सीजीसी लांडरां ने शिक्षकों को इनोवेटिव टीचिंग स्ट्रेटेजीज और डिजिटल स्किल्स से सशक्त बनाने के लिए एफडीपी का आयोजन किया
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लांडरां 26-Nov-2024
चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेजेज (सीजीसी) लांडरां में इंटरनल क्वालिटी एश्योरेन्स सेल (आईक्यूएसी) ने ई एंड आईसीटी अकादमी, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक) मोहाली के सहयोग से पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया।
'शिक्षण में परिवर्तन:डिजिटल लर्निंग और कंटेंट डेवलपमेंट के लिए रणनीतियां'- थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में सीजीसी लांडरां के 100 से अधिक फैकल्टी मेंबर्स ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में संबंधित क्षेत्रों से आमंत्रित 19 से अधिक एक्सपर्ट्स द्वारा आयोजित सेशंस से प्रतिभागियों को बहुत लाभ प्राप्त हुआ।
इस एफडीपी का उद्देश्य सीजीसी लांडरां के एडुकेटर्स को आवश्यक रिसर्च कैपबिलिटीज़, प्रैक्टिकल स्किल्स और डिजिटल टूल्स व टीचिंग स्ट्रेटेजीज की प्रभावी समझ प्रदान करना था, जिस से वे नई एजुकेशन पॉलिसी तथा सहयोगात्मक विकास के लिए तैयार हो सकें।
थेओरेओटिकाल इनसाइट्स और प्रैक्टिकल ऍप्लिकेशन्स को मिलाकर, फैकल्टी मेंबर्स को उभरती टेक्नोलॉजीज़ जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर), वर्चुअल रियलिटी (वीआर) और मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज (एमओओसी) के बारे में जानकारी दी गयी।
मुख्य सेशंस में करीकुल्लुम डिज़ाइन, रिसर्च मेथोडोलॉजी, पर्सनलाइज्ड लर्निंग और मेन्टल हेल्थ अवेयरनेस जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। कई एक्सपर्ट स्पीकर्स की भागीदारी के साथ, यह एफडीपी सीजीसी के फैकल्टी मेंबर्स के लिए डिजिटल शिक्षा के विभिन्न पहलुओं में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्राप्त करने और लगातार विकसित हो रहे एजुकेशनल सेक्टर्स में उभरते रुझानों को समझने का एक शानदार माध्यम साबित हुआ।
कार्यक्रम के इनॉगरल पर प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई जिनमें डॉ. बलविंदर सिंह (चीफ इन्वेस्टिगेटर, ई एंड आईसीटी अकादमी, जॉइंट डायरेक्टर, सी-डैक मोहाली), डॉ. पी.एन. हृषीकेशा, कैंपस डायरेक्टर, सीजीसी लांडरां, डॉ. रुचि सिंगला, डायरेक्टर, आरएंडडी, सीजीसी लांडरा, डॉ. हरसिमरन कौर, डीन, आईक्यूएसी, सीजीसी लांडरां, और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न एक्सपर्ट्स ने शिक्षण और शोध के आधुनिक तरीकों पर अपने विचार साझा किए। डॉ. हरमेश कंसल, यूआईईटी, चंडीगढ़, ने रिसर्च मेथड्स एंड टीचिंग प्रैक्टिसेज पर चर्चा की। श्री तनवीर सिंह, आईआईटी-बॉम्बे, ने एक इंटरैक्टिव सत्र के माध्यम से एमओओसी प्लेटफॉर्म और कंटेंट डेवलपमेंट टूल्स का परिचय दिया और आकर्षक ई-कंटेंट बनाने के तरीके सिखाए।
डॉ. एस.एस. गिल, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़, ने एमओओसी और ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज (ओइआर) के एडवांस्ड कांसेप्ट पर अपनी विशेषज्ञता साझा की और नई एजुकेशन पॉलिसी (ऍनइपी) के लिए शिक्षकों को तैयार करने पर एक सेशन का नेतृत्व किया।
डॉ. सुनीत मदान, सी-डैक, मोहाली, ने शिक्षण पद्धतियों को बेहतर बनाने में एआर, वीआर और मिक्स्ड रियलिटी की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि मिस विभूति, आईसीएमआर, ने मल्टीमीडिया और इंटरैक्टिव कंटेंट बनाने की तकनीकों का प्रदर्शन किया। प्रो. पमिल अरोड़ा, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, घरुआं, ने मल्टीमीडिया कंटेंट में एनीमेशन टूल्स के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. अमित कुमार, एनवीएस, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, ने एमओओसी में एआई के उपयोग से व्यक्तिगत शिक्षा के बारे में अपने विचार साझा किए और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) इंटीग्रेशन पर एक प्रैक्टिकल सेशन आयोजित किया। डॉ. सुनील दत्त, पूर्व प्रोफेसर, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़, ने स्व-गति वाले लर्निंग कोर्स डिजाइन करने की रणनीतियों पर चर्चा की, और प्रो.अनिल रोज, सीसीईटी, चंडीगढ़, ने रिसर्च मेथोडोलॉजी के बेसिक्स और टूल्स पर प्रकाश डाला।
डॉ. पी.के. तुलसी, पूर्व प्रोफेसर, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़, ने नवीन शिक्षण तकनीकों पर जोर दिया और शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण के लिए नई विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. सतबीर सिंह, एनआईटी, जालंधर, ने एआई और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण रणनीतियों का अन्वेषण किया।
डॉ. रुचि सिंगला, सीजीसी, लांडरां, ने एंटरप्रेंयूर्शिप और स्किल डेवलपमेंट पर चर्चा की। डॉ. बलविंदर राज, एनआईटी, जालंधर, ने आधुनिक शिक्षा में डिजिटल लाइब्रेरी और प्लेटफॉर्म की भूमिका पर प्रकाश डाला, और श्री तनवीर सिंह ने एक बार फिर से एआई टूल्स का उपयोग करके दस्तावेज़ीकरण पर एक व्यावहारिक सत्र का नेतृत्व किया।
डॉ. शशि बाला, सीजीसी, लांडरां, ने रिसर्च पेपर्स लिखने और प्रकाशित करने के बारीकियों को समझाया, जबकि डॉ. गोपाल नायर, ऑकलैंड विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड, ने शिक्षकों और छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर चर्चा की। अंतिम दिन, डॉ. मीनाक्षी सूद, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़, ने करिकुलम डिजाइन विधियों पर एक सत्र का नेतृत्व किया, जिसके बाद फीडबैक सत्र और प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया।
एफडीपी ने प्रतिभागियों को डिजिटल टीचिंग स्किल में सक्षम बनाया, जिसमें एआई टूल्स, एमओओसी, एआर/वीआर और इंटरएक्टिव कंटेंट निर्माण में प्रवीणता शामिल थी। कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र और सीजीसी लांडरां के आयोजकों द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।