5 Dariya News

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में 7वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (एफआईएएम -2024) शुरू

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बठिंडा 13-Nov-2024

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में गणित और सांख्यिकी विभाग द्वारा कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के संरक्षण में “औद्योगिक और अनुप्रयुक्त गणित में सीमाएँ” विषयक 7वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (एफआईएएम-2024) का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। 13 से 14 नवंबर 2024 तक चलने वाले दो दिवसीय सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा औद्योगिक और व्यावहारिक गणित को आगे बढ़ाने तथा क्षेत्र के समकालीन चुनौतियों एवं संभावनाओं पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत माननीय कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी द्वारा पोधों में जल अर्पण करने के साथ हुई। उद्घाटन सत्र में जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के कुलपति प्रोफेसर एस.के. तोमर मुख्य अतिथि के रूप में, जबकि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से प्रो. एम.एम. त्रिपाठी, एनईएचयू के  गणित विभागाध्यक्ष डॉ. ए.एम. बुहफांग, और एफआईएएम के अध्यक्ष प्रोफेसर कमल राज परदासानी सम्मानित अतिथियों के रूप में सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. एस.के. तोमर ने विभिन्न विषयों में गणित की भूमिका पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए जीव विज्ञान, भौतिकी और चिकित्सा में इसके अनुप्रयोगों पर चर्चा की। उन्होंने गणितीय अवधारणाओं की प्रस्तुति में सुधार हेतु शिक्षण पद्धतियों में विकास की वकालत की।

वहीं प्रो एम.एम. त्रिपाठी ने गणित के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह न केवल वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देता है बल्कि इसके सार्वभौमिक मूल्य सांस्कृतिक ज्ञान को भी समृद्ध करते है। डॉ. ए.एम. बुहफांग ने आभासी पटल पर वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए गणितीय अनुसंधान और शिक्षा को बढ़ावा देने तथा ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने वाले इस तरह के कार्यक्रमों की मेहता को रेखांकित किया।

एफआईएएम के अध्यक्ष प्रोफेसर कमल राज परदासानी ने गणित के माध्यम से वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को औद्योगिक अनुप्रयोगों से जोड़ने तथा प्रतिभागियों को उद्योग और आर्थिक विकास के लिए व्यावहारिक प्रासंगिकता वाली परियोजनाएं शुरू करने पर जोर दिया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी ने इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और वित्त जैसे क्षेत्रों में जटिल वास्तविक समस्याओं को हल करने में औद्योगिक और अनुप्रयुक्त गणित के महत्व को रेखांकित किया। 

उन्होंने बताया कि गणितीय मॉडल तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहित करते हैं, लेकिन डेटा की गुणवत्ता, मापनीयता और गणनात्मक दक्षता जैसे क्षेत्रों में कुछ महत्वपूर्ण सीमाओं का सामना कर रहे हैं। कुलपति ने इन सीमाओं को पार करने और गणितीय अनुप्रयोगों के व्यावहारिक प्रभाव को अधिकतम करने के लिए बहु-विषयी सहयोग और नवाचार की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में गणित और सांख्यिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सचिन कुमार ने सम्मेलन के विषय का विवरण साझा किया और बताया कि इस सम्मेलन में कि देश भर से 147 छात्रों ने पंजीकरण कराया है। अंत में प्रोफेसर गौरी शंकर ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन दिया।

सम्मेलन में पांच पूर्ण सत्र और चार तकनीकी सत्र शामिल हैं जहां विशेषज्ञ चर्चा करेंगे कि कैसे गणितीय प्रगति इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में प्रगति को आगे बढ़ाती है। एफआईएएम -2024 में उभरते शोधकर्ताओं और छात्रों के पेपर प्रेजेंटेशन भी शामिल होंगे, जो उन्हें अपना काम प्रस्तुत करने और अग्रणी गणितज्ञों और उद्योग के पेशेवरों से अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।