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कैबिनेट समिति ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-2-अंतर-राज्य ट्रांसमिशन सिस्टम परियोजना को मंजूरी दी

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श्रीनगर 20-Oct-2023

माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने लद्दाख में 13 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना हेतु 18 अक्टूबर को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-2-अंतर-राज्य ट्रांसमिशन सिस्टम परियोजना को मंजूरी दे दी। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए लेह-अलुस्टेंग-श्रीनगर लाइन से भी जुड़ी होगी।

मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि 13 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना से देश के अन्य हिस्सों के अलावा जम्मू-कश्मीर को भी काफी फायदा होगा।उन्होंने कहा कि यूटी प्रशासन लोगों को निर्बाध और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है। यह प्रतिष्ठित परियोजना चैबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।

परियोजना मौजूदा 220 केवी लेह-अलुस्टेंग-श्रीनगर ट्रांसमिशन सिस्टम के माध्यम से घाटी को बिजली का एक वैकल्पिक स्रोत प्रदान करेगी, जिससे हाइड्रो ऊर्जा उत्पादन पर निर्भरता कम हो जाएगी, जो सर्दियों के दौरान कम हो जाती है।उन्होंने कहा कि लद्दाख से कश्मीर तक बिजली हस्तांतरण से जम्मू क्षेत्र में भी बिजली की स्थिति में सुधार होगा क्योंकि मौजूदा केंद्रीय क्षेत्र ग्रिड अर्थात् जम्मू में स्थित 400 केवी किशनपुर और जेटवाल ग्रिड से कश्मीर में बिजली हस्तांतरण आनुपातिक रूप से कम हो जाएगा। इस कटौती से इन ग्रिडों की बंधी हुई क्षमता मुक्त हो जाएगी, जिससे वर्ष के दौरान जम्मू में उपलब्धता में सुधार होगा।

बिजली निकालने के लिए ट्रांसमिशन लाइन हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होते हुए हरियाणा के कैथल तक चलेगी, जो राष्ट्रीय ग्रिड के साथ एकीकृत होगी और लद्दाख के मौजूदा ग्रिड और कश्मीर के गांदरबल जिले में 220 केवी अलुस्टेंग ग्रिड से लेह-अलस्टेंग-श्रीनगर लाइन के माध्यम से इंटरकनेक्शन करेगी, ताकि जम्मू और कश्मीर के लिए बिजली प्रदान की जा सके।कश्मीर के गांदरबल जिले में 220केवी अलुस्टेंग ग्रिड को 220केवी जैनकोट ग्रिड से जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त, 220केवी मीरबाजार ग्रिड को अलस्टेंग ग्रिड से जोड़ने वाली आगामी कनेक्टिविटी है जिसके शीघ्र ही पूरा होने की उम्मीद है। 

कश्मीर के 220केवी ग्रिड के साथ लद्दाख में आरई उत्पादन की प्रस्तावित कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए, यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि लद्दाख से बिजली हस्तांतरण का पूरी कश्मीर घाटी पर, खासकर बिजली की कमी वाले सर्दियों के महीनों के दौरान सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे साल भर बिजली की उपलब्धता में सुधार होगा, उक्त 13 गीगावॉट आरई परियोजनाएं 12 गीगावॉट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से सुसज्जित हैं जो लद्दाख और कश्मीर के बीच बिछाई गई ट्रांसमिशन प्रणाली की क्षमता के आधार पर जम्मू-कश्मीर को चैबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।

कश्मीर इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के अंतिम छोर पर स्थित है, जिसके माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित विभिन्न थर्मल/परमाणु जनरेटर से बिजली कश्मीर क्षेत्र में प्रसारित की जाती है। कश्मीर के पास स्थित उक्त बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा जनरेटर से बिजली की आपूर्ति, जल विद्युत उत्पादन में कमी के कारण घाटी में सर्दियों के दौरान अनुभव होने वाली कम वोल्टेज की स्थिति को कम कर देगी।

लद्दाख क्षेत्र में आरई परियोजनाएं कम कार्बन फुट प्रिंट के साथ हरित ऊर्जा प्रदान करेंगी और कश्मीर-लद्दाख क्षेत्रों के नाजुक पर्यावरण की रक्षा करने में मदद करेंगी।इसके अलावा, मौजूदा 200केवी लेह-अलुस्टेंग-श्रीनगर लाइन के माध्यम से आरई पावर की उपलब्धता घाटी में ट्रांसमिशन सिस्टम में अतिरेक पैदा करेगी और आपदाओं के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद करेगी। 

जम्मू-कश्मीर ने लद्दाख से कश्मीर तक नई 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का प्रस्ताव दिया है, जो 400 केवी किशनपुर-वगूरा और सांबा (जेटवाल)-अमरगढ़ ट्रांसमिशन लाइनों के अलावा घाटी के लिए 400 केवी स्तर पर तीसरा स्रोत होगा। नई 400 केवी लाइन घाटी में बिजली की बहुत जरूरी अतिरेकता प्रदान करेगी और भविष्य में लोड वृद्धि को पूरा करेगी जो औद्योगीकरण के बाद स्पष्ट है। 

