क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग : सस्टेनेबिलिटी 2025 में एलपीयू भारत में 24वें स्थान पर रहा
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग : सस्टेनेबिलिटी 2025 में कई आईआईटी और एनआईटी को पीछे छोड़ कर एलपीयू आगे निकला
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जालंधर 12-Dec-2024
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) ने महत्वपूर्ण क्वाक्वेरेली साइमंड्स (क्यूएस) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग: सस्टेनेबिलिटी 2025 में भारत में 24वां और ग्लोबल स्तर पर 749वां स्थान हासिल करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
यह रैंकिंग आईआईटी वाराणसी, गुवाहाटी, गांधीनगर, भुवनेश्वर, इंदौर, हैदराबाद, रोपड़, यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास, मुंबई यूनिवर्सिटी और विभिन्न एनआईटी जैसे प्रसिद्ध संस्थानों से आगे निकलकर सस्टेनेबिलिटी में एलपीयू द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासो के बारे में जानकारी देती है।
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग: सस्टेनेबिलिटी 2025 ने तीन प्रमुख वर्गो के आधार पर यूनिवर्सिटी का मूल्यांकन किया: पर्यावरणीय प्रभाव, सामाजिक प्रभाव और गवर्नेस, प्रत्येक को आगे पर्फोम्स लैंस में विभाजित किया गया। इंवायरमेंटल इंपेक्ट केटेगिरी में पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति अपनी वचनबद्धता के लिए एलपीयू को भारत में 5वां और विश्व स्तर पर 165वां स्थान मिला।
सोशल इंपेक्ट वर्ग में नॉलेज एक्सचेंज लेंस में इंडिया में तीसरा और विश्व में 475 रैंक मिला है। इस रैंकिंग ने भारत सरकार के उद्देश्यों के साथ मिल कर, अपने सभी कार्यों में सस्टेनेबल विकास लक्ष्यों को महत्ता देने के एलपीयू की पहल के बारे में जानकारी दी है।
उन्होंने शिक्षा, रिसर्च और ऑपरेशनल सस्टेनेबिलिटी के केंद्र के रूप में यूनिवर्सिटी की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया। डॉ. अशोक कुमार मित्तल, संसद सदस्य (राज्यसभा) और एलपीयू के संस्थापक चांसलर, ने इस बात पर जोर दिया कि यह रैंकिंग केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि हमारे द्वारा किए जा रहे सभी प्रयासों में सस्टेनेबिलिटी के लिए एलपीयूके वचन को प्रदर्शित करती है।
डॉ. मित्तल ने कहा, एलपीयू केवल एक यूनिवर्सिटी नहीं है; यह एक आंदोलन है वास्तविक उद्देश्य धरती माता और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करना है।" क्यूएस सस्टेनेबिलिटी रैंकिंग को यह दिखाने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि यूनिवर्सिटी आज की पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ईएसजी) चुनौतियों का समाधान करने में किस तरह से भूमिका निभा रही हैं।
ये रैंकिंग संस्थानों की सस्टेनेबिलिटी के प्रति समर्पण का मूल्यांकन करने के लिए एक मूल्यवान लेंस प्रदान करती है, जो समाज और प्लेनेट दोनों की भलाई को बढ़ावा देने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।