5 Dariya News

‘प्रधानमंत्री जी आप मुझे प्रयोगशाला दो, मैं भारत को नोबेल प्राइज दूंगा

334 वर्ष पुराने न्यूटन के तीसरे नियम में संशोधन, अन्तिम मान्यता के लिए कुछ प्रयोगों की आवशयकता

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शिमला 02-Jan-2020

अजय शर्मा पिछले 38 वर्षों से विज्ञान के आधारभूत नियमों पर शोध कर रहे है। 1982 में जब उन्होंने ने यह रिसर्च शुरू की थी तब वो 19 वर्ष के थे और बीएससी  के स्टूडेंट थे। अब न्यूटन की गति के तीसरे नियम के संशोधन पर मान्यता मिल रही है। सिर्फ कुछ प्रयोग ही बाकी हैं इस सम्बध में हमने उनसे बातचीत की। 

प्र-1 : अजय जी आप कह रहे है कि प्रधानमंत्री जी आप मुझे प्रयोगशाला दो मैं भारत को फिजिक्स में नोबेल प्राइज दूंगा।

अजय :  जी हां मैंने 334 वर्ष पुराने न्यूटन के तीसरे नियम में संशोधन किया है। विश्ष्व भर के वैज्ञानिकों ने इसे माना है। इसी आधार पर यह कह रहा हूँ। इस से पहले  भारत में विज्ञान में किए गये शोध तो को 1930 में नोबेल प्राइज़ रमन मिला था. 

प्र-2 :  न्यूटन का तीसरा  नियम विज्ञान का आधारभूत नियम है। आपके द्वारा सुझाये गए संशोधन पर वैज्ञानिकों की इस पर क्या राय है।

अजय :  22 अगस्त अमेरिकन एसोसिएसन आफ फिजिक्स टीचर्ज के प्रैजीडेंट प्रोफैसर गारडन पी रामसे ने रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि अजय द्वारा सुझाये गए प्रयोगों मे न्यूटन का तीसरा नियम गलत सिद्ध हो सकता है। न्यूटन का नियम वस्तु के अनुसार की अनदेखी करता है। यह इसकी खामी है।अभी अक्तूबर 2019 में (CSIR) की दिल्ली स्थित नैशनल फिजिकल लैबोरेटरी ने भी मेरी शोध पर विस्तृत रिपोर्ट में भी यह बात कहीं है। मुझे प्रयोगों के लिए पूरा प्रोजेक्ट भेजने को कहा है। देश विदेश के वैज्ञानिकों का भी यह मत है कि इस प्रयोगों से न्यूटन का नियम गलत सिद्ध हो सकता है।

प्र-3 : अभी जनवरी महीने में न्यूटन के तीसरे नियम में संशोधन नामक शोधपत्र को प्रस्तुत करने के लिए कहां जा रहे है ।

अजय : 107 वी इंडियन साइंस कांगेस 2020 में रिसर्च पेपर को प्रस्तुत करने के लिए बंगलौर जा रहा हूँ। यह प्रस्तुति 6 जनवरी 2020 को है।

प्र-4 : अजय जी यह बताए कि न्यूटन का तीसरा नियम आखिर है क्या?

अजय : न्यूटन के तीसरे नियम के मुताबिक क्रिया और प्रतिक्रिया या एक्सन और रैक्सन हमेशा बराबर और विपरीत होते है। यह नियम न्यूटन ने 1686 में अपनी पुस्तक प्रिसीपियां में दिया था।

प्र-5 : इस नियम की खामी क्या है?

अजय :  नियम की महत्वपूर्ण खामी यह है कि यह वस्तु के आकार की अनदेखी करता है। मान लो रबड़ की 1 कि ग्राम भार की कोई वस्तु है। इसके भिन्न आकार हो सकते है। जैसे गोल, अर्धगोल, शंकु, त्रिभुज, आयताकार, स्पाट या अनियमित आकार 1 मान लो वस्तु को 1 मीटर ऊंचाई से फर्श पर गिराते हैं तो रबड़ की गोल गेंद। 1 मीटर की ऊंचाई तक टकराकर वापिस आ जाती हैं इस तरह क्रिया और प्रतिक्रया बराबर होती है। पर अन्य वस्तुएं फर्श पर टकरा कर वापिस नहीं आती हैं। इस तरह क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर नहीं होती है। अतः वस्तु का आकार महत्वपूर्ण है।

प्र-6 : आपने न्यूटन के तीसरे नियम की खामी की व्याख्या कैसे की है?

अजय :  इसके लिए नियम में संशोधन किया गया है। संशोधित नियम के अनुसार क्रिया प्रतिक्रिया के बराबर ही बल्कि समानुपात (प्रोपेोरसनल( Proportional)   में होती है। इससे समीकरणों में एक नया घटक या फैक्टर आ जाता है। यह घटक वस्तु के आकार की व्याख्या करता है।

प्र-7 : तो अब प्रयोगों मे मुष्किल कहां है?

अजय :   मैंने जिन्दगी भर स्कूल-कालेज में फिजिक्स पढ़ाई हैं मेरी पास प्रयोगों की कोई सुविधा नहीं है। ये प्रयोग ही अन्तिम रूप से निर्णायक सिद्ध होंगो। मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, माननीय साइंस एंड टैक्नोलोजी डा० हर्ष वर्धन, माननीय मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर एवं माननीय शिक्षा मंत्री श्री सुरेश भारद्वाज जी से प्रार्थना करता हूँ कि मुझे प्रयोगशाला दी जाए, मैं भारत को फिजिक्स में नोबेल प्राइज दूंगा।

अजय शर्मा

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