अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों का समाधान आपसी बातचीत, राजनयिक चर्चा और संवाद से होना चाहिए : ओम बिरला
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नई दिल्ली/ गुवाहाटी 09-Apr-2022
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है की भारत का यह अटल विश्वास है कि विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों का समाधान आपसी बातचीत, राजनयिक चर्चा और संवाद से होना चाहिए। गुवाहाटी में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की कार्यकारिणी की बैठक का उद्घाटन करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा की अंतर्राष्ट्रीय शांति और स्थिरता वैश्विक समृद्धि के लिए अनिवार्य है। उन्होने आगे कहा कि राष्ट्रमंडल देशों को मानवता के कल्याण के सामूहिक लक्ष्य के साथ काम करना चाहिए। राष्ट्रमंडल देशों की ताकत और क्षमता का जिक्र करते हुए बिरला ने कहा कि राष्ट्रमंडल देशों की लोकतांत्रिक संस्थाएं किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं और इन देशों को मानवता के कल्याण के सामूहिक लक्ष्य के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक रूप से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों में भारत की उपलब्धियां और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में नेतृत्व लक्ष्य के प्रति हमारे प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल कर लेगा। विविधता में एकता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि भाषाई, सांस्कृतिक, भौगोलिक और धार्मिक विविधताओं के बावजूद हम सभी एकजुट हैं। लोकतंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धिता का जिक्र करते हुए बिरला ने कहा कि भारत लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रबल समर्थक है।
लोकतंत्र हमारे विचारों और कार्यों में है और जीवन का एक तरीका बन गया है। आजादी का अमृत महोत्सव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी आजादी के इन 75 सालों में हमारा लोकतंत्र लगातार मजबूत हुआ है और समय के साथ लोकतंत्र पर हमारे लोगों का विश्वास बढ़ा है। पंचायत से संसद तक चुनाव कराने में भारत की सफलता पर प्रकाश डालते हुए, लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि 800 संसदीय सीटों, लगभग 4500 विधानसभा सीटों और 2.75 लाख पंचायतों के चुनाव कराने में हमारी ²ढ़ता और सफलता बताती है कि भारतीय लोकतंत्र कार्यात्मक, प्रगतिशील और सफल लोकतंत्र है। उन्होने कहा कि प्रधान मंत्री के नेतृत्व में भारत एक समृद्ध और विकसित देश के रूप में उभरा है। कार्यक्रम में बोलते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह असम के लिए एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि यह पहली बार भारत में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की मध्य वर्ष की कार्यकारी समिति की बैठक हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश के लोकतांत्रिक ढांचे में, असम विधान सभा, भारत की सबसे पुरानी विधानसभाओं में से एक है, जो उत्तर प्रदेश विधान सभा के बाद दूसरे स्थान पर है। सीपीए के कार्यवाहक अध्यक्ष इयान लिडेल-ग्रेंजर ने सी पी ए की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि गुवाहाटी में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान सार्थक चर्चा होगी और वैश्विक मुद्दों के समाधान के लिए रणनीतियों को खोजने में मदद मिलेगी। दरअसल, कोविड -19 की वजह से सीपीए कार्यकारी समिति की यह बैठक तीन साल बाद प्रत्यक्ष तौर पर गुवाहाटी में हो रही है, जिसमे राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया।