किसानी आंदोलन को समर्पित पाँच दिवसीय डा. एम. एस. रंधावा कला उत्सव शुरू
प्रसिद्ध शायरों और विद्वानों की तरफ केंद्र सरकार को तुरंत किसानों की मांगें मानने की अपील
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चंडीगढ़ 02-Feb-2021
पंजाब कला परिषद में आज पाँच दिवसीय डा. एम. एस. रंधावा कला उत्सव की शुरूआत हो गई है। इस साल यह उत्सव किसानी आंदोलन को समर्पित है, जिसका उद्घाटन प्रसिद्ध शायर और पंजाब कला परिषद के चेयरमैन डा. सुरजीत पातर ने किया। इस मौके पर पहुँचे सभी वक्ताओं ने किसान आंदोलन की हिमायत की। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को भी अपील की कि किसान आंदोलन को कुचलने की नीति की बजाय किसानों के साथ सौहार्द से बातचीत करके जल्द से जल्द इन किसानों की माँगों का हल करना चाहिए।इस मौके पर संबोधन करते हुये उन्होंने कहा कि डा. रंधावा किसानों के मसीहा थे जो हमेशा हमारे मन में बसे रहेंगे। उन्होंने साथ ही कहा कि वह हमेशा ही किसान समर्थकी प्रशासक रहे और पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी के उप कुलपति होते हुये उन्होंने कृषि को नये रास्ते पर ले जाने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए। इसके इलावा उनकी तरफ से किये सांस्कृतिक, साहित्यक और सामाजिक कामों को भी सदा याद किया जाता रहेगा। डा. पातर ने इस मौके किसानी आंदोलन के साथ सबंधित अपनी चुनिन्दा कवितायें भी सुनाईं।डा. पातर ने इस मौके यह भी कहा कि डा. एम. एस. रंधावा अपने आप में एक महान संस्था का रूप थे।
इस मौके डा. रंधावा के पुत्र जतिन्दर रंधावा और पोते सतीन्द्र रंधावा का सम्मान करते हुये रंधावा परिवार को बधाई भी दी।उत्सव के उद्घाटनी समागम के दौरान वक्ताओं ने डा. रंधावा की शख्सियत के अलग-अलग पहलूयों के बारे रौशनी डाली। मेहमान लेखक गुलजार सिंह संधू ने रंधावा के साथ अपनी नजदीकी के बारे रौशनी डालते हुये दिलचस्प तथ्य पेश किये। डा. बलदेव सिंह धालीवाल ने डा रंधावा की पंजाबी संस्कृति को देन के बारे जानकारी दी और दिलशेर सिंह चन्देल ने श्रोताओं को रंधावा के जीवन के बारे विवरण सहित अवगत करवाया। डा. प्यारा लाल गर्ग ने पंजाबी भाषा और संस्कृति की मौजूदा स्थिति के बारे विशेष भाषण दिया। गायक गुरिन्दर गैरी और रावी बल्ल ने अपनी अपनी गायकी का रंग बिखेरा।मंच संचालन करते हुये पंजाब कला परिषद के मीडिया अधिकारी निन्दर घुगियाणवी ने रंधावा की कलाओं और कलाकारों को दी अनमोल देने के बारे जानकारी दी। नाटककार केवल धालीवाल ने मेले की महत्ता के बारे अपने प्रभाव दिए।धन्यवाद करने की रस्म प्रसिद्ध कवि लखविन्दर जौहल ने निभाई। अंत में लेखकों और कलाकारों का सम्मान किया गया। इस उत्सव के उद्घाटनी समागम में लाभ सिंह खीवा, डा. शिन्दरपाल सिंह, निर्मल जोढ़ा, दीपक शर्मा, संजीवन सिंह, बलकार सिंह सिद्धू, चरनजीत भुल्लर, कैप्टन नरिन्दर सिंह (सेवामुक्त आई. ए. एस), डा. योगराज ऐंगरश, डा. सरबजीत सिंह समेत कई शख्सियतें भी शामिल हुई।