सुखबीर सिंह बादल की हत्या का प्रयास सिख परंपराओं, खालसा विरासत और गुरु साहिबान द्वारा विरासत में दिए गए मूल्यों और संस्थानों पर हमला : शिरोमणी अकाली दल
कोर कमेटी ने दावा किया कि पूरी घटना उदारवादी अकाली लीडरशीप को खत्म करने के लिए आप सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम को हिस्सा
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चंडीगढ़ 06-Dec-2024
शिरोमणी अकाली दल की कोर कमेटी ने आज सरदार सुखबीर सिंह बादल पर हुए जानलेवा हमले को सिख परंपराओं, खालसा विरासत और महान गुरु साहिबान द्वारा विरासत में दिए गए पवित्र मूल्यों और संस्थाओं पर हमला करार दिया है। पार्टी ने पूरी घटना को आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम के हिस्से का भाग बताते हुए कहा कि उदारवारी अकाली लीडरशीप जो गुरु साहिबान द्वारा बताए गए ‘सरबत दा भला’ के सिद्धांत पर चल रही है उसे खत्म करने की गहरी साजिश है।
पार्टी की कोर कमेटी की मीटिंग, जिसकी अध्यक्षता कार्यकारी अध्यक्ष सरदार बलविंदर सिंह भूंदड़ ने की, उन्होने कहा कि हत्या का प्रयास श्री अकाल तख्त साहिब के प्रतीक मीरी पीरी की अवधारणा और विचारधारा पर और पवित्र सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब पर भी हमला है,जिसपर अब सिख विरोधी हत्यारे की गोली के अपवित्र निशान हैं। उन्होने कहा,‘‘ ये गोली के निशान इंदिरा गांधी द्वारा दागे गए बुलेट के निशानों के समान ही हैं।’’
कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल दमन की एक नई लहर शुरू करने और फर्जी मुठभेड़ों में सिख नौजवानों के खात्मे के बहाने के रूप में किया जा सके। उन्होने कहा,‘‘ हत्या की कोशिश करने वाला वह अकेला व्यक्ति नही बल्कि वास्तव में भेड़ियों के एक समूह का सदस्य है वह शक्तिशाली सिख विरोधी ताकतों की ओर से केवल शार्प शूटर के रूप में काम कर रहा था।
उन्होने कहा कि हत्या के प्रयास के दिन भी उसे पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सरदार सुखबीर सिंह बादल तक पहुंचने में सहायता और मार्गदर्शन किया जा रहा था। पुलिस अधिकारियों की अपने ही भेड़िये से खुद को अलग करने की जल्दबाजी उनके अपराध को साबित कर रही है।’’ कोर कमेटी ने घटना की पंजाब पुलिस द्वारा की जा रही जांच को खारिज कर दिया और कहा कि वे पंजाब के राज्यपाल से संपर्क कर निष्पक्ष जांच की मांग करेंगें।
वरिष्ठ नेता सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया और डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पुलिस अधीक्षक हरपाल रंधावा की भूमिका संदिग्ध है। उन्होने कहा,‘‘ ऐसा लगता है कि आम आदमी पाटी सरकार ने अपराधी को सुखबीर सिंह बादल तक पहुंचने में सहायता की और एस.पी हरपाल रंधावा ने इस संबंध में बड़ी भूमिका निभाई है।
उन्होने विस्तार से बताया कि कैसे एस.पी ने ‘सेवा’ के पहले दिन नौजवान नेताओं को और यहां तक कि एसजीपीसी सचिव को घटनास्थल से खुद को हटाने के लिए कहकर सरदार बादल को अलग-थलग करने की कोशिश की, जबकि उन्हे हमलावर नारायण चैड़ा के साथ हाथ मिलाते हुए देखा गया । वरिष्ठ नेताओं ने कल मोगा मे दल खालसा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अकाली नेता गुरप्रताप सिंह वडाला की उपस्थिति पर भी सवाल उठाए।
उन्होने कहा कि दल खालसा का संविधान में विश्वास नही है, और वह खालिस्तान के समर्थन में खड़ा है। उन्होने श्री वडाला से दोनों मुददों पर अपना रूख स्पष्ट कने के लिए कहा है। कोर कमेटी ने एक प्रस्ताव भी पारित किया ,जिसमें कहा गया कि यह हमला अकाली दल के उदारवादी लीडरशीप को खत्म करने की साजिश का हिस्सा था। पार्टी ने सिख विरोधी ताकतों द्वारा श्री दरबार साहिब पर ऐसे समय में किए गए हमले की निंदा की, जब एक ‘सेवादार -सुखबीर सिंह बादल गुरुघर के ‘द्धार’ पर ‘सेवा’ कर रहे थे।
पार्टी ने यह भी कहा कि इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री भगवंत मान का आचरण शर्मनाक है। उन्होने कहा,‘‘ पवित्र स्थान पर हमले के बाद स्थिति का जायजा लेने के बजाय मुख्यमंत्री को घटना को कमतर आंकने की कोशिश की’। कमेटी ने एएसआई जसबीर सिंह और उनके साथी द्वारा दिखाई गई सतर्कता और निस्वार्थ साहस की भावना की सराहना की, जिसने हत्या की साजिश को विफल कर दिया और साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जसबीर सिंह की उस दिन डयूटी पर नही थे और वह खुद ही श्री दरबार साहिब आए थे।
प्रस्ताव में कहा गया,‘‘ वह श्री दरबार साहिब में तैनात 175 पुलिसकर्मियों का हिस्सा नही थे जैसा कि अमृतसर के पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने दावा किया है।’’