आईएमए चंडीगढ़ व् आईएसएआर के डॉक्टरों ने आई आर टी एक्ट व् राजस्थान में डॉ अर्चना शर्मा की आत्महत्या पर विरोध प्रदर्शन किया
5 Dariya News
चंड़ीगढ़ 01-Apr-2022
आई एम ए व आइसर के बैनर तले आई एम ए सेक्टर 35 में डॉ अर्चना शर्मा की आत्महत्या, व ए आर टी एक्ट के विरोध में प्रदर्शन किया स्टडी से पता चलता है कि भारत में प्रजनन आयु वर्ग में लगभग 30000 जोड़े एक निश्चित समय में बांझपन से पीड़ित हैं।पूरे भारत में लगभग 1800 आईवीएफ केंद्र और कई आईयूआई क्लीनिक हैं और उनकी सफलता दर अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर है, जबकि लागत सिर्फ वैश्विक शुल्क का 1/3 है। नतीजतन, मरीज भारत में बांझपन का इलाज कराने के लिए लोग विदेशों से भी आते हैं।भारत में केवल 1-2% आबादी ही इन सेवाओं का लाभ उठा सकती है क्योंकि अभी भी जागरूकता की कमी है और आईवीएफ के संबंध में लोगों में कई भ्रांतियां और आशंकाएं हैं।भारत सरकार ने नया एआरटी / सरोगेसी कानून तैयार किया है जो 25 जनवरी 2022 को लागू हुआ है ।हम एआरटी के लिए एक व्यापक कानून लाने के लिए सरकार का समर्थन करते हैं जो हमारे काम को कारगर बनाने और इसे और अधिक पारदर्शी बनाने में हमारी मदद कर सकता है।
लेकिन अधिनियम में कुछ खंड/धाराएं हैं जो रोगियों और डॉक्टरों के हित के लिए प्रतिकूल और हानिकारक हैं।
1 सरोगेसी/आईवीएफ के इलाज के दौरान डॉक्टरों द्वारा किए गए अपराध के लिए 5-10 साल की कैद का प्रावधान है , जो गैर जमानती भी है। एआरटी/सरोगेसी क्लीनिकों के लिए कई अलग अलग रेगुलेशन हैं जबकि यह सिर्फ एक रेगुलेशन कमेटी के तहत होना चाहिए और केंद्रों के पंजीकरण और निगरानी के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए
2 प्रत्येक एआरटी क्लिनिक को पंजीकरण के लिए फ़ीस देनी होती हैं यानी हर 5 साल में 5 लाख रुपये। अगर आप सरोगेसी की सुविधाएं देना चाहते हैं तो समान अवधि के लिए 5 लाख रुपये और देने होंगे।
निजी क्लिनिक से इस शुल्क को वसूलने का कोई आधार नहीं है क्योंकि यह किसी अन्य क्षेत्र में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया जाता है। यह विशेष रूप से छोटे शहरों और गांवों में छोटे बांझपन केंद्रों को ही खत्म कर देगा। और इससे इलाज का खर्चा भी बढ़ जाएगा । इससे इस छेत्र में कॉरपोरेट्स और बड़े सेंटर्स का एकाधिकार हो जाएगा
3 अधिनियम के तहत शर्तें जटिल प्रक्रिया के साथ बहुत सख्त हैं जो प्रोसेस में देरी करेगी और सेवाओं के इच्छुक रोगियों और डॉक्टरों को भी हतोत्साहित करेगी। इससे एक अकेली गाइनी प्रोफेशनल द्वारा चलाए जा रहे छोटे और मध्यम केंद्रों को उन्हें मजबूरन बंद करना पड़ेगा, जिससे यह एक पेशेवर सेवा के बजाय एक व्यवसाय मॉडल बन जाएगा।
4 अविवाहित महिलाओं को सरोगेसी के विकल्प की अनुमति दी जानी चाहिए जैसे कि विधवाओं और तलाकशुदा के लिए अनुमति है।
5 आईवीएफ/सरोगेसी चाहने वाले दंपत्ति के आयु मानदंड में कुछ बदलावों में ढील दी जानी चाहिए क्योंकि कुछ जोड़े त्रासदियों या किसी भी कारण से बच्चे की हानि के कारण इन उपचारों के लिए आते हैं। हमें सरोगेसी/आईवीएफ चाहने वाले दंपत्ति की संयुक्त आयु देनी चाहिए, न कि केवल महिलाओं की उम्र, क्योंकि अधिक उम्र की महिलाएं कम उम्र के पुरुष से भी शादी कर सकती हैं।
डॉ मिसेज जी के बेदी संस्थापक अध्यक्ष आईएसएआर, ने कहा कि अधिनियम प्रथाओं को सुव्यवस्थित करेगा लेकिन कुछ खंड छोटे लागत प्रभावी केंद्रों को हतोत्साहित करेंगे जो इसे विशेष रूप से छोटे शहरों में अत्यधिक कुशल पेशेवर सेवाओं के बजाय एक व्यवसाय मॉडल में बदल देंगे ।
निर्मल भसीन चेयरपर्सन आईएसएआर चंडीगढ़ ने कहा कि हर पांच साल में काफी ज्यादा व् बार बार पंजीकरण शुल्क लेना अत्यधिक अनुचित है और इससे इलाज की लागत अनावश्यक रूप से बढ़ जाएगी।
*आईएमए, चंडीगढ़ ने डॉ अर्चना शर्मा की आत्महत्या के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के लिए केंद्रीय कानून अधिनियम की मांग*
आईएमए चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने राजस्थान में डॉ अर्चना शर्मा की आत्महत्या पर विरोध प्रदर्शन किया और डॉक्टर की मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न में शामिल पुलिस अधिकारियों, स्थानीय गुंडों और अन्य दोषियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की सख्त कार्रवाई की मांग की, जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या की।
आईएमए राष्ट्रव्यापी इस दुर्घटना के विरोध में देश भर में इसका विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च का आयोजन कर रहा है और उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहा है।आईएमए चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ रमणीक शर्मा ने कहा कि डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा का एक केंद्रीय अधिनियम जल्द से जल्द तैयार किया जाना चाहिए। डॉक्टर भारी पेशेवर तनाव में काम कर रहे हैं जो उत्पीड़न, कानूनों के अन्यायपूर्ण कार्यान्वयन और बेईमान तत्वों द्वारा पीछा किया जाता है जो अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी भी स्थिति का लाभ उठाते हैं। यह पहले से ही युवा पीढ़ी को इस पेशे और डॉक्टरों को उच्च जोखिम और जटिल मामलों का इलाज करने से हतोत्साहित कर रहा है जो रोगियों के लिए प्रतिकूल होगा। चंडीगढ़ में कई नर्सिंग होम इसी स्ट्रेस व् बढ़ती कीमतों के चलते चंडीगढ़ में कई नर्सिंग होम बंद हो गए हैं व् बंद होने की कगार पर हैडॉ आरएस बेदी, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आईएमए ने कहा कि हम एसएसपी चंडीगढ़ से अनुरोध करते हैं कि वे सभी पुलिस थानों को कानून के अनुसार एक डॉक्टर को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करें, जैकब मैथ्यूज बनाम पंजाब राज्य में सुप्रीम कोर्ट 2009 के फैसले के अनुसार; जिसमें कहा गया है कि किसी भी गिरफ्तारी से पहले एक मेडिकल कमेटी को अपनी राय देने की जरूरत है।