थोपे हुए आका और असहाय अर्धसेनानी के बीच का युद्ध
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नई दिल्ली 29-May-2020
CAPF VS IPS का दव्न्द युद्ध पांच केंद्रीय सशस्त्र बलों के अधिकारियों, जिन्हें अर्धसैनिक बल भी कहा जाता है, और आईपीएस के बीच मे सोश्ल मीडिया मे चल रहा है।हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अनुमोदन के बावजूद,बल मुख्यालय (IPS DGs) उन्हें ‘ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विसेज (ओजीएएस) या ये कहे की संगठित सेवा लाभ प्रदान करने और IPS द्वारा लिए गए पर्यवेक्षी रैंक (डीआईजी,आईजी ) में कमी करके उन सभी पदों पर CAPF अधिकारियों के अधिक पदों की मंजूरी देने की प्रक्रिया में बाधाएं पैदा कर रहा है/कई CAPF अधिकारियों ने गृह मंत्री श्री अमित शाह को पत्र लिखकर आग्रह किया कि IPS अधिकारियों के हाथों अपने सेवा लाभ प्राप्त करने में कथित भेदभाव को समाप्त करने के लिए हस्तक्षेप करे । उच्त्तम न्यायलय ने फरवरी में इस विषय पर दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था और इस बात पर सहमति व्यक्त की थी कि “सभी CAPF अधिकारियों को IAS, IPS, IRS और अन्य सभी केंद्रीय सेवाओं जैसे "संगठित समूह A सेवाएँ (OGAS)" के रूप में मान्यता दी जाएगी एवं एक ही पद पर अधिकारियों को पदोन्नति और अन्य सेवा-संबंधित लाभों को सुनिश्चित किया जाएगा । दिल्ली उच्च न्यायालय में 7 साल की कानूनी लड़ाई और माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कैडर के अधिकारियों द्वारा बहुत लंबे समय से अपने वरिष्ठ रैंकों में आईपीएस अधिकारियों के वर्चस्व को समाप्त करने के लिए चली आ रही कानूनी लड़ाई के बाद यह निर्णय आया था।मोदी सरकार ने 3 जुलाई को घोषणा की थी कि सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे बलों के कैडर अधिकारियों को (एनएफ़एफ़यू/एनएफ़एसजी) गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन दिया जाएगा और उन्हें एक संगठित समूह ए सेवा के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। लेकिन अभी तक बल मुख्यालय (IPS DGs) इस कार्य को या तो धीमी गति से जानबूझ कर चल रहे है या कार्यवाही को समाप्त करने के लिए अनिच्छुक हैं । डीएजी दीपिका देशवाल (पंजाब सरकार ,उच्त्तम न्यायलय ) ने गत वर्ष भी इसी मुद्दे को लेकर डॉ जितेंदर सिंह ,राज्य मंत्री कार्मिक , लोक शिकायत और पेंशन से गुहार लगाई थी एवं CAPF अधिकारियों के मुद्दे को अवगत कराया था । डॉ जितेंदर सिंह ने आश्वशन दिया कि 2019 चुनाव के पश्चात इस मुद्दे पर तुरंत कार्यवाही कि जाएगी लेकिन अभी तक CAPF अधिकारियों को कोई राहत नहीं मिली है / अब डीएजी दीपिका देशवाल ने इस मुद्दे पर पहल करते हुए कानूनी रूप से एवं लोगों के साथ मिलकर एक मुहिम छेड़ने की कोशिश की है ताकि CAPF अधिकारियों को न्याय मिल सके / दीपिका देशवाल ने ट्वीटर पर एक विडियो बना कर पर्सिद्ध नेताओ ,कलाकारों एवं अपने देश के सभी लोगों से अपील की है ताकि वो सब भी इस मुहिम के साथ जुड़ सके / उन्होने सभी लोगों से प्रार्थना की है कि इस मुहिम से आप सब अधिक से अधिक मात्रा में जुड़े ताकि सरकार पर दबाव बना कर हम सब अपने सशस्त्र बलों के सिपाहियों के साथ खड़े होकर उनका मनोबल बढ़ा सके /
डीएजी दीपिका देशवाल ने मांग की है की
1) CAPF के लिए , OGAS आधारित नए सर्विस रुल्स (Service Rules) बनाए जाए और तब तक , सर्विस रुल्सकी अनिवार्यता में छुट देते हुए DOPT के आदेश 24 अप्रैल 2009 के पैरा 1(i) के तहत CAPFs को NFFU प्रदान किया जाए /
2) DOPT के 15 दिसम्बर 2009 के आदेश के अनुसार और अन्य OGAS सर्विस के समान SAG और HAG पोस्ट में प्रमोशन तथा प्रमोशन न होने की दशा में NFFU दिया जाए। "जब आप मान्यता प्राप्त नहीं हैं, तो चिंता न करें, लेकिन पहचान के योग्य होने का प्रयास करें।“ अब्राहम लिंकन के ये शब्द शायद केंद्रीय पैरा मिलिट्री फोर्सेज के कैडरों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत रहे हैं – चाहे वह कश्मीर में उग्रवाद से निपटने, या माओवादी विद्रोह, या भारत की सीमाओं की सुरक्षा और पवित्रता सुनिश्चित करना ,चुनाव प्रक्रिया , स्पेशल फोर्सेस (NSG,SPG) , काउंटर टेररोरीस्म ,काउंटर इनसेरजेंसी , केंद्रीय पैरा मिलिट्री फोर्सेज जम्मू कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी एवं सिर क्रीक,गुजरात से लेकर चौकन पास ,अरुणाचल प्रदेश तक सभी दुर्गम स्थानो पर अमानवीय रहने की स्थिति, परिवारों से अलगाव और लंबे समय तक अलगाव, कैरियर की प्रगति के रास्ते की कमी सहित कोई भी कठिनाई कभी भी इन बहादुर सैनिकों की लड़ाई करने की क्षमता , दक्षता एवं दृद्ता उनकी आत्माओं को कम करने में सक्षम नहीं हुई है।
Deepika Deshwal
(DAG,Punjab govt officer)