डॉ. एस.पी सिंह ओबेरॉय के प्रयासों से कपूरथला के 33 वर्षीय युवक जगबीर सिंह का पार्थिव शव दुबई से भारत पहुंचा
बजुर्ग माता पिता का इकलौता सहारा था जगबीर सिंह
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अमृतसर 13-Sep-2024
जरूरतमंदों के मसीहा के तौर पर जाने जाते दुबई के प्रसिद्ध कारोबारी और सरबत का भला चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख डॉ. एस.पी सिंह ओबेरॉय के प्रयासों से आज कपूरथला जिले के कस्बा सिधवा दोना के निकटवर्ती गांव थिगली के साथ संबंधित 33 वर्षीय जगबीर सिंह पुत्र बलकार सिंह का पार्थिव शव दुबई से श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अमृतसर पर पहुंचा। इस संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. एसपी सिंह ओबेरॉय ने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता का इकलौता सहारा जगबीर सिंह जिसने अभी तक शादी भी नहीं करवाई थी, वह भी अन्य युवाओं की तरह अपने अच्छे भविष्य के सपने लेकर करीब 5 वर्ष पहले दुबई आया था कि गत 1 अगस्त को अचानक दिमाग की नाड़ी फट जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
डॉ. ओबेरॉय ने बताया कि इस केस की जानकारी मिलने के बाद उनकी टीम द्वारा जगबीर सिंह का पार्थिव शव भारत भेजने के लिए जरूरी कार्रवाई भारती दूतावास के सहयोग से पूरी की गई, जबकि उसके पार्थिव शव को भारत भेजने के लिए आया खर्च उसकी काम करने वाली कंपनी भवानीगढ़ ट्रांसपोर्ट के मालिक जितेंद्रपाल सिंह और मनजीत सिंह द्वारा किया गया।
डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि जगबीर सिंह के बुजुर्ग माता-पिता के अलावा उनके द्वारा कुछ दिन पहले कस्बा अजनाला के गांव मद्दुछांगा के युवक बिक्रमजीत सिंह और मजीठा के गांव शाम नगर के युवक पलविंदर सिंह जिनके पार्थिव शव दुबई से परिजनों तक पहुंच गए थे, उनके परिवारों को भी ट्रस्ट की तरफ से 2000-2000 रुपये मासिक पेंशन शुरू कर दी गई है। परिजनों के साथ हवाई अड्डे पर संवेदना व्यक्त करने पहुंची ट्रस्ट की अमृतसर टीम के अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह हेर, माझा जोन के सलाहकार सुखदीप सिद्धू, अध्यक्ष शिशुपाल सिंह लाडी, महासचिव मनप्रीत सिंह संधू चमियारी, कोषाध्यक्ष नवजीत घई और परमिंदर सिंह संधू ने बताया कि डॉ. ओबेरॉय के प्रयासों से अब तक 372 के करीब बदनसीब लोगों के पार्थिव शव उनके परिजनों तक पहुंचाए जा चुके हैं।
इस दौरान हवाई अड्डे पर मृतक का पार्थिव शव लेने पहुंचे जगबीर सिंह के पिता बलकार सिंह, भाई हरपाल सिंह, नवजीत सिंह, जीजा सुखजिंदर सिंह और उसके दोस्त अमनदीप सिंह ने एसपी सिंह ओबरॉय का इस बड़े प्रयास के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों की बदौलत ही उनके परिवार को जगबीर सिंह के अंतिम दर्शन नसीब हुए हैं और परिवार की आर्थिक मदद के लिए पेंशन की सहूलत दी गई है।