एक राष्ट्र, एक चुनाव विधेयक से शासन की दक्षता बढ़ेगी और देश की आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा – सांसद श्री अनुराग ठाकुर
पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय में सांसद श्री अनुराग ठाकुर द्वारा एक राष्ट्र, एक चुनाव पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन
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बठिंडा 27-Feb-2025
देश की लोकसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से न केवल बार-बार चुनावों के आयोजन की प्रक्रिया में जाया होने वाले समय और संसाधनों की बचत होगी बल्कि यह शासन की दक्षता को बढ़ाने के साथ-साथ देश की आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ावा देगा। यह विचार माननीय लोकसभा सांसद श्री अनुराग ठाकुर ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विषय पर पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित एक विशेष व्याख्यान के दौरान व्यक्त किए।
कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में सीयू पंजाब के शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।वर्तमान सांसद के रूप में अपने पांचवें कार्यकाल में सेवारत और एक पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने सभागार को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत में प्रारंभिक रूप से समकालिक चुनाव प्रणाली लागू थी।
हालांकि समय के साथ कुछ लोकसभा और विधानसभा कार्यकाल समय से पहले समाप्त होने के कारण यह प्रणाली बाधित हो गई। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के नेतृत्व में गठित एक उच्च-स्तरीय समिति ने देश में एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का प्रस्ताव रखा है जिसमें सिफारिश की गई है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ या तो एक ही दिन या एक विशिष्ट समय सीमा के भीतर आयोजित किए जाएं।
समिति द्वारा यह प्रस्ताव प्रशासकों, विधिवेत्ताओं, राजनीतिज्ञों और चुनाव आयोग के अधिकारियों की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह पहल चुनावी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने, चुनावों के कारण होने वाली बाधाओं को कम करने और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने का प्रयास है।
श्री अनुराग ठाकुर ने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव हर पांच साल में होते हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों में विधानसभा और नगर निगम चुनावों के आयोजन में राजनीतिक दलों, नेताओं, नौकरशाहों, शिक्षकों, कर्मचारियों और चुनाव आयोग को अत्यधिक समय और प्रयास लगाना पड़ता है। इससे न केवल संसाधनों की खपत होती है बल्कि अनावश्यक खर्च भी बढ़ता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक संसद में पेश किया है ताकि पूरे देश में विभिन्न चुनावों की कार्य प्रक्रिया को एक साथ संचालित/समन्वित किया जा सके। सदन में चर्चा के बाद इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया है।
जेपीसी के सदस्य के रूप में, उन्होंने यह राय व्यक्त की कि यह विधेयक भारत में शासन प्रणाली में सुधार लाने की क्षमता रखता है, जिससे नीतिगत गतिरोध को रोका जा सकेगा, संसाधनों का पुनर्निर्देशन कम होगा और सरकार पर आर्थिक बोझ कम होगा।श्री अनुराग ठाकुर ने यह भी बताया कि जीएसटी जैसी नवाचारी पहलों ने न केवल कर संग्रह में वृद्धि की है बल्कि नागरिकों को भी लाभ पहुंचाया है, जिसके परिणाम स्वरुप 12 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं पर कर में छूट प्रदान की जा सकी है।
इसी तरह ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पहल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी, जिससे नेता और प्रशासक पूरी तरह से जनकल्याण पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव आयोग वर्तमान में विभिन्न राज्यों में लोकसभा, विधानसभा और नगर निगम चुनावों के आयोजन पर पांच वर्षों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है।
उन्होंने कहा "यदि हम इस धन को बचाएं, तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने के लिए 2047 तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा—हम ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य इससे कहीं पहले हासिल कर सकते हैं।"उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर सुधारों के लिए साहसिक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। यह विधेयक मोदी सरकार की एक और ऐतिहासिक पहल है, जिसका उद्देश्य शासन को पुनर्परिभाषित करना है ताकि नीति निर्माण और कार्यान्वयन में निरंतरता, स्थिरता और दक्षता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस विषय पर अपनी राय को सरकारी वेबसाइट पर साझा करें और सोशल मीडिया पर अपना समर्थन व्यक्त करें।अपने अध्यक्षीय उद्बबोधन में केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने मुख्य अतिथि और आमंत्रित वक्ता श्री अनुराग ठाकुर का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह व्याख्यान छात्रों की चुनाव सुधारों की समझ को समृद्ध करेगा।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी स्मार्ट निर्णय लेने का युग है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू की है। उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पहल चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल शिक्षकों, शोधार्थियों और उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों का कीमती समय बचाएगी, जिन्हें अन्यथा चुनावी कार्यों में भाग लेना पड़ता है या बार-बार मतदान करने के लिए अपने गृह नगर जाना पड़ता है।
कार्यक्रम की शुरुआत डीन छात्र कल्याण प्रोफेसर संजीव ठाकुर के स्वागत भाषण के साथ हुई, जिसके बाद कार्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर बावा सिंह ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया। अंत में कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा श्री अनुराग ठाकुर को एक देश एक चुनाव की जोत जलाने एवं लोकतंत्र को सशक्त बनाने हेतु भगीरथ प्रयास करने के लिए आभार व्यक्त किया।