5 Dariya News

उच्च न्यायालय ने महिलाओं, लड़कियों पर लॉकडाउन के नकारात्मक प्रभाव का स्वतः संज्ञान लिया

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में सभी न्यायालयों को घरेलू अत्याचार के मामलों से तत्काल निपटने का निर्देश दिया गया

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जम्मू 18-Apr-2020

जम्मू व कश्मीर उच्च न्यायालय ने आज आदेश दिया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सभी न्यायालय घरेलू शोषण के मामलों को तत्काल जरूरी मानेंगे और प्रक्रिया के संबंध में जारी परिपत्रों के अनुसार सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए मामलों के साथ आगे बढ़ेंगे।कोविड-19 महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के महिलाओं और लड़कियों पर नकारात्मक प्रभाव के बारे में स्वतः संज्ञान लेते हुए, मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायधीष राजेश ओसवाल ने आज एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपने अपने संबंधित निवासियों के मामले की सुनवाई की।न्यायालय ने इस बिंदु पर प्रकाश डाला कि विश्व स्तर पर यह देखा गया है कि महिलाओं और लड़कियों के लिए महामारी के प्रतिकूल सामाजिक और आर्थिक परिणाम विनाशकारी हैं।उच्च न्यायालय ने सचिव, समाज कल्याण विभाग, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की सरकारों और सदस्य सचिव जेकेएसएलएसए को कोविड-19 लॉकडाउन के कार्यान्वयन के कारण महिलाओं पर घरेलू या किसी अन्य प्रकार की हिंसा के संबंध में उठाए गए कदमों के संबंध में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में विभिन्न देशों द्वारा उठाए गए कई उपचारात्मक उपायों की जांच करने का निर्देश दिया और दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में घरेलू हिंसा के पीड़ितों के कष्टों को कम करने के लिए आवश्यकताओं और कदमों के संबंध में एक विचार करने के लिए कहा।कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली तारीख से पहले इसके उपायों, उठाए जा रहे कदमों की एक रिपोर्ट पेष की जानी चाहिए।इसके अलावा, जम्मू व कश्मीर विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को घरेलू हिंसा के मामलों से संबंधित सभी मामलों की सूची के लिए संपर्क करने के लिए निर्देशित किया गया जो केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस स्टेषनों में या न्यायालयों में शिकायत के रूप में लंबित हैं। न्यायालय कहता है कि जम्मू व कश्मीर विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव इस संबंध में पुलिस और पैरा विधिक स्वयंसेवकों की सहायता ले सकते हैं।