राष्ट्रीय स्तर पर कांगड़ा पेंटिंग को पहचान दिलाने पर मंथन
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धर्मशाला 01-May-2019
कांगड़ा आर्टस प्रमोशन सोसायटी के संवर्धन में ग्रामीण कारीगरों के सामाजिक-आर्थिक विकास में पारम्परिक मूल्यवान उत्पादों के महत्व को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश पेटैंट सूचना केंद्र, हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद्, शिमला ने भौगोलिक संकेत पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन एचपीटीडीसी क्लब हाऊस, मैंकलोड़गंज में किया। इस कार्यशाला का उपायुक्त कागड़ा संदीप कुमार ने उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांगड़ा पेटिंग और अन्य जीआई को बढ़ावा देने के लिए विशेष रणनीतियों पर चर्चा की गई तथा कांगड़ा पेटिंग के अधिकृत उपयोगिता के लिए पंजीकरण शुल्क जो कि 600 रुपए है, आयुक्त मंदिर द्वारा प्रतिपूर्ति की जाएगी। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर प्रदर्शन करके कांगड़ा चित्रकला को बढ़ावा देने में कांगड़ा आर्टस प्रमोशन सोसायटी के प्रयासों की सराहना कीभौगोलिक संकेत (जी.आई.) एक संकेत है जो उन उत्पादों पर उपयोग किया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पति होती है और उन गुणों या प्रतिष्ठा जो उस मूल के कारण होती है। पंजीकरण भौगोलिक संकेतों को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है जो बदले में निर्यात को बढ़ावा देता है। यह भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित वस्तुओं के उत्पादकों की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देता है। भ्प्डब्व्ैज्म् ने कुल्लू शॉल, कांगड़ा चाय, चंबा रूमाल, किन्नौरी शॉल और कांगड़ा पेटिंग, हिमाचली काला ज़ीरा, हिमाचली चुल्ली तेल पंजीकृत किया है जबकि चम्बा चप्पल, हिमाचली चिलगोजा जीआई रजिस्ट्री कार्यालय चेन्नई में पंजीकरण की प्रक्रिया में है। कार्यशाला का शुभारंभ कांगड़ा आर्टस प्रमोशन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ0 अक्षई रंचल ने कांगड़ा पेटिंग पर एक संक्षिप्त परिचय के साथ किया जिसमें कांगड़ा पेटिंग के प्रचार में इतिहास तथा कांगड़ा आर्टस प्रमोशन सोसाइटी की ख्याति की चर्चा की गई।डीआईजी कांगड़ा संतोष कुमार तथा उप निदेशक पर्यटन श्रीमती मधु चौधरी भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। डा0 मधु चौधरी ने कांगड़ा पेटिंग और हिमाचल के अन्य जी.आई. को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग से पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया जबकि डीआईजी ने हिमाचल प्रदेश के जी.आई को लोकप्रिय बनाने के लिए सुझाव दिया तथा होटल व्यवसायिों को पेंटिंग खरीदने और स्कूल के पाठ्यक्रम में जी.आई. को शामिल करने का सुझाव दिया और स्थानीय लोगों से भी इस कला को सीखने और इसे विलुप्त होने से रोकने के लिए कहा। सुश्री अनुपमा वर्मा परीक्षक ट्रेडमार्क, सीजीपीडीटी ने जी.आई की प्रक्रिया और जी.आई आवेदन के पंजीकरण के बारे में विस्तार से चर्चा की। सुश्री ज्योति दलाल डीपीआईआईटी भी कार्यशाला में उपस्थित थी।