5 Dariya News

‘स्टेट वाटर पालिसी‘ की अनुपस्थिति के चलते पंजाब अपने हिस्से का पानी लेने में भी रहा है नाकामयाब - अमन अरोड़ा

दयनीय जल-प्रबंध अकाली, कांग्रेसी सरकारों की किसानों प्रति सोच को करता है उजागर

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चंडीगड़ 13-Nov-2018

आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता और हलका सुनाम से विधायक अमन अरोड़ा ने मौजूदा पंजाब सरकार को पानी के मसले पर दिशाहीण बताते हुए कहा कि खेती प्रधान सूबा होने के बावजूद भी आज तक पंजाब सरकार ने सूबे के लिए पानियों के संबंध में कोई पालिसी नहीं बनाई, जिस का क्षतिपूर्ति आज पंजाब को भुगतना पड़ रहा है। अरोड़ा ने ‘स्टेट वाटर पालिसी‘ को समय की अहम मांग इकरार देते कहा कि जहां कुदरती स्त्रोतों से प्राप्त पानी बेकार जा रहा है वहीं धरती निचले पानी की जरूरत से अधिक निकासी करने से आने वाले कुछ सालों में ही पंजाब रेगिस्तान में तबदील हो जायेगा क्योंकि हर साल पंजाब के 14 लाख ट्यूबवैल पंजाब की जमीन निचले सालाना उपलब्ध 17.54 पानी के मुकाबले 29.01 पानी निकाल लेते हैं जिस कारण जमीन निचला पानी का स्तर हर साल स्वा फुट (40 सैंटीमीटर) नीचे जा रहा है।चण्डीगढ़ में मीडिया को संबोधन करते अमन अरोड़ा, कोर कमेटी के चेयरमैन प्रिंसीपल बुद्ध राम, सर्वजीत कौर माणूंके, मनजीत सिंह बिलासपुर, कुलवंत सिंह पंडौरी (सभी विधायक) ने कहा कि यह पंजाब के लिए शर्म वाली बात है कि पिछले 37 सालों (1981 -82 से 2017 -18 तक) पंजाब के पानियों पर राजनैतिक रोटियां सेक कर कई-कई बार सरकारें बनाने वाले अकाली दल और कांग्रेस 1981 के पंजाब -विरोधी पानियों के समझौते मुताबिक भी अपने उपलब्ध हिस्से का पानी इस्तेमाल करने में नाकामयाब रहे हैं। तथ्य पेश करते उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर सतलुज दरिया में पंजाब का हिस्सा 37 सालों में कुल 245.62 बनता था जिस के मुकाबले पंजाब सिर्फ 227.67 ही सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा सका जो कि बनते उपलब्ध हक की अपेक्षा 17.95 और पंजाब के हिस्से अपेक्षा यह 8 प्रतिशत कम है। जिस के साथ हर साल स्वा लाख एकड़ जमीन की सिंचाई की जा सकती है। इस के उलट हरियाणा पिछले 37 सालों में अपने बनते कुल 132.19  हिस्से के मुकाबले 141.87 पानी ले जा चुका है जो कि बनते हिस्से के अपेक्षा 8 प्रतिश्त ज़्यादा है। उन्होंने प्रकाश सिंह बादल और कैप्टन अमरिन्दर सिंह पर तीखी राजनैतिक हमला बोलते कहा कि यह इन दिग्गज नेताओं की पंजाब प्रति संवेदनहीनता और नालायकी जाहिर होती है कि पानियों के नाम पर लोगों को लडा कर, खुद सत्ता का सुख भोग रहे हैं, समय-समय सिर अपने आप को ‘पानियों के राखे‘ होने का तगमा देने वाले इन नेताओं की पंजाब विरोधी नीतियों ने पंजाब को रेगिस्तान बनाने के किनारे ला खड़ा किया है।

अमन अरोड़ा ने कहा कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह जो बीते दिनों इजराइली दौरे पर गए थे और जिस से पंजाब के लोगों को काफी उम्मीदें थी परन्तु अभी तक कैप्टन साहिब ने अपने दौरे दौरान किए समझौतों के बारे में पंजाब को जानकार नहीं करवाया है। इस में कोई शक नहीं कि इजराइल ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में अपना लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है और पानी की भारी दिक्कत और लगातार पड़ते सूखों के बावजूद इजराइल ने अपनी सूझ-समझ और बेमिसाल तकनीक के ज़रिए इस भारी मुश्किल से अपने आप को बचा कर रखने में कामयाबी हासिल की है।अरोड़ा ने कहा कि पंजाब को आज जहां जल प्रबंधन के क्षेत्र में विश्व स्तरीय तकनीकों का सहारा लेने की जरूरत है वहीं ही यह तथ्य भी गंभीर चिंता का विषय है कि आज पांच दरियाओं की धरती पंजाब, समय -समय की सरकारों द्वारा लिए पंजाब विरोधी और गैर जिम्मेदार फैसलों ने पंजाब के लिए यह गंभीर संकट खड़ा कर दिया है जिस में प्रमुख तौर पर पड़ोसी राज्यों राजस्थान और हरियाणा के साथ किये गए समझौते और सिंचाई के लिए समय -समय की सरकारों की ोर से पानी की सभ्य प्रयोग और जमीन निचले पानी के स्तर को दोबारा रिचार्ज (ऊंचा उठाना) करने के लिए कोई ठोस उपराले न करने कर के है। उन्होंने कहा कि यह अब तक के राजनैतिक नेताओं की लापरवाही नहीं तो ओर क्या है कि राजस्थान ने पंजाब से पानी ले कर तो अपने राज्य के लिए पालिसी बना ली परन्तु पंजाब की लीडरशिप की अभी तक कुंभकरनी नींद नहीं खुली।अरोड़ा ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह पर व्यंग्य करते कहा कि यह ठीक है कि 2004 में आपने पानी के समझौते रद्द कर राजनैतिक लाभ तो जरूर लिया परन्तु पंजाब को दरियाई पानी के पक्ष से इस का कोई लाभ नहीं मिल सका। क्योंकि आपकी सरकार ने इस की सही ढंग के साथ पैरवी नहीं की। जब कि होना यह चाहिए था कि जब पानियों के यह समझौते आपने रद्द कर ही दिए थे तो पड़ोसी राज्यों को यह पानी मुफ्त जाने देने से पहले पंजाब के लिए ‘धरती निचले पानी की सही प्रयोग सम्बन्धित नीति बना कर जमीन निचले पानी का स्तर ऊंचा उठाना चाहिए था।अमन अरोड़ा ने पंजाब सरकार से मांग की है कि जल्दी से जल्दी सूबे के लिए वाटर पालिसी लाई जाये जिससे बंजर होने की तरफ बढ़ रहे पंजाब को हरा भरा रखा जा सके।