5 Dariya News

पंथ रतन भाई जसबीर सिंह खालसा की स्मृति में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक समागम में हजारों संगतों ने शिरकत की

पंथ जगत की महान शख्सियतों ने भाई साहिब को श्रद्धांजलि अर्पित की

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मोहाली 30-Mar-2025

गुरुद्वारा गुरशब्द प्रकाश अकाल आश्रम, सोहाना के तीन दिवसीय वार्षिक समागम में बड़ी संख्या में संगतों ने शिरकत कर गुरबाणी का श्रवण किया। उल्लेखनीय है कि श्री गुरु हरिकृषण साहिब चैरिटेबल हॉस्पिटल के संस्थापक पंथ रतन भाई जसबीर सिंह खालसा की स्मृति में यह समागम प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर पंथ के प्रसिद्ध रागियों, ढाडियों और कथा वाचकों ने संगतों को पवित्र गुरबाणी से जोड़ा।

समागम के अंतिम दिन सिंह साहिब ज्ञानी रघबीर सिंह जी (मुख्य ग्रंथी, श्री दरबार साहिब), सिंह साहिब ज्ञानी सुल्तान सिंह जी (ग्रंथी, श्री दरबार साहिब), और सरदार भगवंत सिंह (जनरल मैनेजर, श्री दरबार साहिब) ने विशेष रूप से शामिल होकर संगत को संबोधित किया। सोहाना हॉस्पिटल के चेयरमैन भाई द्विंदर सिंह खालसा के नेतृत्व में आयोजित इस समागम के अंतिम दिन विभिन्न धार्मिक विद्वानों और कीर्तनियों ने संगतों को गुरबाणी का श्रवण कराया। 

इस दौरान बीबी मनदीप कौर खालसा, भाई इंदरप्रीत सिंह (सोहाना), बीबी मलकित कौर (हनुमानगढ़), भाई प्रदीप सिंह, एजुकेट पंजाब प्रोजेक्ट का जत्था, सिंह साहिब ज्ञान सुल्तान सिंह, भाई दविंदर सिंह (दिल्ली), सिंह साहिब ज्ञानी रणजीत सिंह (मुख्य ग्रंथी, गुरुद्वारा बंगला साहिब, दिल्ली), भाई सुरिंदर सिंह, ज्ञानी जसवंत सिंह परवाना, भाई अर्शदीप सिंह (लुधियाना), ज्ञानी चरणजीत सिंह, भाई गुरशरण सिंह (लुधियाना), ज्ञानी जोगिंदर सिंह जी, बहन रविंदर कौर एवं जत्था, भाई साहिब भाई दविंदर सिंह जी खालसा, भाई जगजीत सिंह बब्बीहा (दिल्ली) ने आध्यात्मिक कीर्तन के माध्यम से संगतों को गुरबाणी से जोड़ा ।

समागम के दौरान 30 मार्च को एक विशाल रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। सभी कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण फतेह टीवी, चढ़ती कला टाइम टीवी, संगत टीवी और यूट्यूब के माध्यम से किया गया। जिससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी गुरबाणी का लाभ ले सके।

श्री गुरु हरिकृषण साहिब चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी गुरमीत सिंह ने बताया कि भाई जसवीर सिंह खन्ना वाले द्वारा शुरू किए गए मानवता के कार्य को आगे बढ़ाते हुए सोहाना हॉस्पिटल बड़े पैमाने पर लोगों की सेवा कर रहा है। इस अवसर पर गुरुद्वारे में अटूट लंगर भी चलाया गया।