आवश्यकता और व्यवहार्यता के अनुसार, जम्मू-कश्मीर उक्त आरई परियोजनाओं से अधिक बिजली खींचने के लिए अतिरिक्त ट्रांसमिशन लाइनें स्थापित करने की योजना बना सकता है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपराज्यपाल ने यूटी प्रशासन की शीतकालीन तैयारियों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रशासन सर्दियों के दौरान बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रहा है।बर्फ हटाने के उपकरणों और मशीनों के मामले में हम बेहतर स्थिति में हैं। राशन, दवा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

13 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्यः

लद्दाख में बहुत अधिक सौर सूर्यातप है, और इसलिए यह गीगावाट पैमाने की सौर उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिए एक उपयुक्त स्थल है। माननीय प्रधान मंत्री ने 15.08.2020 को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान, लद्दाख में 7.5 गीगावॉट सौर पार्क स्थापित करने की घोषणा की। व्यापक क्षेत्र सर्वेक्षण के बाद, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने लद्दाख में 12 गीगावॉट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के साथ 13 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता (9 गीगावॉट सौर और 4 गीगावॉट पवन) स्थापित करने की योजना तैयार की है।  

बिजली की इस विशाल मात्रा को निकालने के लिए, अंतर-राज्यीय पारेषण बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। लद्दाख में जटिल भूभाग और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए, परियोजना के तहत अत्याधुनिक वोल्टेज सोर्स कन्वर्टर आधारित हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट सिस्टम और एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज अल्टरनेटिंग करंट सिस्टम तैनात किए जाएंगे।

यह परियोजना वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से 500 गीगावॉट स्थापित बिजली क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगी। परियोजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा विकसित करने और कार्बन पदचिह्न को कम करके पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने में भी मदद करेगी। यह क्षेत्र में बिजली और अन्य संबंधित क्षेत्रों में कुशल और अकुशल दोनों कर्मियों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगा।

लद्दाख में 13 गीगावॉट आरई परियोजना के लिए अंतर-राज्य ट्रांसमिशन सिस्टम जीईसी चरण-2ः

इस बिजली को निकालने के लिए ट्रांसमिशन लाइन हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होकर हरियाणा के कैथल तक जाएगी, जहां इसे राष्ट्रीय ग्रिड के साथ एकीकृत किया जाएगा। लेह में इस परियोजना से मौजूदा लद्दाख ग्रिड तक एक इंटरकनेक्शन की भी योजना बनाई गई है ताकि लद्दाख को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसे जम्मू-कश्मीर को बिजली प्रदान करने के लिए लेह-अलुस्टेंग-श्रीनगर लाइन से भी जोड़ा जाएगा।

जटिल भूभाग और रक्षा संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के पावरग्रिड को इस परियोजना के लिए कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। निर्माण के दौरान ब्याज को छोड़कर, अंतर-राज्य ट्रांसमिशन सिस्टम ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-2 की कुल अनुमानित लागत 20,773.70 करोड़ है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और लागत अनुमान पावरग्रिड द्वारा तैयार किया गया है।

इस परियोजना में 713 किमी, या 1268 सर्किट किलोमीटर (सीकेएम), ट्रांसमिशन लाइनें और 2 गुना 5000 मेगावाट क्षमता के हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट टर्मिनलों (एक पंग लद्दाख और एक कैथल हरियाणा में) की स्थापना शामिल होगी।यह परियोजना ऊंचाई और अत्यधिक जलवायु परिस्थितियों जैसे कठिन पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरेगी। 

क्षेत्र के उप-शून्य तापमान का मुकाबला करने के लिए, टावरों में और उससे जुड़े सहायक उपकरणों में एक विशेष प्रकार के स्टील का उपयोग करना होगा। ट्रांसमिशन प्रणाली हिमस्खलन क्षेत्रों से भी गुजरेगी और इस प्रकार, ऐसी स्थलाकृति में दुनिया में अपनी तरह की पहली प्रणाली स्थापित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

13 गीगावॉट आरई क्षमता 9 गीगावॉट सौर और 4 गीगावॉट पवन का संयोजन होगी। इस क्षमता को 12 गीगावॉट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के साथ जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसके परिणामस्वरूप प्रति वर्ष 33,630 मिलियन यूनिट तक चैबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति होगी। प्रस्तावित ट्रांसमिशन 5 गीगावॉट क्षमता का है, जो उपरोक्त बिजली संचारित करने के लिए पर्याप्त होगा और इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि उत्पादन पक्ष पर बीईएसएस के एकीकरण पर लाइन की क्षमता का उपयोग 76 प्रतिषत होगा।

पावरग्रिड अपना फीड अध्ययन दिसंबर, 2024 तक पूरा कर लेगा और उसके बाद मार्च 2025 तक अनुबंध सौंप देगा। परियोजना काम सौंपे जाने के 5 साल में पूरी हो जाएगी। तदनुसार, परियोजना की समयसीमा 7 वर्ष अर्थात वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2029-30 तक प्रस्तावित है।

वित्तीय निहितार्थः

इस परियोजना को वित्त वर्ष 2029-30 तक स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 20,773.70 करोड़ रुपये और केंद्रीय वित्तीय सहायता परियोजना लागत का 40 प्रतिशत यानी 8,309.48 करोड़ रुपये है।

40 प्रतिषत अनुदान समर्थन के साथ, स्तरीय ट्रांसमिशन टैरिफ 0.88 प्रति यूनिट से घटकर 0.55 प्रति यूनिट बिजली हो जाएगा।