5 Dariya News

जम्मू-कश्मीर समग्र शिक्षा ने केजीबीवी की छात्राओं को डीबीटी के माध्यम से 44,73,600/-रु. वजीफा के रूप में जारी किए

“कमजोर वर्गों से संबंधित लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जा रहा है“-हृदेश

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जम्मू 30-Jan-2020

जम्मू व कश्मीर समग्र शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2019-2020 के लिए नामांकित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) की छात्राओं के पक्ष में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मोड के तहत 44,73,600/- रुपये की राशि वजीफा के रूप में जारी की है। 3728 लाभार्थी के बैंक खातों में प्रति वर्ष 1200 प्रति लड़की को सीधे वितरित किया गया।  उक्त गतिविधि समग्र शिक्षा के मौजूदा जेंडर और इक्विटी (केजीबीवी) हस्तक्षेप का हिस्सा है।केजीबीवी एक केंद्र प्रायोजित योजना है और अनुसूचित जाति (एससी) अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित लड़कियों के लिए समग्र शिक्षा का एक हस्तक्षेप है जो कक्षा 6वीं से 8वीं तक लड़कियों के लिए शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों में आवासीय विद्यालय स्थापित करने के लिए जुलाई 2004 में शुरू किया गया था। समग्र शिक्षा केजीबीवी को सुविधा प्रदान करती है और विभिन्न गतिविधियों के लिए एचएमआरडी भारत सरकार द्वारा अनुमोदित धनराशि प्रदान करती है।समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक डॉ. अरुण मन्हास ने मीडिया के साथ बातचीत करते हुए बताया कि जेंडर और इक्विटी (केजीबीवी) हस्तक्षेप के तहत, निदेशालय ने वर्ष 2019-20 के लिए डीबीटी के तहत 44,73,600 रु. की कुल राशि वितरित की है जिसमें केजीबीवी में अध्ययनरत 3728 बालिकाओं को लाभ मिला। वार्षिक रूप से एमएचआरडी भारत सरकार केजीबीवी स्कूलों में पढ़ने वाली बालिकाओं के लिए वजीफा जैसे विभिन्न भत्तों के लिए धनराशि जारी करता है। पहले, ऐसे भत्तों का उपयोग बहु स्तरीय प्रणाली के माध्यम से किया जाता था, जिसके कारण लाभार्थियों को वास्तविक लाभ प्राप्त करने में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन चालू वित्त वर्ष से, समग्र शिक्षा ने एक पहल की है, जिसमें ऐसे भत्ते सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में वितरित किए जाएंगे।स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त/सचिव हृदेश कुमार ने जम्मू-कश्मीर में विशेषकर केजीबीवी संस्थानों में अध्ययनरत बालिकाओं के उत्थान और कल्याण की दिशा में समग्र शिक्षा द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कमजोर वर्गों विशेष रूप से पिछड़े और दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाली बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने का उल्लेख किया ताकि साक्षरता में लिंग अंतर को दूर किया जा सके। उन्होंने ऐसी पहल की खोज करने पर जोर दिया जिसमें सभी प्रकार के लाभ और प्रोत्साहन सीधे पात्र लाभार्थियों को हस्तांतरित किए जा सकें। उन्होंने पीएफएमएस के माध्यम से सभी प्रकार के लेनदेन और संवितरण करने और नियमित आधार पर एमएचआरडी के पीएमएस (प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम) पोर्टल पर भी अपडेट करने की सलाह दी।आयुक्त/सचिव ने राज्य परियोजना निदेशक डॉ. अरुण मन्हास और जेंडर और इक्विटी (केजीबीवी) की पूरी टीम को विशेष रूप से राज्य समन्वयक जोगिंदर कुमार, सहायक राज्य समन्वयक मुदस्सर अहमद वानी, तकनीकी टीम के सदस्य उर्शद कादरी और अन्य सहायक कर्मचारी को बधाई दी। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे छूटे हुए मामलों को संकलित करें और नए लाभार्थी छात्रों की पहचान करें, जिन्हें योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए संवितरण की आवश्यकता है।