सरकार विधान सभा जैसी पवित्र संस्था को खत्म करने के लिए बजिद - अमन अरोडा
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चंडीगढ़ 26-Jul-2019
सात सालों मे केवल 362 घंटों के विधान सभा काल मे 210 करोड रुपये खर्च किएशैशन के पहिले सिर्फ श्रदांजलीयों वाले दिन टी.ए, डी.ए ना लेने का अैलानविधान सभा की कार्यवाही को लाईव टैलीकास्ट करने की मांग कीसुनाम से विधानसभा पार्टी के विधायक अमन अरोडा ने कहा है कि राज सरकार और स्पीकर पंजाब की विधानसभा की कदर कीमतों को गिरा रहे हैं कयोकि पंजाब सरकार हर पहलु से फेल हो चुकी है और अब वह विधानसभा में विरोधी दल का सामना करने से कतरा रही है, इसी लिए विधान सभा के शैशन को नामात्र किया जा रहा है। सरकार और सपीकर पर विधान सभा के मानसून शैशन की केवल 2 ही बैठकों का आयोजन पर दोष लगाते हुए कहा कि यह पंजाब राज के लोगो के साथ मजाक किया गया है। उन्हों ने विधान सभा के रूल-ए को याद करवाते हुए कहा कि विधान सभा की कम से कम 40 बैठकें होनी जरुरी है और इस रूल की पालना 70 के दशक तक होती रही पर उस के बाद असैंबली शैशनों में इस रूल की उलंघना हुई और विधान सभा शैशन मात्र एक उपचारिकता बन कर रह गए। श्री अरोडा ने 2012 से 2018 के रिकार्ड का हवाला देते हुए कहा कि पिछले साल सालों में विधान सभा की केवल 100 बैठकें हुई और जो केवल 362 घंटे ही चली और 25 घंटों के लिए यह बैठकें मुलतवी भी करनी पडी और 316 ध्यान दिलाउ नोटिस भी दिए गए, जिनमें से स्पीकर ने सिर्फ 129 सवीकार किए और स्पीकर ने 24 मुलतवी प्रस्तावों में एक भी स्वीकार नही किया । उन्हों ने कहा कि विधान सभा के मैंबरों की तरफ से पेश किए गए 10 प्राईवेट बिलों में एक बिल भी स्वीकार नही किया । स्पीकर द्वारा बुलाया गया कम समय का शैशन एक बने बनाए बहाने पर आधारित होता है कि विधान सभा के लिए काम की कमी है जब कि सचाई यह है कि सरकार स्पीकर को गंभीर मामले लेने की इजाजत नही देती क्योकि सरकार के पास इन मामलों का कोई जवाब नहीं होताइस तरह विरोधी दल की आवाज को कुचला जाता है। श्री अरोडा ने कहा कि 362 घंटों के काम के लिए सरकार ने लोगो के 210 करोड रुपये खर्च कर दिए हैं, अब इनमें मुख्य मंत्री, मंत्रियों और विधायकों की तनखाह ओर टी.ए, डी.ए शामिल नहीं हैं उन्हों ने कहा कि 1948 से 1979 तक पहिले दिन श्रदांजली देने के साथ-साथ विधान सभा का बाकी काम भी हुआ करता था, परन्तु इस के बाद इस प्रथा मे निगार आता गया । श्री अरोडा ने स्पीकर को अपील की है कि इस शैशन की कम से कम 15 बैठके निशचित की जानी चाहिए, शैशन की कार्यवाही को लाईव टैलीकासट किया जाना चाहिए और पहिले दिन श्रदांजली देने के बाद विधान सभा का बाकी काम भी किया जाए नहीं तो वह "कोई काम नही, कोई भ्ता नही" नियम मुताबिक शैशन के पहिले दिन का कोई टी.ए और डी.ए नहीं लेंगे।