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मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता ने एसबीएम के तहत गांवों को मॉडल श्रेणी घोषित करने से पहले गुणवत्ता जांच करने की समीक्षा की

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श्रीनगर 11-Aug-2023

स्वतंत्रता दिवस नजदीक आने के अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता ने उन जिलों की समीक्षा की, जो स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत अपने गांवों को ‘मॉडल श्रेणी‘ घोषित करने में पीछे थे। सरकार योजना के निर्धारित मापदंडों के अनुसार 15 अगस्त तक पूरे यूटी को ओडीएफ़ घोषित करने की इच्छुक है और अब तक 96 प्रतिषत से अधिक की प्रगति दर्ज करने में सफल रही है और शेष गांवों को स्वतंत्रता दिवस से पहले कवर किया जाएगा।

बैठक में आयुक्त सचिव आरडीडी, बारामूला, कुपवाड़ा, किश्तवाड़, रियासी के उपायुक्तों के अलावा निदेशक, ग्रामीण स्वच्छता और विभाग के अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर, डॉ. मेहता ने अधिकारियों को एसबीएम-जी के तहत गांवों को मॉडल श्रेणी व्क्थ़् घोषित करने से पहले ‘गुणवत्ता जांच‘ का अभ्यास करने का निर्देश दिया।

उन्होंने किसी भी गांव को व्क्थ़् श्रेणी घोषित करने के लिए संबंधित ‘प्रभारी अधिकारियों‘ और स्थानीय सरपंचों की सिफारिशें लेने का आह्वान किया। उन्होंने उनसे कहा कि इस घोषणा को करने से पहले इस अभ्यास के लिए अनिवार्य सभी आवश्यक सुविधाएं जैसे कचरे का संग्रह, तरल कचरे का उपचार, पुराने कचरे को हटाना, पृथक्करण शेड की उपलब्धता के अलावा आसपास की दृश्य सफाई की जांच की जानी चाहिए।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि स्वच्छता एक दिन का मामला नहीं है, बल्कि लोगों के दृष्टिकोण में स्थायी बदलाव की मांग करता है। उन्होंने कहा कि लोगों को स्वच्छता की मांग करनी चाहिए और सर्दियों के महीनों में भी प्रयासों में कमी नहीं आनी चाहिए। डॉ. मेहता ने इसे कम समय में पूरा करने के लिए ग्रामीण स्वच्छता विभाग की भूमिका की सराहना की। 

उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा लगता था कि इस कठिन कार्य को इस समय सीमा में हासिल करना मुश्किल है, लेकिन सामूहिक प्रयासों से यह संभव हो पाया है, जो काफी सराहनीय है। उन्होंने उनसे कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर इन संबंधित पंचायतों में ‘स्वच्छता रैलियां‘ निकालकर लोगों को जागरूक करें और इन रैलियों में युवाओं और महिलाओं को भी शामिल करें।

इस अवसर पर आरडीडी की आयुक्त सचिव मनदीप कौर ने कहा कि विभाग प्रत्येक गांव में इस अभियान को जारी रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इनमें से प्रत्येक गांव में घरेलू शौचालयों और सोख्ता गड्ढों/कंपोजिट गड्ढों के अलावा प्रतिदिन कचरे का संग्रहण शुरू कर दिया गया है। प्रभावी क्रियान्वयन से प्रत्येक गांव की स्वच्छता अब दूर का सपना नहीं है।

अपनी प्रस्तुति में, निदेशक, ग्रामीण स्वच्छता, चरणदीप सिंह ने बैठक में बताया कि 96 प्रतिषत से अधिक प्रतिशत के साथ जम्मू-कश्मीर वर्तमान में ओडीएफ मॉडल रैंकिंग में देश के शीर्ष तीन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से एक है। उन्होंने बताया कि 6650 गांवों में से 6399 गांवों ने पहले ही मॉडल श्रेणी का दर्जा हासिल कर लिया है और बाकी इस महीने की 15 तारीख से पहले यह दर्जा हासिल कर लेंगे।