एक नहीं 5 तरह का होता है मलेरिया बुखार.. हो जाए तो भूलकर भी ना खाएं ये 4 चीजें, वरना खेल खत्म
5 Dariya News
27-May-2022
गर्मी बढ़ रही है और मॉनसून भी आने वाला है। ऐसे मौसम में मच्छरों की तादाद हजार गुना बढ़ जाती है। और ये मच्छरों की वजह से मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का कहर बढ़ जाता है। ये बीमारियां ऐसी होती हैं जो मरीज के शरीर को दर्द से तोड़कर रख देती हैं। डेंगू, चिकनगुनिया से ज्यादा अब मलेरिया का खतरा बढ़ता जा रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि बहुत कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि मलेरिया एक नहीं बल्कि 5 तरह का होता है। आपको ये बात दें कि मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या आज भी लाखों में है। इस बीमारी को बिलकुल भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। आइए जानते हैं मलेरिया के बारे में-
क्या है मलेरिया-
मलेरिया बुखार मच्छरों से होने वाला एक तरह का संक्रामक रोग है। जो मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है। इस मादा मच्छर में एक खास प्रकार का जीवाणु पाया जाता है जिसे डॉक्टरी भाषा में प्लाज्मोडियम नाम से जाना जाता है। मलेरिया फैलाने वाली इस मादा मच्छर में जीवाणु की 5 प्रजातियां होती हैं। इस मच्छर के काटते ही व्यक्ति के शरीर में प्लाज्मोडियम नामक जीवाणु प्रवेश कर जाता है। जिसके बाद वह मरीज के शरीर में पहुंचकर अपनी संख्या को हजरों गुना बढ़ा देता है। यह जीवाणु लिवर और रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करके व्यक्ति को बीमार बना देता है। इतना बीमार कि यदि समय पर इलाज न मिले तो मरीज की मौत भी हो सकती है।
ये हैं 5 प्रकार के मलेरिया-
प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम -इस रोग से पीड़ित व्यक्ति एकदम बेसुध हो जाता है। उसे पता ही नहीं होता कि वो बेहोशी में क्या बोल रहा है। रोगी को बहुत ठंड लगने के साथ उसके सिर में भी दर्द बना रहता है। लगातार उल्टियां होने से इस बुखार में व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
सोडियम विवैक्स- ज्यादातर लोग इस तरह के मलेरिया बुखार से पीड़ित होते हैं। विवैक्स परजीवी ज्यादातर दिन के समय काटता है। यह मच्छर बिनाइन टर्शियन मलेरिया पैदा करता है जो हर तीसरे दिन यानी 48 घंटों के बाद अपना असर दिखाना शुरू करता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को कमर दर्द, सिर दर्द, हाथों में दर्द, पैरों में दर्द, भूख ना लगने के साथ तेज बुखार भी बना रहता है।
प्लाज्मोडियम ओवेल मलेरिया- इस तरह का मलेरिया बिनाइन टर्शियन मलेरिया उत्पन्न करता है। प्लास्मोडियम मलेरिया एक प्रकार का प्रोटोजोआ है, जो बेनाइन मलेरिया के लिए जिम्मेदार होता है। हालांकि यह मलेरिया उतना खतरनाक नहीं होता जितना प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम या प्लास्मोडियम विवैक्स होते हैं। इस रोग में क्वार्टन मलेरिया उत्पन्न होता है, जिसमें मरीज को हर चौथे दिन बुखार आ जाता है। इसके अलावा रोगी के यूरिन से प्रोटीन निकलने लगते हैं। जिसकी वजह से शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है और शरीर सूजने लगता है।
प्लास्मोडियम नोलेसी- यह दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक प्राइमेट मलेरिया परजीवी है। इस मलेरिया से पीड़ित रोगी को ठंड लगने के साथ बुखार बना रहता है। बात अगर इसके लक्षण की करें तो रोगी को सिर दर्द, भूख ना लगना जैसी परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।
मलेरिया के प्रमुख लक्षण-
- ठंड लगना
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- गले में खराश
- पसीना आना
- थकान
- बैचेनी होना
- उल्टी आना
मलेरिया का इलाज-
मलेरिया के इलाज में ऐंटिमलेरियल ड्रग्स और लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवाएं, बुखार को नियंत्रित करने के लिए दवाएं, ऐंटिसीजर दवाएं और इलेक्ट्रोलाइट्स शामिल है। मलेरिया के इलाज के लिए उपलब्ध दवाओं में क्विनीन, मेफ्लोक्विन और डॉक्सीसाइक्लिन शामिल हैं।
भारत सबसे आगे-
WHO अनुमानों के मुताबिक 2016 तक मलेरिया के 21 करोड़ मामले सामने आए और इससे 42,000 मौतें हुईं। 2015 में 91 देशों और क्षेत्रों में मलेरिया ट्रांसमिशन हो रहा था। WHO के मुताबिक दक्षिण पूर्व एशिया में कुल मलेरिया के मामलों में से 77% मामले भारत में हैं। यह रोग मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, गोवा, दक्षिणी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में फैलता है। दूसरों की तुलना में कुछ जनसंख्या समूह पर मलेरिया का खतरा अधिक रहता है। इसमें नवजात शिशु, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चें, गर्भवती महिलायें और एचआईवी और एड्स के मरीज शामिल है।
मलेरिया के घरेलू उपचार
- गिलोय मलेरिया और डेंगू के इलाज के लिए अमृत मानी जाती है।
- मलेरिया में विटामिन सी और बहुत सारे पौषक तत्वों से भरपूर अमरूद का सेवन करना भी फायदेमंद होता है।
- तुलसी के पत्ते (8-10) और 7-8 काली मिर्च को पीसकर शहद के साथ सुबह-शाम लेने से बुखार में कमी आती है।
मलेरिया हो जाए तो ये चीजें बिलकुल ना खाएं-
- ठंडा पानी बिल्कुल न पीएं और ना ही ठंडे पानी से नहाएं।
- रोगी को आम, अनार, लीची, अनन्नास, संतरा या खट्टे फलों का सेवन नहीं करना चाहिए।
- दही, शिकंजी, गाजर, मूली जैसी ठंडी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।
- मिर्च-मसाले या अम्ल रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
- बाहर का तला-भुना या ज्यादा मसालेदार खाने से सख्त परहेज करें।