5 Dariya News

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में "विदेशी मीडिया में भारत के कवरेज का आकलन" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

भारत की क्षमताओं को पहचानते हुए भी विदेशी मीडिया हमारी नकारात्मक छवि पेश करता है - आचार्य बी.के. कुठियाला, पूर्व कुलपति, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय

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बठिंडा 18-Nov-2023

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में "विदेशी मीडिया में भारत की कवरेज का आकलन" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुक्रवार को समापन सत्र के साथ संपन्न हुई। इस कार्यक्रम में मीडिया हस्तियों, प्रख्यात शिक्षाविदों , शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की तथा संगोष्ठी के विभिन्न उप-विषयों पर विचार-विमर्श किया, जिसमें पूर्वाग्रहों को समझने और जवाबी रणनीति तैयार करने के लिए विदेशी मीडिया में भारत के कवरेज के आकलन के महत्व पर बल दिया गया।

समापन सत्र की शुरुआत डीन इंचार्ज अकादमिक आचार्य आर.के. वूसीरिका के स्वागत भाषण से हुई। तदुपरांत संगोष्ठी संयोजक डॉ. रूबल कनोजिया ने एक संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए साझा किया कि इस राष्ट्रीय सेमिनार में आयोजित तीन तकनीकी सत्रों में शिक्षकों और शोधार्थियों द्वारा 29 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। चर्चाओं में पश्चिमी मीडिया सामग्री के अधिक प्रभाव के पीछे प्राथमिक कारक पर प्रकाश डाला गया, जिसका श्रेय हमारे देश के नागरिकों द्वारा पश्चिमी मीडिया समाचार सामग्री पर उच्च इंटरैक्शन दर को दिया गया। यह घटना सोशल और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखी जा सकती है। 

इस से पश्चिमी मीडिया घरानों को भारत को नकारात्मक रूप से चित्रित करने के अपने प्रचार को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन मिला है। समापन सत्र में कुशाभाऊ ठाकरे राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति आचार्य बलदेव भाई शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में सम्मिलित हुए। अपने उद्बोधन में उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इतिहास में हमारे महानतम सामाजिक विचारकों, सुधारकों और संतों ने हमें भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों में निहित मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए मार्गदर्शन दिया है। 

इसके बावजूद भी समाज मे पश्चिमी विचारों को श्रेष्ठ और मानकीकृत मानने की प्रवृत्ति मौजूद है, भले ही वे आत्म-केंद्रित हों। प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा ने इस बात पर बल दिया कि पश्चिमी विचारधाराओं के प्रति यह प्राथमिकता ही पश्चिमी मीडिया को भारत की नकारात्मक छवि चित्रित करके अपना वर्चस्व कायम रखने का बल प्रदान करती है। आचार्य शर्मा ने पत्रकारों से भारतीय पत्रकारिता के मूल भाव को समझते हुए केवल प्रामाणिक जानकारी साझा करने, भारतीय समाज की समावेशी विकास की सोच को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय अखंडता को मजबूत करने में योगदान देने का आग्रह किया।

इस कार्यक्रम में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के पूर्व कुलपति और हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद, हरियाणा के पूर्व अध्यक्ष आचार्य बी.के. कुठियाला मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। उन्होंने एक लीक से हटकर विषय चुनने के लिए आयोजकों की सराहना की। उन्होंने मीडिया प्लेटफार्मों से परे संचार के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि विदेशी मीडिया द्वारा भारत की नकारात्मक छवि पेश करने के लगातार प्रयासों के बावजूद भी पश्चिमी बुद्धिजीवी अपनी अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रवासियों के अहम योगदान को पहचानते हैं। 

इसके साथ ही पिछले कुछ दशकों में हमारे देश में हुई प्रगति ने अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं को भी भारत की इस दशक के अंत तक एक वैश्विक सॉफ्ट पावर बनने की संभावनाओं पर लिखने के लिए प्रेरित किया है। आचार्य बी.के. कुठियाला ने जोर देकर कहा कि भारतीय मीडिया पेशेवरों को उपनिषदों के माध्यम से संवाद के विज्ञान को समझना चाहिए और सत्यता, निष्पक्षता तथा संचार के सिद्धांतों को अपनाते हुए वैश्विक मंच पर अपनी विश्वसनीयता बढ़ानी चाहिए। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि हमारे प्राचीन ग्रंथ गहन ज्ञान के भंडार हैं, जो लगातार हमें एक प्रकृति केन्द्रित जीवन शैली और आध्यात्मिक सशक्तिकरण की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। 

हालाँकि, हमारे मन मस्तिष्क में पश्चिमीकरण के कारण हम यह जानने में असमर्थ हो गए हैं कि जिन मानव केन्द्रित एवं अभिनवजनित प्रतीत होने वाले विचारों के सृजन का श्रेय अक्सर पश्चिम को दिया जाता है, वास्तव में उनकी संकल्पना प्राचीन भारतीय सभ्यता के दौरान हमारे पूर्वजों द्वारा की गई थी। परिणामस्वरूप, हमारे लिए अपनी भारतीय संस्कृति की ओर लौटना अनिवार्य है। भारतीय पत्रकार हमारी सनातन संस्कृति में निहित सर्व-समावेशी प्रकृति केंद्रित विकास विमर्श को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 

इस भारतीय दृष्टिकोण को आत्मसात करते हुए ही हम विदेशी मीडिया द्वारा स्थापित पश्चिमी सभ्यता केंद्रित पूर्वाग्रहों का प्रतिकार कर सकते है। कार्यक्रम के अंत में स्कूल ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन स्टडीज के डीन डॉ. भव नाथ पांडे ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. कुलभूषण शर्मा ने किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के शिक्षक, अनुसंधान विद्वान और छात्र शामिल हुए।