वोटर बनाम नेता
5 दरिया न्यूज (नेहा वर्मा)
11-Apr-2014
वर्तमान समय मे भारत वर्ष मे राजनीतिक प्रवेश मैं झाका जाये तो एक ही बात भारतीय वोटर को दिमाग मैं आती है !कि उसे किस पार्टी को वोट देना चाहिए और क्यूँ देना चाहिए ! वर्ष २०१४ के लोगसभा चुनाव शुरू हो चुके है !और राजनीतिक पार्टिया आम जनता को हेर तरह से चुनाव घोषणा पत्र के मध्य से चुनावी रेलिया कर जनता को लुभा रहे है ! भारत का मतदाता आज के इस युग मे इतना समझदार नहीं है कि इन राजनीतिक पार्टियों के पिछले कार्येकाल एवं भविष्य मे चुनाव घोषणा पत्र के बारे मे अपनी पकड़ रख सके ! भारत की जनता केंद्रीय स्तर की विभिन्न समस्याओ के साथ साथ शहर और गाँव की समस्याएं भी हल करने के लिए बेचैन है ! परन्तु इन समस्याओं के बारे मे राजनेतिक दलों को चुनाओं के बाद याद करना बहुत मुश्किल हो जाता है ! चुनाव के समय तो ये राजनेतिक दलों के नेता जनता के सामने हाथ जोड़कर जनता से वोट मांगने का आनुरोध करते है और उस समय जनता की साडी मांगे मान लेते है ! मगर ज्यूँ ही चुनाव पूरे होते है और राजनेतिक दलों के नेता चुनाव जीतने के बाद जनता और उनकी समस्याओ के बारे मे अनजान बन जाते है ! जोकि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए बहुत दुःखदायिक बात है ! मेरा तो ये मानना है कि चुनाव के समय राजनेतिक दलों के घोषणा पत्रों को कानूनी दस्तावेज़ का रूप दिया जाये ! जिसे भारतीय संविधान मे मान्यता डी जनि चाहिए! ताकि चुनाव से बाद जिस किसी भी राजनेतिक दल की सरकार बनती है तो उस पर घोषणा पत्र मे किये गये वायदे को जनता की भलाई एवं उन्नति के लिए लागू करना जरुरी होगा ! अन्यथा उस राजनेतिक दल पैर जनता के प्रति अपनी जिम्मेवारी व उतरदित्व को पूर्ण रूप से न निभाई के संधर्व मे भारतीय संविधान के अनुसार कानूनी कार्येवाई की जानी चाहिये ! इस प्रक्रिया से जनता को अपनी राजनेतिक पार्टी चुनने मे आसानी हो जाएगी ! क्यूंकि अंत मे जनता को ही सफ़र करना पड़ता है ये व्यवस्ता भारतीय लोकतंत्र के परीपक्ष मे नई सोच को जनम देगी !