5 Dariya News

विदेश नीति में देश की राजनीति प्रतिबिंबित नहीं होनी चाहिए

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नई दिल्ली 16-Dec-2018

देश की विदेश नीति में भावनाओं व देश की राजनीति की झलक नहीं हो सकती और इसमें राष्ट्रीय हित सर्वोच्च बना रहना चाहिए। भारतीज जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने यह बात कही। शनिवार शाम को यहां वरिष्ठ पत्रकार वर्गीज के. जॉर्ज द्वारा लिखित पुस्तक ओपन एंब्रेस : इंडिया-यूएस टाइज इन द एज ऑफ मोदी एंड ट्रंप के लॉन्च पर एक चर्चा में भाजपा के महासचिव राम माधव ने कहा, मुझे नहीं लगता कि हमें हमारी विदेश नीति में हमारी विचारधारा को लाना चाहिए। माधव ने नई दिल्ली की नीतियों के साथ-साथ वाशिंगटन की नीतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते बेहतर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि बीते साढ़े चार साल में राजग सरकार ने भारत के अमेरिका के साथ रिश्ते को संभालने का प्रयास किया और देश वाशिंगटन के बड़े रक्षा साझेदारों में से एक बन गया है और उसके साथ उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सहयोगी के तौर पर बर्ताव किया जा रहा है। उन्होंने कहा, मुझे कोई समानता नहीं दिखती कि ट्रंप का अपने मतदाताओं के प्रति कैसा रुख है और मोदी का अपने निर्वाचन क्षेत्र में कैसा रवैया है। 

मुझे नहीं लगता कि भारत-अमेरिकी रिश्ते को कोई भी रंग देना सही है। भाजपा नेता ने कहा, विदेश नीति भावनाओं के माध्यम से नहीं बनाई जा सकती, इसका निर्माण राष्ट्रीय हित को दिमाग में रखकर किया जाना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरकारों में बदलाव के साथ विदेश नीति को अचानक नहीं बदला जा सकता। उन्होंने कहा, आप अपनी विदेश नीति में अपनी घरेलू राजनीति को प्रतिबिंबित होने की इजाजत नहीं दे सकते। शर्मा ने कांग्रेस द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन के समय से विदेश नीति तैयार करते रहने का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने आजादी के बाद से स्पष्ट कर दिया था कि वो जिस भी रूप में है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने विदेश दौरे पर भारतीय आव्रजकों के साथ जुड़ाव के संदर्भ में माधव ने कहा कि राजग सरकार आव्रजकों को शामिल कर विदेश नीति को एक नया आयाम देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, मोदी भारतीय आव्रजकों का लाभ उठाना चाहते हैं और इसलिए हमने हमारी विदेश नीति में आव्रजकों को एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।