5 Dariya News

बी.एस.एफ. (BSF) का कोई नियमित डी.जी. (DG) क्यों नहीं है?

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नई दिल्ली 25-Jun-2020

डीजी आईटीबीपी श्री एसएस देसवाल पिछले 3 महीनों से डीजी बीएसएफ का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।चीन के साथ मौजूदा तनावों को देखते हुए, उन्हें पाकिस्तान सीमा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अधिक समय नहीं मिलेगा जो समान रूप से अस्थिर है।बीएसएफ को एक नियमित डीजी की आवश्यकता होती है और डीजी बीएसएफ के रूप में एक कैडर अधिकारी नियुक्त करने का यह विवेकपूर्ण समय होगा।दुनिया में कोई भी सशस्त्र बल (बीएसएफ अधिनियम 1968 के अनुसार) का नेतृत्व पुलिस अधिकारी नहीं करता है।

आईपीएस (IPS) अधिकारियों बीएसएफ की स्थिति को पुलिस के समान दिखाने के लिए  लगातार कड़ी मेहनत की है: -

 2012 में बीएसएफ को सीएपीएफ(CAPF) घोषित करते हुए,भले ही वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अनुसूची 7, सूची 1,प्रविष्टि 1, बीएसएफ अधिनियम एवं पूर्व सैनिक नियम 1979 के अनुसार केंद्रीय सशस्त्र बल थे,

*नाइक और लांस नायक के पद का उन्मूलन - उन्हें पुलिस की तरह प्रस्तुत करने के लिए एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया।*

इससे निचली रैंक में ठहराव आ गया है, हवलदार को अपनी पहली पदोन्नति प्राप्त करने में लगभग 20 से 22 साल लगते हैं, जो सीएपीएफ में उच्च संघर्षण दर का कारण होता है।

 *आईपीएस लॉबी द्वारा अपने  योगदान को सही ठहराने के लिए पुलिसिंग अवधारणाओं को लागू करना - बीएसएफ को बांग्लादेशी तस्करों पर गोलीबारी से प्रतिबंधित किया गया था।  इसने बीएसएफ की ओर से भारी हताहत किया है, कई सैनिकों और अधिकारियों ने अपनी जान गंवाई है।*

  *सीएपीएफ विशेष वेतन(CAPF Pay) /पेंशन / उन्नत मूल वेतन / चिकित्सा सुविधाएं / सीपीसी पर जीएसटी छूट -इन मांगों को एक भी आईपीएस डीजी(IPS DG) ने आक्रामक रूप से सरकार के सामने प्रस्तुत नहीं किया * क्योंकि इसका मतलब होगा कि वे पुलिस बलों से अलग हैं जो उनके प्रतिनियुक्ति(डेपुटेशन) को खतरे में डाल सकते हैं*

 फ़ील्ड में जवानों के काम करने की स्थिति -

*आईपीएस अधिकारियों ने न तो फील्ड में कंपनी की कमान संभाली है और न बटालियन की। लेकिन वे ऐसा व्यवहार करेंगे जैसे वे सब कुछ जानते हैं,वे टीवी पर और मीडिया के सामने  कहेंगे कि जवानों का जीवन हमेशा कठिन होता है और वे उसे बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं*

लेकिन सच किसी से छुपा नहीं है कि कैसे आज भी बॉर्डर चौकियों (बॉर्डर आउटपोस्ट) पर जवानों को मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी जूझना पड़ता है

 *बिना कंपनी कमांडर,बटालियन कमांडर  के रूप में जवानों के साथ  समय बिताये आप जवानों की दुर्दशा को कैसे समझेंगे?? जवान हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ हैं,आप उनके घर के निर्माण के पैसे से गोल्फ कोर्स बनाने के बारे में कभी नहीं सोचेंगे यदि आप फ़ील्ड पर उनके साथ कुछ साल बिताते हैं*

 *बीएसएफ की स्थापना के 55 वर्ष बाद भी यदि जवानों की स्थिति अभी भी ठीक नहीं है, तो समय आ गया है कि हम नेतृत्व को बदल दें क्योंकि  देश के लिए अपना जीवन बलिदान करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले जवानों को एक अच्छा जीवन प्रदान करने के अपने कर्तव्य में आईपीएस डीजी(IPS DG)स्पष्ट रूप से विफल रहे हैं*

 (बीएसएफ का आदर्श वाक्य है, "जीवन पर्यन्त कर्त्तव्य")

बीएसएफ का काम सिर्फ सीमा पुलिसिंग नहीं है,यह भारत की पहली रक्षा पंक्ति भी है और हम इसके नेतृत्व को आयातित नेतृत्व (आईपीएस अधिकारी जिन्हे इस बल का जमीनी ज्ञान नहीं है) को सौंप कर और अधिक कमजोर नहीं होने दे सकते।

बीएसएफ की बागडोर उन कैडर अधिकारियों को सौंपने का समय आ गया है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन जवानों के बीच बिताया है,सुख दुख में हमेशा उनके साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़े हुए हैं*

सरकार को इस दिशा में कदम उठाकर बीएसएफ जो हमारी प्रथम रक्षा पंक्ति है को मजबूत कर  देश की सीमाओं को अभेद्य बनाना होगा।

दीपिका देशवाल

DAG (Punjab govt)

Chandigarh High Court