आठ देशों के 350 से अधिक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने टीटीएनएचएस 2024 पर सीयू पंजाब के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया
5 Dariya News
बठिंडा 06-Dec-2024
पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) द्वारा भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन और डीएसटी-एसईआरबी के सहयोग से 4 से 6 दिसंबर को "ट्रांसलेशनल ट्रेंड्स इन नेचुरल एंड हेल्थ साइंसेज" विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (टीटीएनएचएस 2024) का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में भारत, अमेरिका, जापान, चीन, पुर्तगाल, स्पेन, इटली और हंगरी सहित आठ देशों से 350 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। राष्ट्रीय स्तर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), राष्ट्रीय जैविक संस्थान, सीएसआईआर और कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम संरक्षक एवं सीयू पंजाब के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने ट्रांसलेशनल रिसर्च के महत्व पर बल देते हुए यह विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी के निदेशक डॉ. राकेश कुमार मिश्रा ने विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय के प्रयास की सराहना करते हुए अंतरविषयी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस सम्मेलन को एक सशक्त मंच बताया।
इस तीन दिवसीय सम्मेलन के प्रत्येक दिन की शुरुआत दो प्लेनरी व्याख्यानों से हुई। सम्मेलन के प्रथम दिवस में टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी के निदेशक डॉ. राकेश कुमार मिश्रा ने जीनोम टेक्नोलॉजीज पर व्याख्यान दिया और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष प्रो. भूषण पटवर्धन ने आयुर्वेद और एकीकृत चिकित्सा पर चर्चा की।
द्वितीय दिवस पर कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली विषय पर प्रकाश डाला, और रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षिक एवं शोध संस्थान के प्रो-चांसलर स्वामी आत्मप्रियानंद जी ने विज्ञान-दर्शन-आध्यात्मिकता के अंतरसंबंध विषय पर विचार प्रस्तुत किए। तृतीय दिवस पर एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने मेडिकल साइंस में डिजिटल क्रांति पर व्याख्यान दिया, और और एनआईटी जालंधर के निदेशक प्रो. बी.के. कन्नौजिया ने बायोटेलीमेट्री पर विस्तार से चर्चा की।
इस सम्मेलन में प्रो. स्टीवन कैसल (यूएसए), डॉ. मासाको किनोशिता (जापान), प्रो. जियान झाओ (चीन), प्रो. पाउला मार्क्स (पुर्तगाल), प्रो. जोस ए. मार्टिन गागो ( स्पेन), प्रो. जियानलुका टेल (इटली), प्रो. ग्योर्गी केगलेविच (हंगरी), प्रो. एंड्रिया कैवल्ली (इटली), प्रो. स्टेफ़ानिया बुटिनी (इटली) सहित सम्मिलित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने विविध विषयों पर विचार-विमर्श किया।
प्रतिभागियों ने मुख्य वक्तव्य, आमंत्रित व्याख्यान, मौखिक प्रस्तुतियां और पोस्टर सत्रों में भाग लेते हुए नवाचार-आधारित शोध विषयों पर चर्चा की। इस सम्मेलन में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया जिसमें विश्वविद्यालय के छात्रों ने भारतीय लोकगीतों और नृत्यों पर मनमोहक प्रस्तुतियों से अतिथियों को मंत्रमुग्ध किया।
समापन सत्र में एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में तथा एआईसीटीई के सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार ने सम्मानित अतिथि के रूप में सहभागिता की। प्रो. मीनू सिंह ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कार्यक्रम शोधकर्ताओं को आध्यात्म और विज्ञान जैसे बहुविषयक और पारविषयक क्षेत्रों में शोध करने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रो. राजीव कुमार ने इस महत्वपूर्ण विषय पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए सीयू पंजाब के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी की प्रशंसा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐसे सम्मेलन प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए नवाचार आधारित शोध को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। माननीय कुलपति ने मुख्य अतिथि एवं सम्मानित अतिथियों के साथ विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए।
समापन सत्र की शुरुआत डीन छात्र कल्याण प्रो. संजीव ठाकुर के स्वागत भाषण एवं सह-संयोजक डॉ. सुनील कुमार सिंह द्वारा सम्मेलन रिपोर्ट की प्रस्तुति से हुई। अंत में कार्यक्रम समन्वयक प्रो. विनोद कुमार ने सह-संयोजक डॉ. अच्छे लाल शर्मा के साथ विशेषज्ञों, प्रतिभागियों और आयोजन टीम का आभार व्यक्त करते हुए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन दिया।