Satyajit Ray Birth Anniversary: भारत के वो डॉयरेक्टर जिनके पास खुद चलकर आया ऑसकर,देखिये इनाम से सम्मानित इनकी ये फिल्में
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मुंबई 02-May-2022
सत्यजीत राय इंडियन सिनेमा के लिए वो चेहरा थे जिन्होंने इंडियन सिनेमा का पूरा रुख ही बदल दिया इन्होने भारतीय लोगों के मनोरंजन के लिए कुल 37 फिल्में बनाई जिसमें से 32 फिम्लों को अलग-अलग पुरस्कार मिले जब भी भारतीय सिनेमा की बात आती है तो सबसे पहला नाम दादा साहब फाल्के का नाम आता है लेकिन दूसरा नाम इस इंडस्ट्री में सत्यजीत रे का आता है आज सत्यजीत रे की 101 वीं जयंती है इसलिएआज इस मौके पे हम उनके जीवन पर प्रकाश डालेंगे और कुछ दिलचस्प बाते शेयर करेंगें
सत्यजीत के करियर की शुरुआत
सत्यजीत राय का जन्म 2 मई 1921 को हुआ था यह एक फ़िल्म निर्देशक ही नहीं बल्कि एक महान लेखक, कलाकार, चित्रकार, गीतकार और कॉस्ट्यूम डिजाइनर भी थे। इन्होने फ़िल्मी दुनियां में अपने करियर की शुरुआत लंदन में करने की सोची थी लेकिन इन्होंने अपने करियर की शुरूआत साल 1943 में बतौर जूनियर विजुलाइजर से की थी।
भारतीय सिनेमा की पहचान
सत्यजीत राय ने भारतीय सिनेमा की पहचान को विदेश तक पहूँचाया इन्होने अपनी पहली फ़िल्म पाथेर पांचाली बनाई। उनकी इस फिल्म को कांस फिल्म फेस्टिवल में भी खूब सराहा गया। सत्यजीत रे ने ज्यादतर फिल्में बंगाली में ही बनाई। जिसके बाद सत्यजीत रे की अपू ट्रॉयोलॉजी, महानगर, चारूलता, आगंतुक, शतरंज के खिलाड़ी बहुत ही मशहूर फिल्में बनाई। इंडियन सिनेमा को इस तरह उभार के लाने में जो योगदान इन्होंने दिया है वो सच में सराहनीय है इनके इस सराहनीय काम के लिए पद्म श्री से लेकर भारत रत्न और आस्कर अवॉर्ड भी मिले।
कैसे आया ख़ुद ऑस्कर
साल 1992 में सत्यजीत राय को "ऑस्कर का ऑनरेरी अवॉर्ड फॉर लाइफटाइन अचीवमेंट" मिलने का ऐलान किया गया था लेकिन उस दौरान रे की तबियत खराब थी जिसकी वजह से वह उस अवॉर्ड फंक्शन्स में नहीं जा पाए ऐसे में ऑस्कर अधिकारियों ने फैसला किया कि यह अवार्ड उनके पास ख़ुद पहुंचाया जाए. ऑस्कर के पदाधिकारी ऑस्कर अवार्ड देने सत्यजीत रे के घर पहुंचे और उन्हें अवार्ड से सम्मानित किया। इसके बाद 23 अप्रैल को सत्यजीत रे इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह गए।अंत में सत्यजीत राय की आज इस 101 जयंती पर उन्हें याद करके उनकी आत्मा को शांति मिलने की प्राथना करते हैं।
English :Satyajit Ray, the master who introduced the Sonic-Sensibility to Indian Cinema