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पंजाब नई गैर रिवायती उर्जा नीति 2012 लागू करने के लिए तैयार-बिक्रम सिंह मजीठिया

प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह द्वारा'एनर्जी असैस व अंतराष्ट्रीय कांफ्रैस का उदघाटन

5 दरिया न्यूज

नई दिल्ली 09-Oct-2012

पंजाब सरकार द्वारा राज्य में रिवायती उर्जा साधनों पर निर्भरता घटाने के उदेश्य के साथ गैर रिवायती उर्जा साधनों की बढोतरी के लिए नई गैर रिवायती उर्जा नीति 2012 तैयार कर ली गई है,जोकि इस वर्ष के अंत तक लागू कर दी जाएगी। आज यहां नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एनर्जी असैस पर दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय सेमीनार जिसका उदघाटन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह द्वारा किया गया, के अवसर पर मिनिस्ट्रीयल सैंशन दौरान विचारविमर्श में भाग लेते मजीठिया ने कहा कि उर्जा किसी भी समाज की तरक्की के लिए एक सूत्र का कार्य करती है। सेमीनार की अध्यक्षता नई व नवीनीकरण उर्जा संबधी केन्द्रीय मंत्री डा. फारूख अब्दुला व केन्द्रीय बिजली मंत्री वीरप्पा मोइली ने की व इसमें तीस देशों के साथ साथ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों के भी भाग लिया। उन्होने कहा कि समय की मांग को ध्यान में रखते पंजाब सरकार के जहां रिवायती क्षेत्र में चार बडे थर्मल प्लांटों की स्थापना करके बडा निवेश किया है, वही गैर रिवायती उर्जा के क्षेत्र में बढोतरी के लिए  नई नीति तैयार कर ली है। 

उन्होने कहा कि पंजाब सरकार ने गैर रिवायती उर्जा क्षेत्रों से उर्जा उत्पादन अगले तीन वर्षो के दौरान दुगना करने का लक्ष्य रखा है,जिसके लिए 400 मैगावाट के प्रोजैक्टों के लिए बिड अगले महीने नंवबर दौरान की जा रही है। उन्होने कहा कि वर्तमान समय में पंजाब इस क्षेत्र में 515 मैगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है। उन्होने कहा कि नई नीति के अंतगर्त जहां गैर रिवायती उर्जा प्रोजैक्टों के लिए विशेष रिवायतों का ऐलान किया गया है,वहां पंजाब में पराली जलाने की समस्या के कारण वातावरण खराबी व किसानों की आमदन की बढोतरी के लिए बायोमास प्लांटों में नई तकनीक द्वारा 100 प्रतिशत पराली का प्रयोग शुरू किया जा रहा है, जिसके साथ न केवल वातावरण गंदा होने से बचेगा बल्कि किसानों को भी प्रति एकड 2000 से 2500 रूपये की अधिक आमदन होगी। उन्होने कहा कि राज्य में 27.8 लाख एकड में धान की खेती होती है जिससे 21 लाख मीट्रिक टन पराली व बचा हुआ समान जिसको किसानों द्वारा आग लगाने के साथ बडे स्तर पर प्रदूषण होता है उन्होने कहा कि इस समस्या के हल के लिए राज्य सरकार ने पराली के प्रयोग करने वाले बायोमास प्लांटों द्वारा उत्पादित की बिजली खरीदने के लिए देश में सबसे अधिक बिजली दरों की पेशकश की हैं उन्होने कहा कि बायोमास प्लांटों से तैयार होने वाली बिजली राज्य सरकार द्वारा 5.83 रूपये प्रति यूनिट खरीदी जाएगी जोकि देश अंदर सबसे ज्यादा है उन्होने कहा कि पडोसी राज्य हरियाणा द्वारा यह दर 5.65 रूपये ,आंध्राप्रदेश द्वारा 5.18 रूपये, महाराष्ट्र द्वारा 5.74 रूपये,राजस्थान द्वारा 5.16 रूपये, तमिलनाडू द्वारा 5.12 रूपये, उत्तरप्रदेश द्वारा 5.24 रूपये,उतराखंड द्वारा 5.42 प्रति यूनिट निर्धारित की गई है। 

मजीठिया ने कहा कि मिनी हाइडल प्रोजैक्टों,को-जनरैंशन,बायोमास प्लांटों, सौर उर्जा,पौण उर्जा प्रोजैक्टों आदि स्थापित करने के लिए नई नीति 2012 तहत इन प्रोजैक्टों के लिए जरूरी मशीनरी पर 100 प्रतिशत वैट छूट के अतिरिक्त कोई एंटरी टैक्स भी नही होगा। उन्होने कहा कि इसके अतिरिक्त इन प्रोजैक्टों के लिए प्रयोग की हुई जमीन संबधी कोई भी लैंड यूज़ चार्ज पर और कोई फीस नही लगेगी। उन्होने आगे कहा कि इन प्रोजैक्टों के निर्माण के दौरान प्रयोग की जाने वाली बिजली डियूटी पर 25 प्रतिशत छूट होगी व साथ ही 5 मैगावाट से कम समर्था वाले सौर उर्जा वाले प्रोजैक्टों के लिए पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से इतराजहीनता प्रमाण पत्र लेने  जरूरत नही होगी। मजीठिया ने इन प्रोजैक्टों की मंजूरी लेने के लिए पंजाब सरकार द्वारा सिंगल विंडो सिस्टम तैयार किया है, जिस द्वारा  अर्जी देने के अधिक से अधिक 60 दिन के भीतर संबधित विभाग प्रोजैक्ट को मंजूरी देगा। उन्होने आगे बताया कि गैर रिवायती उर्जा प्रोजैक्टों के लिए जरूरी सरकारी जमीन उपलब्ध हो तो वह 38 साल के अरसे के लिए लीज पर दी जाएगी व उसकी लीज डीड पर स्टैंप डियूटी  में 100 प्रतिशत छूट दी गई है। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार को देश में घरेलू जरूरतों के लिए सौर उर्जा द्वारा उत्पादित बिजली के प्रयोग के लिए विशेष नीति के अंतगर्त रिवायतों का ऐलान करना चाहिए,ताकि छोटी जरूरतों के लिए लोग स्वयं बिजली पैदा कर सकें।सेमीनार दौरान भाग ले रहे विदेशी प्रतिनिधियों को पंजाब में गैर रिवायती उर्जा के क्षेत्र में निवेश का निमंत्रण देते हुये उन्होने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा उनको हर संभव सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।