5 Dariya News

बयां कर रही है सरोवर की लहराती लहरें अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के बीते हुए लम्हों को

18 दिन चले इस महोत्सव की सुंदरता को अपने अंदर समेटे हुए है सरोवर, शिल्पकार की अनूठी शिल्पकला और लोक कलाकारों के वाद्य यंत्रों की धुन की गूंज से सराबोर हुआ सरोवर

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कुरुक्षेत्र 15-Dec-2024

धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर 3.5 किलोमीटर की परिधि में बसा हुआ तथा विश्व पटल पर अपनी एक अलग ही पहचान बनाएं हुए ब्रह्मसरोवर की लहरती लहरें भी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के बीते हुए लम्हों को बयां करती नजर आ रही है। ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर 28 नवंबर से 15 दिसंबर तक 18 दिनों तक चले इस अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की सुंदरता को अपने अंदर समेटा हुआ है। 

अहम पहलू यह है कि ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर 28 नवंबर से 15 दिसंबर तक 18 दिनों तक चले इस अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में विभिन्न प्रदेशों से आए हस्त शिल्पकारों की अनूठी व हैरान करने वाली शिल्पकला ने लोगों का मन मोहने का काम किया है।अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2024 के आखिरी दिन हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचे और उन्होंने शिल्पकारों की हस्त शिल्पकला का कद्रदान होकर जमकर खरीददारी भी की। 

इसके अलावा विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकारों की अनोखी लोक कला व अपने-अपने प्रदेश की लोक कला के साथ-साथ वेशभूषा और साहित्य को दिखाने का प्रयास किया गया। इन लोक कलाकारों के वाद्य यंत्रों की धुन की गूंज से ब्रह्मसरोवर भी सराबोर होकर स्वागत करता हुआ नजर आया। इतना ही नहीं इन कलाकारों की लोक कला का रंग अदभुत और सराहनीय रहा, महोत्सव में आने वाला प्रत्येक पर्यटक अपने आप को इस रंग में रंगने से रोक नहीं पाया। 

जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़ राज्यों के कलाकार अपने-अपने प्रदेश की लोक संस्कृति को अपने नृत्यों और लोक गीतों के माध्यम से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। यह कलाकार राउफ, कुल्लू नाटी, गाथा गायन, छपेली, शामी, गुदुम बाजा, करमा, राई और पंजाब के लुडी आदि लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी। इन लोक नृत्यों में बजने वाले वाद्य यंत्र लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे है और लोक गीत दर्शकों के मन पर अपनी अनोखी छाप छोड़ रहे है।