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कैप्टन की टाइटलर को क्लीन चिट ने फिर भड़काया सिख जगत को

चुनाव हारते देख कैप्टन ने सिखों के जख्मों पर फिर छिड़का नमक- अकाली दल भाजपा

5 दरिया न्यूज (रोहित कुमार)

अमृतसर 20-Apr-2014

१९८४ के सिख नरसंहार के मुख्य दोषी माने जाते कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर को कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा क्लीन चिट दिए जाने की अकाली दल बादल व भाजपा ने तीखे शब्दों में निंदा की है। रविवार को  दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी के दिल्ली से भाजपा के सिख नेता व विधायक आर.पी. सिंह अकाली नेता अवतार सिंह हित्त, भाजपा के प्रांतीय उपाध्यक्ष रजिंदर मोहन सिंह छीना ने एक संयुक्त प्रैस कांफ्रैंस कर कैप्टन के ब्यान की निंदा करते इसे कांग्रेस की सोची समझी हुई प्लॉनिंग बताया।इन नेताओं का कहना है कि सिखों के मक्का माने जाने वाले श्री अमृतसर साहिब में ही अपनी जमीन खिसकती देख कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह ब्यान दिया है। तीस वर्ष से सिखों के कत्लेआम, सिख बहनों व माताओं के साथ उस वक्त हुए अत्याचारों के दोषियों को आज तक सजा न मिल पाने से सिख समाज के जख्म अभी भी हरे हैं। उस पर कैप्टन के ब्यान ने इन जख्मों पर ओर नमक छिड़क दिया है। इन नेताओं का कहना था कि हर बार चुनावों के मौके कांग्रेस ऐसा ही करती है। 

हर जांच रिपोर्ट व हर जशमदीद ने कई बार बताया है कि 1984 के सिख कत्लेआम की गवाही जगदीश टाइटलर, सज्जन कुमार व एच.के.एल भगत ने की थी, लेकिन फिर भी ऐसे ब्यान देकर कांग्रेस चुनावों के मौके अपने गुनाह से पल्ला छुड़वाना चाहती है। इन नेताओं ने बताया कि दरअसल टाइटलर, सज्जन व एच.के.एल भगत ने राजीव गांधी के इच्छारों पर  यह सब किया था। अगर आज टाइटलर व सज्जन पर कांग्रेस कार्यवाई करने देती है तो उन्हें डर है कि कहीं वह गांधी परिवार का नाम न ले दें। इसलिए आज तक इन लोगों पर कोई कार्यवाई नहीं हुई। डीएसजीपीसी के अध्यक्ष श्री जी.के. ने इस संबंध में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से संबंधित दस्तावेज भी दिखाए। जिसमें बताया गया है कि सिख कत्लेआम को रोकने के लिए खुद राष्ट्रपति जैल सिंह द्वारा किए फोन भी प्रधानमंत्री कार्यालय व तत्कालीन गृह मंत्री पी.वी नरसिमहा राव ने सुनने बंद कर दिए थे। 

इन नेताओं का कहना था कि श्री अमृतसर साहिब से कांग्रेस ने ऐसे व्यक्ति को टिकट दी है जो १९८४ के कत्लेआम के दोषियों को क्लीन चिट देता आ रहा है। जबकि खुद उसकी पार्टी के राजकुमार राहुल गांधी इन दंगों में अपने नेताओं की भूमिका स्वीकार चुके हैं। इसका अर्थ साफ है कि अपनी खिसकती चुनावी जमीन को देखकर कैप्टन ने सिखों के जख्म दोबारा फिर कुरेदने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। इसका जवाब इसे अमृतसर से हरा कर दिया जाएगा। इन नेताओं ने यह भी कहा कि जब २००२ के गुजरात दंगों के लिए कांग्रेस ने एसआईटी बना दी तो १९८४ सिख नरसंहार के लिए आज तक एसआईटी क्यों नहीं बनाई गई। हम मांग करते है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सिख नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाने के लिए तुरंत एसआईटी का गठन किया जाए।