की धरती पर अंकित है, पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। “राजौरी की यह धरती हमारे बहादुरों के मन के संकल्प और उनके कार्यों की पूर्णता की गवाह है।’’

उन्होंने कहा कि यह उन सभी वीरों के जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का भी अवसर है, जिन्होंने नागरिकों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। आज का अवसर नई पीढ़ी के युवाओं के मन में उन वीरों के मूल्यों को स्थापित करने का भी है, जिन्होंने राजौरी में आए संकट का बहादुरी से सामना किया। 

उपराज्यपाल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राजौरी दिवस भारतीय सेना की अजेय शक्ति का प्रतीक है और यह हमें याद दिलाता है कि हम अपनी एकता और सांस्कृतिक प्रवाह को कभी भी खंडित नहीं होने देंगे। गुरु गोबिंद सिंह जी ने आज ही के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। उनकी अमर शिक्षाएं हमारे वीर सैनिकों का निरंतर मार्गदर्शन कर रही हैं।

उपराज्यपाल ने कहा, “उनके दर्शन और मूल्य भारतीय सेना के बहादुर सैनिकों को आकार देते हैं और उन्हें त्याग, समर्पण, वीरता और बलिदान के लिए प्रेरित करते हैं।“ उपराज्यपाल ने समाज के सभी वर्गों से शांति और विकास को बाधित करने की कोशिश करने वाले तत्वों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने का भी आह्वान किया। 

आतंकवाद के खिलाफ एकजुट प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए, उपराज्यपाल ने समाज के सभी वर्गों से विभाजनकारी ताकतों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने और आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया। “आज हमें और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

उपराज्यपाल ने कहा ’’दुश्मन लगातार आतंकवादियों को भेजकर हमारी शांति को भंग करने की कोशिश कर रहा है। भारतीय सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस को जनता के साथ मिलकर आतंकवादियों और उनके समर्थकों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

हमारी सामूहिक ताकत आतंकवाद और दुश्मन के खतरों को सफलतापूर्वक बेअसर कर देगी और शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।“इस अवसर पर राजौरी की मुक्ति के 77 गौरवशाली वर्षों की याद में एक विशेष डाक कवर जारी किया गया। विभिन्न थीमों पर आधारित प्रभावशाली मोटरसाइकिल कलाबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सुरक्षा बलों और जम्मू कश्मीर पुलिस की वीरता का प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर अध्यक्ष जिला विकास परिषद राजौरी चैधरी नसीम लियाकत, इफ्तखार अहमद, ठाकुर रणधीर सिंह तथा विधान सभा सदस्य चैधरी जावेद इकबाल, उपायुक्त राजौरी अभिषेक शर्मा, शहीदों के परिवार के सदस्य और बड़ी संख्या में लोग भी उपस्थित थे और उन्होंने राजौरी के वीरों को श्रद्धांजलि दी।